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कठुआ रेप-मर्डर केस: चार्जशीट में बड़े खुलासे, सामने आई रसूखदारों के साथ पुलिस वालों की साठगांठ

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 April 2018, 13:47 IST

एक आठ साल की छोटी बच्ची, देश में इन छोटी बच्चियों को देवी समझ कर पूजा जाता है. वहीं, कठुआ मामले में जो हैवानियत एक 8 साल की बच्ची के साथ की गयी उसके बाद ये बातें खोखली सी दिखती हैं. जम्मू के कठुआ में 8 साल की एक मासूम का एक मंदिर के अंदर गैंगरेप किया गया वो भी तीन बार. इतना नही पुलिस वाला जो इस मामले की जांच कर रहा था उसने भी अपनी हवश मिटाने के लिए मासूम का रेप कर डाला.

आरोपियों में हैवानियत इस कदर सवार थी कि, उनमे से एक बलात्कारी को ख़ास तौर पर मेरठ से बुलाया गया था, सिर्फ उसकी ''वासना को संतुष्ट'' करने के लिए. मासूम को सर पर पत्थर से दो बार मारा गया,ये तसल्ली करने के लिए की उसकी मौत हुई है या नहीं.

वासना किस तरह से उन जानवरों पर सवार थी इस बात का अंदाजा इससे ही लगाया जा सकता है कि मासूम को जान से मारने के पहले एक पुलिस वाले ने बाकियों से रुकने को कहा, क्योंकि वो 'एक आखिरी बार फिर से उसका रेप करना चाहता था.'

और ये सब किया गया रसाना गांव से एक घूमंतू  मुस्लिम परिवार को हटाने के लिए. नफरत के नाम पर बलि चढाई गयी एक 8 साल की मासूम जिसे शायद हिन्दू -मुस्लिम के मायने भी नहीं पता होंगे. ये कुछ वो तथ्य हैं जो कि 18 पेज की चार्जशीट में लिखे है, जिसे सोमवार को पुलिस क्राइम ब्रांच ने 8 आरोपियों के खिलाफ दायर की. इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक चार्जशीट में ये भी तथ्य है कि आरोपी ने 1.5 लाख रुपये रिश्वत के तौर पर एक पुलिस वाले को दिए जिसे ये पता था की बच्ची को कहां रखा गया है और उसने मामले को कवर करने में मदद की.

संवेदना की जगह सियासत
जम्मू कश्मीर में अब इस रेप और हत्या के संवेदनशील मामले में राजनीति बढ़ती जा रही है. वकीलों ने इस बारे में चार्जशीट दाखिल करने जा रही टीम का विरोध किया और अब बुधवार को जम्मू बंद बुलाया गया है. पुलिस ने इस बारे में कुछ वकीलों के खिलाफ मामला भी दर्ज किया है.

जिस तरह से डिस्ट्रिक्ट जेल के आगे कठुआ बार के वकील प्रदर्शन कर रहे हैं, ये बात हैरान करने वाली है.आठ साल की आसिफा से रेप और उसकी हत्या के मामले में सात आरोपियों के खिलाफ जम्मू-कश्मीर क्राइम ब्रांच को चार्जशीट दायर से रोका क्यों जा रहा है. काफी मशक्कत के बाद क्राइम ब्रांच की टीम दाखिल तो हो गई लेकिन चीफ ज्यूडिशयल मजिस्ट्रेट को उसे मंजूर करने में छह घंटे और लगे, वो भी जम्मू कश्मीर के कानून मंत्री की दखल के बाद.

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पुलिस ने वकीलों के खिलाफ दर्ज किया केस

जम्मू कश्मीर पुलिस ने उन वकीलों के खिलाफ काम में बाधा पहुंचाने का केस दर्ज किया है. बताया जा रहा है कि बार एसोसिएशन, बीजेपी से जुडी हुई है जो मासूम की रेप और हत्या के मामले का राजनीतिकरण करते हुए आरोपियों का बचाव कर रही है. इतना ही नहीं सीबीआई जांच की मांग करते हुए बुधवार को जम्मू बंद भी बुलाया गया है.

जनवरी में बीजेपी के वनमंत्री लाल सिंह और उद्योग मंत्री चंद्रप्रकाश गंगा दोनों एक स्थानीय समूह हिंदू एकता मंच के साथ खड़े दिखे, जिसने राष्ट्रीय ध्वज के साथ रैली निकालकर गिरफ्तारियों को हिंदुओं पर लक्षित हमला करार दिया, जिसके जवाब में मुख्यमंत्री महबूबा के बयान पर सहयोगी पार्टी बीजेपी से उनके गहरे मतभेद सामने आ गए.

मंगलवार को पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट कर कहा, ' 'वकीलों के भेस में कठुआ की भीड़ के ख़िलाफ़ जम्मू-कश्मीर की कार्रवाई की सराहना करते हुए ये भी नहीं भूलना चाहिए कि महबूबा मुफ्ती की कैबिनेट को दो बीजेपी मंत्रियों के बयानों से भीड़ को शह मिली. उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई का क्या?

गौरतलब है कि मासूम बच्ची से रेप और हत्या के मामले में अभी तक 8 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिसमें 2 स्पेशल पुलिस अफसर, एक हेड कांस्टेबल, एक सबइंस्पेकटर, एक कठुआ निवासी और एक नाबालिग शामिल हैं. फोरेंसिक जांच में ये बात साबित हो चुकी है कि हत्या के पहले उसे मंदिर के भीतर एक हफ्ते तक टार्चर किया गया.

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गौरतलब है कि इसी वर्ष 10 जनवरी को रसाना गांव से बच्ची रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गई थी. उसका शव सात दिन बाद साथ लगते जंगल से बरामद हुआ था.

बकरवाल मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखने वाली पीड़िता दस जनवरी को यहां से 90 किलोमीटर दूर कठुआ के रासना गांव के पास के जंगलों में बने अपने घर से गायब हो गई थी. एक सप्ताह बाद उसका शव पास के इलाके से मिला था और मेडिकल जांच में यौन उत्पीड़न का पता चला था. शुरूआती जांच में पुलिस ने एक नाबालिग को पकड़ा था.

सरकार ने 23 जनवरी को यह मामला राज्य पुलिस की अपराध शाखा को सौंपा था, जिसने 8 साल की बच्ची के अपहरण और हत्या में कथित संलिप्तता को लेकर एक विशेष पुलिस अधिकारी (एसपीओ) को गिरफ्तार किया था.

First published: 11 April 2018, 10:12 IST
 
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