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केदारनाथ सिंह: नहीं रहे हिंदी के मशहूर कवि, 83 साल की उम्र में AIIMS में निधन

कैच ब्यूरो | Updated on: 19 March 2018, 22:45 IST
(File Photo)

हिंदी के मशहूर कवि केदारनाथ सिंह का सोमवार को  83 साल की उम्र में दिल्ली के एम्स अस्पताल में निधन हो गया. वो लंबे समय से बीमार चल रहे थे. उनका जन्म यूपी के बलिया जिले में हुआ था. केदारनाथ सिंह की गिनती हिंदी के वरिष्ठ कवियों के तौर पर होती है.

केदारनाथ सिंह ने 1956 में बनारस हिंदू विश्वविद्याल से हिंदी साहित्य में एमए और 1964 में पीएचडी किया था. केदारनाथ सिंह ने लंबे समय तक देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी जेएनयू में लंबे समय तक पढ़ाया. वो जेएनयू  के भारतीय भाषा केंद्र से प्रोफेसर के तौर पर रिटायर हुए. रिटायर होने के बावजूद जेएनयू ने उनकी सेवाओं को देखते हुए उन्हें प्रोफेसर एमिरेटस का पद दिया था.

हिंदी के प्रख्यात कवि केदारनाथ सिंह को साल 2013 का प्रसिद्ध ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला था. वो ये सम्मान पाने वाले वे हिंदी के 10 वें रचनाकार थे. इसके अलावा भी उन्हें कई सम्मान मिले थे. उन्हें मैथिलीशरण गुप्त पुरस्कार, कुमार आशान पुरस्कार (केरल), दिनकर पुरस्कार, जीवनभारती सम्मान (उड़ीसा) और व्यास सम्मान सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मान मिले थे. केदारनाथ सिंह के विख्यात कविता संग्रहों में 'अकाल में सारस', 'अभी बिल्कुल अभी', 'बाघ' और 'जमीन पक रही है. 

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केदारनाथ सिंह ने ताना-बाना (आधुनिक भारतीय कविता से एक चयन), समकालीन रूसी कविताएं, कविता दशक, साखी (अनियतकालिक पत्रिका) और शब्द (अनियतकालिक पत्रिका) का संपादन भी किया. केदारनाथ सिंह के प्रमुख लेख और कहानियों में 'मेरे समय के शब्द', 'कल्पना और छायावाद', 'हिंदी कविता बिंब विधान' और 'कब्रिस्तान में पंचायत' शामिल हैं.

First published: 19 March 2018, 22:47 IST
 
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