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अरविंद केजरीवाल: 'अगर नजीब अंबानी का बेटा होता तो मोदी दौड़ रहे होते'

इप्शिता सरकार गुप्ता | Updated on: 4 November 2016, 7:43 IST
QUICK PILL
  • 15 अक्टूबर को जेएनयू से लापता छात्र मुजीब अहमद के बारे में 20 दिन बाद भी कोई सुराग़ हाथ नहीं लग सका है.
  • नजीब के लिए आवाज़ उठाने के मक़सद के कई दलों के बड़े चेहरों ने जेएनयू पहुंचकर मोदी सरकार पर हमला किया है. 
  • दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि नजीब को वापस लाने का एक ही तरीक़ा है कि हम सभी एकजुट होकर इंडिया गेट पहुंच जाएं. 

बुधवार को रिटायर्ड फौजी राम किशन ग्रेवाल की ख़ुदकुशी पर विपक्ष एकजुट हो गया. तमाम दल और उनके नेताओं ने फौजी की ख़ुदकुशी को मुद्दा बनाकर केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश की. मगर मोदी सरकार पर हमला करने के लिए इस 'उत्तेजित विपक्ष' के पास अब दूसरा मुद्दा हैं जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र नजीब अहमद जो पिछले 20 दिनों से लापता हैं.

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, कांग्रेस के शशि थरूर, जदयू के केसी त्यागी, सीपीएम के प्रकाश करात समेत कई नेता गुरुवार शाम जवाहर लाल यूनिवर्सिटी पहुंचे. 15 अक्टूबर से लापता छात्र नजीब अहमद को ढूंढ पाने में नाकाम पुलिस प्रशासन और सरकार पर ये नेता ख़ूब बरसे. 

एक मां की तड़प

नजीब के लिए देश की जानी-मानी सियासी हस्तियां गुरुवार की शाम प्रशासनिक भवन पर इकट्ठा थीं. जब यहां शशि थरूर अपनी बात रख रहे थे, तभी एक चीख सुनाई दी. यह चीख नजीब की मांग की थी. ख़ुद को संभाल पाने में नाकाम नजीब की मां अचानक दहाड़े मार कर रोने लगीं. रोते हुए वो चिल्ला रही थीं, 'अरे कोई तो मेरे बेटे को वापस ले आओ. कहां है मेरा नजीब.'

भाषण दे रहे थरूर कुछ देर तक सिर झुकाए चुपचाप खड़े रहे. जेएनयू के कई छात्र और टीचर नजीब की मां को रोता देख ख़ुद को नहीं रोक पाए. सभी की आंखों में आंसू थे. कविता कृष्णन ने नजीब की मां को ढांढस बंधाने की कोशिश की लेकिन कुछ काम नहीं आया, वह रोती रहीं. वहां जमा भीड़ ठंडी पड़ गई थी.  

नजीब की मां के आंसू एक किस्म का रिमाइंडर थे उन सभी सियासी हस्तियों के लिए कि इस हाईप्रोफाइल जुटान का मक़सद सिर्फ़ भाजपा को दिखाने के लिए नहीं होना चाहिए. उनका बेटा नजीब अभी भी गायब है और उसे ढूंढने की कोशिश की जानी चाहिए. उनके आंसू मांग कर रहे थे पुलिस को हरकत में लाने के लिए और उन सभी के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने के लिए जिनकी वजह से नजीब लापता हो गया.

दिल्ली पुलिस: कोई लीड नहीं

नजीब को लापता हुए 20 दिन हो गए हैं. उनकी वापसी के लिए जेएनयू से लेकर जंतर-मंतर तक तीखे प्रदर्शन हो चुके हैं. मगर पुलिस अभी भी एक अदद सुराग के लिए भटक रही है. दिल्ली पुलिस का दावा है कि अभी तक उसने 150 लोगों से पूछताछ की है. इनमें जेएनयू स्टूडेंट्स, अधिकारी और बाक़ी स्टाफ़ शामिल हैं. 

पुलिस कहती है, 'हमने उन लोगों से भी पूछताछ की जिन्होंने नजीब के साथ हाथापाई की थी. मगर हमें ऐसा कुछ भी नहीं मिला है जिसकी वजह से हाथापाई करने वालों के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई की जाए.' ज्वाइंट सीपी आरपी उपाध्याय ने कहा, 'हम पूरा कैंपस और आसपास का इलाक़ा खंगाल रहे हैं लेकिन कोई सुराग नहीं मिल सका है. फिलहाल हमारी सारी कोशिश नजीब को ढूंढने में है ना कि यह पता लगाने में कि उनके साथ हाथापाई किसने-किसने की.'

अरविंद केजरीवाल: नजीब की वापसी का बस एक रास्ता है

अरविंद केजरीवाल ने साफ़ शब्दों में पूछा, 'पुलिस ने क्या-क्या किया है? अभी तक की जांच रिपोर्ट कहां है? चूंकि इस केस से अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सदस्य जुड़े हैं, इसलिए पुलिस उन्हें बचा रही है. संदेश साफ़ है. कोई भी अगर भाजपा के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाएगा, उनपर हमला किया जाएगा. देश में भाजपा, आरएसएस और एबीवीपी की गुंडागर्दी चरम पर है. मगर सबसे ज़रूरी बात यह है कि अगर इस केस में एबीवीपी शामिल है तो दिल्ली पुलिस एक निष्पक्ष जांच नहीं कर सकती है.'

दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस के बीच टकराव शुरू से ही रहा हैं. उन्होंने अपनी हिरासत का ज़िक्र किया कि वह राम किशन ग्रेवाल के परिवार से मिलकर सांत्वना देना चाहते थे लेकिन दिल्ली पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया. केजरीवाल ने कहा, 'अगर मैं मुख्यमंत्री होने पर हिरासत में लिया जा सकता हूं तो कल्पना कीजिए नजीब का दर्द? वो तो महज़ एक स्टूडेंट था. अगर नजीब की जगह मुकेश अंबानी का बेटा गायब हो गया होता तो प्रधानमंत्री पहली फ्लाइट पकड़कर उनकी मदद करने पहुंच गए होते.'

केजरीवाल ने देशभर में बढ़ रही 'गुंडागर्दी' के लिए भाजपा को ज़िम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा, 'ये पार्टी ना तो हिंदुओं की है ना ही मुसलमानों की. ये तो अपने बाप की भी नहीं है.' जब मैं गुजरात गया तो पाटीदारों से मिला. बीजेपी के गुंडों ने 10 पाटीदारों को करीब से गोली मारी. इन्होंने पाटीदारों की हत्याएं की हैं, इन्होंने दलितों की हत्याएं की हैं. क्या वे हिंदू नहीं थे? एक रिटायर्ड फौजी की ख़ुदकुशी पर उनके घरवालों को ढांढस बंधाने की बजाय पुलिस से पिटवाया गया.

दिल्ली के सीएम ने कहा, 'नजीब को सिर्फ़ एक तरह से वापस लाया जा सकता है. वह है, 'लोक शक्ति'. आइए, हम सब एकजुट हो जाएं और इस आंदोलन को जेएनयू से बाहर लेकर चलें. हम सभी इंडिया गेट पर जमा हों. वहां देश के हर विश्वविद्यालय का कम से कम एक नुमाइंदा होना चाहिए.'

शशि थरूर: एक लापता इंसान के आगे बाक़ी मुद्दे बौने

पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता शशि थरूर ने कहा, 'आपका गुस्सा हमारा गुस्सा है. आपका मुद्दा हमारा मुद्दा है. हम सभी की यह मुलाक़ात नजीब अहमद को इंसाफ़ दिलाने के लिए है.'

थरूर ने कहा, 'उस रात कुछ ना कुछ हुआ था. इसकी ढंग से तफ़्तीश की ज़रूरत है. ज़रूरत है विश्वविद्यालय प्रशासन के दायरे से बाहर निकलने की. इसकी हादसे की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए. पुलिस को कुछ सवालों के जवाब देना चाहिए. हमने उस घटना के बारे में काफी कुछ सुना है जो वार्डन के सामने घटी. उप कुलपति और पुलिस, दोनों को बताना चाहिए कि जब एक छात्र अचानक लापता हो गया तो फ़ौरन सर्च ऑपरेशन क्यों नहीं चलाया गया. और क्यों नहीं वह घटना हो जाने के लंबे समय बाद तक कोई खोजबीन की गई.'

उन्होंने कहा, 'जब एक इंसान लापता हो जाता है तो बाकी सारे मुद्दे और सवाल दोयम हो जाते हैं. मगर जो हुक़ूमत है, जो इस हालात में हैं कि कुछ कर सकते हैं, उनके लिए दूसरे सभी मुद्दे एक लापता इंसान से पहले आते हैं. हम सभी यहां इसलिए इकट्ठा हैं कि कुछ गलत हुआ है और उस गलती के ख़िलाफ़ जो होना चाहिए था, वह नहीं हुआ है.'

उन्होंने कहा, 'हमारे विश्वविद्यालयों में कुछ सालों से हो क्या रहा है? हम देख चुके हैं कि चेन्नई में आंबेडकर-पेरियार स्टडी सर्किल के साथ क्या हुआ, हैदराबाद में रोहित वेमुला के साथ क्या हुआ और जेएनयू जहां आपके दोस्तों और साथियों को गिरफ़्तार किया गया.'

प्रकाश करात: आपातकाल से बुरे हालात

सीपीएम नेता प्रकाश करात ने कहा कि देश के मौजूदा हालात अघोषित आपातकाल जैसे हैं. उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक मीडिया समारोह में लोगों को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि नागरिकों को सजग रहना चाहिए ताकि कोई भी राजनीतिक दोबारा हमारे देश में आपातकाल लागू करने के बारे में सोच भी नहीं पाए.'

एक बार फिर उनकी ये बातें सुनकर हैरानी हुई क्योंकि जिस वक्त वो यह बयान दे रहे थे, दिल्ली के चुने हुए सीएम को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया. सिर्फ इसलिए कि केजरीवाल ने सेना से रिटायर्ड एक फौजी राम किशन की ख़ुदकुशी के बाद सांत्वना देने के मक़सद से उनके परिवार से मिलने की कोशिश की थी. देश में यह स्थिति अघोषित आपातकाल जैसी है. 

उन्होंने कहा, 'इस विश्वविद्यालय ने आपातकाल के दौरान हथियार नहीं डाले थे. पुलिस दस्ते ने कैंपस में छापेमारी की थी, छात्रों को गिरफ़्तार किया था. मगर अब देश में आपातकाल से भी कुछ बुरा घट रहा है. एक कोशिश हो रही है इस विश्वविद्यालय के चरित्र पर हमला करके इसे बरबाद कर देने की. हमें इस घातक हमले पर पलटवार करना ही होगा.'

उन्होंने कहा, 'दिल्ली पुलिस केंद्र सरकार के अधीन है लेकिन अब वह आरएसएस और उनके संगी-साथियों के इशारे पर काम करती है. जेएनयू में एक सर्जिकल स्ट्राइक फरवरी में हो चुकी है जब जेएनयूएसयू प्रेसिडेंट और बाक़ी छात्र देशद्रोह के आरोप में गिरफ़्तार किए गए. एक और सर्जिकल स्ट्राइक दो दिन पहले भोपाल में हुई है जब भोपाल जेल के आठ क़ैदी मार दिए गए.'

First published: 4 November 2016, 7:43 IST
 
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