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केरल में बीजेपी की जीत में कांग्रेस का हाथ है?

सनी सेबेस्टियन | Updated on: 25 May 2016, 13:36 IST
(कैच)

भारतीय जनता पार्टी और उससे पहले भारतीय जनसंघ केरल में पिछले कई दशकों से चुनाव हारते चले आ रहे थे. चुनाव हारने के बाद उनके नेता आरोप लगाते थे कि हिंदुत्ववादी पार्टी को सत्ता से बाहर रखने के लिए कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियां आपस में मिल हुई हैं. 

इस साल हुए विधान सभा चुनाव में बीजेपी ने पहली बार राज्य में एक विधान सभा सीट पर जीत हासिल की है. पार्टी के वरिष्ठ नेता ओ राजागोपाल को राज्य के नेमोम सीट से जीत मिली है. सात सीटों पर  बीजेपी दूसरे स्थान पर रही है.

बीजेपी कश्मीर से कन्याकुमारी तक इस जीत का जश्न मनाती नजर आ रही है तो केरल में कांग्रेस और सीपीआई(एम) एक-दूसरे पर बीजेपी को जीत दिलाने का आरोप लगा रही हैं.

नेमोम विधान सभा तिरुअनंतपुरम संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आती है. यहां से कांग्रेसी नेता शशि थरूर सांसद हैं. इसलिए बीजेपी के लिए इस जीत का सांकेतिक महत्व है. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने पांच विधान सभा चुनावों के नतीजे आने के बाद प्रेस वार्ता में इस सीट का खास जिक्र किया.

नेमोम सीट जीतने के बाद राजागोपाल ने कैच से कहा, "ये तो बस शुरुआत है. अगले चुनाव में बीजेपी राज्य में एक बड़ी पार्टी होगी." 

दोषी कौन

वामपंथी दल नेमोम में बीजेपी की जीत के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. सीपीआई के राष्ट्रीय सचिव अतुल कुमार अंजान कहते हैं, "कांग्रेस ने बड़ी अनदेखी करते हुए नेमोम को हाथ से जाने दिया. ये केवल राजागोपाल की जीत नहीं है. हो सकता है कि अगले लोकसभा चुनाव में शशि थरूर को हिंदुत्ववादियों के भी वोट मिल जाएं."

वामपंथी गठबंधन एलडीएफ के दूसरे नेताओं ने भी कांग्रेस पर बीजेपी के संग मिलभगत का आरोप लगाया है. यहां तक कि भावी मुख्यमंत्री पी विजयन ने भी आरोप लगाया है कि स्थानीय कांग्रेसी नेताओं ने पैसे लेकर बीजेपी को वोट दिलवाया है.

वामपंथियों पार्टियों का आरोप है कि केरल में कांग्रेस के एक धड़े ने बीजेपी की मदद की

कांग्रेसनीत गठबंधन यूडीए के प्रत्याशी ने भी अपनी हार को 'संदिग्ध' बताया है. जेडीयू के प्रत्याशी सुरेंद्रन पिल्लई ने दावा किया कि उन्हें मिले 13800 वोट उनके निजी वोट हैं. उन्होंने कहा, " इस सीट पर यूडीएफ के इससे कहीं ज्यादा वोटर हैं." पिल्लई चुनाव में तीसरे स्थान पर रहे थे.

चुनाव प्रचार के दौरान सीपीएम और कांग्रेस के नेता बीजेपी का मजाक उड़ाते रहे थे. सीपीएम के वरिष्ठतम नेता वीएस अच्युतानंदन ने कहा था कि 'केरल में कमल केवल तालाब में खिलेगा.' 

कांग्रेसी नेता और राज्य के पूर्व सीएम एके एंटोनी ने कहा था, "बीजेपी के नेताओं को विधान सभा में जाने के लिए विजिटर पास लेना होगा."

इन नेताओं के इस कदर आश्वस्त होने के बावजूद बीजेपी आखिर किस तरह जीत हासिल करने में कामयाब रही? 

अंदरूनी कलह

कुछ राजनीतिक जानकार इसके लिए कांग्रेस के अंतरूनी कलह को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. 

आलोचकों का कहना है कि कांग्रेसी नेता ओमन चांडी और रमेश चेन्नीथला के बीच गुटबाजी की वजह से न केवल नेमोम बल्कि कई अन्य विधान सभा सीटों पर कांग्रेस का वोट घटा. 

कुछ लोग यहां तक आरोप लगा रहे हैं कि कांग्रेस के एक धड़े ने बीजेपी से अंदरखाने हाथ मिला लिया था. इस आरोप के सुबूत के तौर पर लोग बीजेपी की कुछ सीटों को छोड़कर खराब प्रदर्शन का हवाला दे रहे हैं. 

कुछ राजनीतिक जानकारों का कहना है कि बीजेपी और कांग्रेस नेता चेन्नीथला के बीच अंदरूनी सांठगांठ थी

राज्य की हरिपाद विधान सभा से बीजेपी ने अपने राज्य सचिव वीवी राजेश का टिकट काटकर उन्हें नेदुमांगड़ से टिकट दिया. जबकि हरिपाद में राजेश के जीतने की ज्यादा संभावना थी. हरिपाद से कांग्रेस के प्रत्याशी रमेश चेन्नीथला थे.

राज्य की कोन्नी सीट पर भी बीजेपी को उसके औसत वोट शेयर से कम वोट मिले हैं. जिसका लाभ इस सीट से कांग्रेस के चेन्नीथला गुट के प्रत्याशी को मिला.

कहा जा रहा है कि कांग्रेस का ये धड़ा अब विधान सभा में नेता प्रतिपक्ष के पद पर दावा कर रहा है क्योंकि चांडी गुट को विधान सभा में कम सीटें मिली हैं. 

चुनाव के नतीजे आने के बाद राज्य में हुई हिंसक झड़पों को राजनीतिक विश्लेषक 'नेमोम में मिली जीत की प्रतिक्रिया' बता रहे हैं.

बीजेपी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर कहा है कि वामपंथी चुनाव हारने के बाद उसके कार्यकर्ताओं को डराने की कोशिश कर रहे हैं. वहीं वामपंथियों का दावा है कि एलडीएफ के सत्ता में वापसी के कारण हिदुत्ववादी ताकतें 'हिंसा करके अपनी खीझ उतार रही हैं.'

First published: 25 May 2016, 13:36 IST
 
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