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केरल की त्रासदी इतनी भयावह न होती अगर इस रिपोर्ट पर दिया होता ध्यान

कैच ब्यूरो | Updated on: 20 August 2018, 10:56 IST

केरल को दशकों बाद इतनी खतरनाक बाढ़ का सामना करना पड़ रहा है. पश्चिमी घाटों के संरक्षण पर एक ऐतिहासिक रिपोर्ट का कहना है कि अगर राज्य सरकार और स्थानीय अधिकारियों ने पर्यावरण कानूनों का पालन किया होता तो आपदा का स्तर छोटा हो सकता था. 2010 में पर्यावरण और वन मंत्रालय द्वारा गठित पश्चिमी घाट पारिस्थितिकी विशेषज्ञ पैनल की अध्यक्षता में वैज्ञानिक माधव गाडगील ने कहा कि केरल में समस्या का एक हिस्सा मानव निर्मित था.

डॉ. गाडगील ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि "भारी वर्षा के कारण यह हुआ लेकिन राज्य में पिछले कई सालों के विकास ने इस तरह की घटनाओं से निपटने की अपनी क्षमता से समझौता किया है और आज हम जो पीड़ा देख रहे हैं ,यह उसी का परिणाम है. 2011 में प्रस्तुत अपनी विस्तृत रिपोर्ट में गाडगील पैनल ने पारिस्थितिक रूप से नाजुक पश्चिमी घाट क्षेत्र के प्राकृतिक पर्यावरण के संरक्षण के उपायों का सुझाव दिया था.

रिपोर्ट में सिफारिश की गई थी कि केरल समेत छह राज्यों में फैले पूरे पश्चिमी घाटों को पारिस्थितिकीय रूप से संवेदनशील घोषित किया जाएगा और घाटों के क्षेत्रों में पारिस्थितिक संवेदनशीलता के तीन स्तरों को आवंटित किया था.

 

समिति ने क्षेत्र में कुछ नई औद्योगिक और खनन गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने की भी सिफारिश की थी. गडजील समिति की रिपोर्ट की जांच करने के लिए अंतरिक्ष वैज्ञानिक के कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में एक और पैनल नियुक्त किया था. 2013 में अपनी रिपोर्ट जमा करने वाले कस्तूरीरंगन समिति ने गडगिल पैनल की सिफारिशों को गंभीर रूप से कम किया. प्रभावी ढंग से सुझाव दिया कि पश्चिमी घाटों में से केवल एक तिहाई को पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील माना जा सकता है.

राज्य सरकारों के साथ लम्बे परामर्श के बाद पर्यावरण मंत्रालय ने पिछले साल पश्चिमी घाटों के लगभग 57,000 वर्ग किलोमीटर को पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र घोषित किया था. जिसमें सभी खनन गतिविधियों, बड़े निर्माण, थर्मल पावर प्लांट और अत्यधिक प्रदूषणकारी उद्योगों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था.

अधिसूचित क्षेत्र में केवल 9,993.7 वर्ग किमी केरल में था.  गडगिल का मानना है कि वास्तव अगर सरकारों ने कानून का पालन किया होता, यदि कोई अच्छा शासन होता तो इस अनुपात की आपदा से बचा जा सकता था. विशेष रूप से गडगिल ने बड़े पैमाने पर निर्माण के साथ-साथ केरल में बढ़ती पत्थर की खनन गतिविधि की ओर इशारा किया.
पूरे राज्य में अवैध पत्थर की खनन होता है. 2013 में रिपोर्ट आने के बाद केरल में पत्थर की खदान के खिलाफ कई प्रदर्शन भी हुए थे.

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First published: 20 August 2018, 10:53 IST
 
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