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केरलः जाति और धर्म का हर समीकरण लेफ्ट के पक्ष में गया

बिन्नू के जॉन | Updated on: 10 February 2017, 1:49 IST

केरल में वामपंथी गठबंधन ने कांग्रेस गठबंधन को सत्ता से बाहर कर दिया है. गुरुवार को आए चुनाव परिणाम के अनुसार लेफ्ट गठबंधन (एलडीएफ) को राज्य की कुल 140 में से 91 सीटों पर जीत मिली है.

कांग्रेस गठबंधन (यूडीएफ) को 47 सीटों पर विजय मिली है. बीजेपी ने पहली बार केरल में कोई सीट जीती है. राज्य में एक सीट अन्य को मिली है.

इस नतीजे को नायर-एझावा समुदाय का "ईसाई-मुस्लिम" समर्थित सरकार के खिलाफ व्यक्त किए गए आक्रोश के तौर पर देखा जा रहा है. यूडीएफ सरकार द्वारा राज्य में शराब पर प्रतिबंध लगाने से एझावा समुदाय के निम्न वर्ग और मध्यम वर्ग को आर्थिक झटका लगा. शराब बाजार में इस समुदाय का बड़ी भागीदारी रही है.

यूडीएफ सरकार द्वारा केरल में शराब पर प्रतिबंध लगाने से एझावा समुदाय का एक तबका नाराज था

बीजेपी को एक सीट पर जीत मिलना और सात सीटों पर दूसरे स्थान पर रहना भी इसी रुझान की ओर इशारा करता है. माना जा रहा है कि एलडीएफ की भावी सरकार 'हिन्दुवादी' भावनाओं की तरफ झुकी रहेगी.

ताजा नतीजों के पीछे एक सोच यह है कि चुनाव में ज्यादातर हिन्दू वोट यूडीएफ के खिलाफ गए हैं. इसी जनभावना का फायदा बीजेपी गठबंधन को भी मिला. बीजेपी ने एझावा समुदाय के प्रमुख संगठन बीडीजेएस के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था.

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सीपीएम की मदद राष्ट्रीय स्तर पर पिछले कुछ समय में घटी घटनाओं ने भी दिया. अच्छी खासी संख्या में मुसलमान वोटरों ने उन इलाकों में सीपीएम को वोट दिया, जहां उसका आरएसएस-बीजेपी से सीधा मुकाबला था.

आरएसएस और सीपीएम के बीच टकराव वाले उत्तरी केरल के कन्नूर जिले में सीपीएम को भारी जीत मिली है. यूडीएफ को अपने परंपरागत एझावा वोटरों से भी हाथ धोना पड़ा.

इलाके के मुसलमानों को लग रहा था कि वो आरएसएस के अगले शिकार बन सकते हैं और शायद वो सही भी थे. इस चक्कर में उनका एलडीएफ के पक्ष में जबरदस्त ध्रुवीकरण हुआ.

कुल मिलाकर जाति और धर्म से जुड़ा हर समीकरण राज्य में एलडीएफ के पक्ष में गया. वाम दलों ने भी चुनाव प्रचार के दौरान हर समुदाय को संतुष्ट करने की कोशिश की थी.

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यूडीएफ सरकार ने अपने पांच साल के कार्यकाल में विकास से जुड़े कई काम किए फिर भी उसके खिलाफ जैसी लहर चली उससे कई राजनीतिक विश्लेषक हैरान भी हुए.

यूडीएफ सरकार में मुस्लिम लीग के छह मंत्री थे और छह मंत्री ईसाई थे. यूडीएफ मंत्रिमंडल में राज्य के दो जिलों कोट्टायम और मलापुरम का दबदबा था. माना जा रहा है कि ये चीजें यूडीएफ के खिलाफ गईं.

दक्षिणी केरल के कोल्लम और उत्तरी केरल के कन्नूर में यूडीएफ की लगभग सफाया हो गया है. हालांकि यूडीएफ की रैलियों से ऐसा नहीं लग रहा था कि वो यहां इतनी बड़ी जीत हासिल करने वाली है.

दक्षिणी केरल के कोल्लम और उत्तरी केरल के कन्नूर में कांग्रेस गठबंधन का लगभग सफाया हो गया है

त्रिवेंद्रम में एक एझावा पूर्व बार मालिक ने कैच को बताया था कि शराबबंदी के बाद 700 बार बंद करने पड़े थे. इनमें से हरेक में लगभग 100 लोग काम करते थे. पहले से उद्योग और कृषि संकट से जूझ रहे केरलवासी इस शराबबंदी को लेकर बेहद गुस्से में थे.

इस संबंध में अपनी स्थिति साफ करते हुए सीपीएम नेता प्रकाश करात ने चुनाव प्रचार के दौरान कहा था कि केरल में शराबबंदी नहीं चल सकती.

केरल में मिली जीत से सीपीएम और पार्टी महासचिव सीताराम येचुरी को इज्जत बचाने के लिए एक ओट मिल गई है. केरल की जीत शायद पश्चिम बंगाल में मिली हार का गम कम कर सके.

माना जा रहा है कि पी विजयन को राज्य का सीएम बनाया जाएगा. वहीं थॉमस इसाक को दोबारा वित्त मंत्री बनाया जाएगा. लेकिन जिस तरह 92 वर्षीय वीएस अच्युतानंदन ने चुनाव प्रचार की अगुवाई की थी उसे देखते हुए सीपीएम को मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है.

First published: 19 May 2016, 9:51 IST
 
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