Home » इंडिया » Kerala poll: In Aluva, LDF confident of a sweep
 

केरल चुनाव: अलुवा में एलडीएफ को जीत का पूरा भरोसा

बिनो के जॉन | Updated on: 7 May 2016, 19:09 IST

अलुवा निर्वाचन क्षेत्र मुख्यतः कोच्चि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से सटा हुआ इलाका है. पेशे से वकील सीपीआई (एम) के उम्मीवार मोहम्मद सलीम रेलवे काॅलोनी के नाम से मशहूर क्षेत्र के निवासियों से उनके घरों पर अलसुबह की मुलाकातों और बैठकों में व्यस्त हैं. इस क्षेत्र के बिल्कुल सामने से होकर एक रेलवे लाइन गुजरती है और नजदीकी एर्नाकुलम को आने और जाने वाली ट्रेनों की कभी-कभार बजने वाली सीटी अधिकतर शांत दिखने वाली इस जगह की खामोशी को भंग करती है.

सलीम हर घर में एक दोस्त की तरह दाखिल होते हैं और जो कोई भी मौजूद हो उससे बात करने लगते हैं. महिलाएं रसोईघर के दायरे से बाहर निकलकर आती हैं और सलीम बेहद आत्मविश्वास के साथ उनसे रूबरू होते हैं. उनका मानना है कि यह सारा क्षेत्र सीपीआई (एम) का है. चुनावों में उनका मुकाबला मौजूदा कांग्रेसी विधायक अनवर सदाथ से है जिनके बारे में लोगों का कहना है कि उन्होंने क्षेत्र मेें विकास के कई अच्छे काम किये हैं.

अलुवा और आसपास के इलाकों में सदाथ द्वारा उनकी विधायक निधि से स्वीकृत और प्रारंभ करवाई गई तमाम परियोजनाओं के कई शिलापट आसानी से देखे जा सकते हैं.

बीजेपी तिरुवनंतपुरम जिले में 2 सीटों पर विजयी होने की उम्मीद कर रही है

लेकिन सलीम, सदाथ के दावों से इत्तेफाक नहीं रखते और इस संवाददाता से कहते हैं, ‘‘यहां पर बहुत से काम बाकी है. यहां के लोगों को परिवर्तन की दरकार है और इस बार एलडीएफ की सरकार बनने जा रही है.’’

अपने घर से बाहर निकलकर अहाते में आई एक महिला के मुखातिब होते हुए सलीम कहते हैं, ‘‘नमस्कार मुझे अपना परिचय देने की आवश्यकता नहीं है. आप सब लोग मुझे जानते हें.’’ और वे भी मुस्कुराते हुए उनका स्वागत करते हैं. सलीम अपना तौलिया हिलाकर उनके अभिवादन का जवाब देते हैं. केरल के अधिकतर निम्न-वर्गीय घरों की पहचान उनके अपने संबंधित भगवानों की तस्वीरें से होती है लेकिन सलीम अपने दोस्ताना रवैये से इन सब चीजों से पार पा लेते हैं. जो लोग पानी की कमी और बिजली कटौती के मुद्दे उठाते हैं वे उन्हें सांत्वना और वायदे से खुश करते हैं.

पढ़ें: पीएम मोदी का लेफ्ट पर हमला, हिंसा की राजनीति का लगाया आरोप

बाकी के मध्य केरल की तरह अलुवा भी धार्मिक और सामाजिक मुद्दों के मिले-जुले परिवेश से परिपूर्ण है. अलुवा में 20 प्रतिशत से भी अधिक मुसलमान आबादी है जो दो मुसलमान प्रत्याशियों को साफ दर्शाती है.

यहां पर ईसाई वास्तव में बेहद प्रभावशाली हैं और इस क्षेत्र के कुछ सबसे शानदार गिरजाघरों की मौजूदगी प्राचीन ईसाई धर्म के साथ केरल के रिश्तों का जीता-जागता सबूत हैं.

नजदीकी निर्वाचन क्षेत्र अंगामाली में मुकाबला दो ईसाई प्रत्याशियों के बीच है, कांग्रेस के रोजी जाॅन सीपीआई (एम) के बेनी मूनजेली के खिलाफ मैदान में हैं. रविवार एक मई की शाम को एक बेहद संकरी गली में लोगों की एक छोटी सी भीड़ हाल ही में दोबारा बनाए फेरोना गिरजाघर के बाहर खड़ी है.

बीजेपी एक ऐसे राज्य में 133 सीटों पर चुनाव लड़ रही है जहां वह आजतक एक भी सीट नहीं जीती है

यह चर्च इस संकरी गली के बिल्कुल बीचोंबीच निर्मित है जिसमें 100 वर्ष से भी पुराना प्राचीन क्राॅस स्थापित है.

बेहद खूबसूरत मंदिर भी इस क्षेत्र की सुंदरता को बढ़ाता है और दुनिया के इस छोटे से हिस्से में इन तीनों प्रमुख धर्मों के उत्थान का प्रतीक हैं. अब ये राजनीतिक वर्चस्व के लिये एक दूसरे के सामने हैं और प्रत्येक समुदाय इस पक्ष में या विपक्ष में मतदान कर दूसरों को हराने के प्रयास में है.

बीजेपी की मौजूदगी

अबतक द्विपक्षीय रहने वाले केरल के चुनावी परिदृश्य को इस बार बीजेपी की मौजूदगी से खतरा है जो राज्य में अपनी पैठ बनाने का प्रयास कर रही है. बीजेपी अध्यक्ष अब करीब बीते दो सप्ताह से केरल में ही चुनाव प्रचार की कमान संभाले हुए हैं जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि बीजेपी यहां पर अपनी मौजूदगी दर्ज करवाने को लेकर बेहद गंभीर है.

जीशा रेपकांड: अंधेरे में हाथ मारती पुलिस और पुलिस से नाराज लोग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी यहां कई रैलियों को संबोधित करने वाले हैं. बीजेपी का इरादा अबतक सीपीआई (एम) की पारंपरिक समर्थक मानी जाने वाली सबसे प्रभावशाली पिछड़ी जाति एज्हावा को अपने पक्ष में करने का है.

इसके साथ उच्च जाति नायर को अपने साथ मिलाकर बीजेपी को उम्मीद है कि वह उन निर्वाचन क्षेत्रों में दूसरी पार्टियों का खेल बिगाड़ सकती है जहां जीत का अंतर 5 हजार वोटों से भी कम है. बीजेपी एक ऐसे राज्य में 133 सीटों पर चुनाव लड़ रही है जहां वह आजतक एक भी सीट नहीं जीती है.

हमारा मुकाबला कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ से है और इस बार सबकुछ एलडीएफ के पक्ष में है: सीपीएम

बीजेपी के अंदरूनी सूत्रों ने इस संवाददाता को बताया कि वे तिरुवनंतपुरम जिले में 2 सीटों पर विजयी होने की उम्मीद कर रहे हैं. दूसरी तरफ सीपीआई (एम) के सलीम का कहना है कि सबसे अच्छी स्थिति होने पर भी बीजेपी यहां दूसरे स्थान तक ही आ पाएगी.

बीजेपी के साथ गठबंधन करने वाले एज्हावाओं के नवगठित राजनीतिक दल बीडीजेएस के नेता वेल्लापल्ली नातसन ने केरल कौमुदी में एक लेख लिखकर बताया कि केरल के साथ सबसे बड़ी त्रासदी यह है कि वे हर बार दो मोर्चों में से एक को वापस चुनते हैं. वे लिखते हैं, ‘‘इस बार बीजेपी नीत गठबंधन के रूप में हम खुद को एक नई आशा के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं.’’

अलुवा में एक वेल्डर और सीपीआई (एम) के कार्यकर्ता थाॅमस कहते हैं कि इस बार दोबारा सत्ता में वापस आने वाली मार्क्सवादी पार्टी और एलडीएफ को लेकर मीडिया हमेशा से ही पक्षपाती रवैया रखता आया है.

पढ़ें: कोल्लम में मंदिर और केरल में चुनाव न होता तो भी क्या मोदी वहां जाते?

वे कहते हैं, ‘‘पिछली बार हम सिर्फ दो सीटों के मामूली अंतर से हार गए थे. इस बार ऐसा नहीं होगा. हम इस बार यूडीएफ विरोधी माहौल को देखते हुए 100 से अधिक सीटों की उम्मीद कर रहे हैं. जनता बदलाव चाहती है.’’

सीपीआई (एम) की स्थायी समिति के सदस्य और रेलवे काॅलोनी मे सलीम के चुनावी अभियान की कमान संभालने वाले सुनील इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि इस बार जनता का मूड सीपीआई (एम) के पक्ष में है. बीजेपी की चुनौती को तो वे एक झटके में खारिज कर देते हैं. वे कहते हैं, ‘‘एलडीएफ का मुकाबला कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ से है और इस बार सबकुछ एलडीएफ के पक्ष में है.’’

First published: 7 May 2016, 19:09 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी