Home » इंडिया » Key Points from Supreme Court order on drought
 

सूखाग्रस्त क्षेत्रों के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के फैसले की प्रमुख बातें

निहार गोखले | Updated on: 13 May 2016, 18:21 IST

क्या यही संघवाद (फेडरलिज्म) है? सुप्रीम कोर्ट ने सूखा राहत के संबंध में अपने फैसले में यही प्रश्न गुजरात, उत्तर प्रदेश और केंद्र से पूछा. स्वराज अभियान द्वारा 10 राज्यों में सूखा से प्रभावित 33 करोड़ लोगों के बारे में अदालत में यह याचिका दायर की गई थी.

11 मई को आए अदालत के फैसले का पहला हिस्सा आपदा राहत प्रावधानों के बारे में था. इस फैसले का दूसरा और तीसरा हिस्सा शुक्रवार को सुनाया गया जिनमें खाद्य सुरक्षा और रोजगार गारंटी से निपटने की बात शामिल थी.

सूखा: मराठवाड़ा से बुंदेलखंड तक एक ही कहानी

तमाम राज्यों में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के लागू न होने पर चिंता जताते हुए अदालत ने कहा कि यह "काफी चौंकाने वाला है" कि जब संसद ने कानून पास कर दिया है तब भी गुजरात और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों ने इसे लागू नहीं किया. इस फैसले की प्रमुख बातेंः

खाद्य सुरक्षा

  • सभी राज्यों और विशेषरूप से सूखाग्रस्त क्षेत्रों में जल्द से जल्द प्रति माह, प्रति व्यक्ति पांच किलो अनाज अवश्य उपलब्ध करावाया जाए.
  • सस्ते अनाज को पाने के लिए राशन कार्ड होना अनिवार्य नहीं है. राज्य सरकारों को अन्य पहचान पत्र भी स्वीकार करने चाहिए.
  • बिहार, हरियाणा और उत्तर प्रदेश को हर सप्ताह प्राथमिकता के साथ पांच और कम से कम तीन दिन मिड डे मील उपलब्ध करानी चाहिए. जिनमें अंडा या दूध या इसके समकक्ष कुछ दिया जाए. इनमें आर्थिक तंगी का बहाना नहीं चलेगा. 
  • गर्मियों की छुट्टियों में भी एक सप्ताह के भीतर सभी राज्यों में मिड डे मील दिया जाना चाहिए.
  • राज्य एक माह के भीतर अनाज की आपूर्ति न होने संबंधी शिकायतों से निपटने के लिए जिला शिकायत समाधान अधिकारी की नियुक्ति करें.
  • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून की निगरानी और समीक्षा के लिए हर राज्य दो माह के भीत राज्य खाद्य आयोग का गठन करें.

मनरेगा

  • केंद्र सरकार समय रहतेे फंड जारी करे ताकि कामगारों को उचित समय में भुगतान किया जा सके.
  • मजदूरी भुगतान में विलंब एक "संवैधानिक उल्लंघन" है. 15 दिन से ज्यादा देरी होने पर मुआवजा भी देना होगा.
  • केंद्र और राज्य दोनों सरकारों को इस योजना का लाभ उठाने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करना होगा, 50 फीसदी से कम सफलता दर होने पर "गर्व करने जैसा कुछ" भी नहीं है.
  • केंद्रीय रोजगार गारंटी परिषद जिसकी कानून के अंतर्गत स्थापना होनी थी लेकिन नहीं हुई, को 60 दिनों के भीतर स्थापित किया जाए. केंद्र राज्यों से कहे कि वे 45 दिन के भीतर राज्य समकक्ष परिषद का गठन करें.
  • अदालत इन निर्देशों के क्रियान्वयन पर निगरानी रखेगी और इस मामले पर सुनवाई 1 अगस्त को करेगी. 
  • स्वराज अभियान ने इस आदेश को "ऐतिहासिक" बताया है.
  • स्वराज अभियान की फसल नुकसान मुआवजा, फसल ऋण के पुनर्गठन, मवेशी चारा और पानी जैसी अन्य याचिकाओं पर फैसले आना बाकी हैं.

First published: 13 May 2016, 18:21 IST
 
निहार गोखले @nihargokhale

Nihar is a reporter with Catch, writing about the environment, water, and other public policy matters. He wrote about stock markets for a business daily before pursuing an interdisciplinary Master's degree in environmental and ecological economics. He likes listening to classical, folk and jazz music and dreams of learning to play the saxophone.

पिछली कहानी
अगली कहानी