Home » इंडिया » Khushwant singh death anniversary: A man who was famous for his affairs and stories
 

खुशवंत सिंह मरते दम तक ओढ़े रहे आशिक मिजाज़ी का लिबास, लेकिन ये नहीं है आखिरी सच

आकांक्षा अवस्थी | Updated on: 20 March 2018, 12:33 IST

अगर आप उर्दू सीखना चाहते हैं तो इश्क़ कर लीजिए,
और अगर इश्क़ करना चाहते हैं तो उर्दू सीख लीजिए!!

बेख़ौफ़ बेलौस बेबाक और बेसाख्ता इश्क़ के किस्सों से घिरे खुशवंत सिंह का नाम जितना ही साहित्य की दुनिया में मशहूर है उससे कही ज्यादा चर्चे हैं उनके फ़सानों के हैं. शराब में चूर किसी शायर की छवि को मौत के बाद अब तक ओढ़े हुए हैं.

खुशवंत सिंह के नाम से चाहे जितने किस्से क्यों न जुड़े हों सबसे दिलचस्प हैं उनकी जिंदादिली के किस्से. मौत के पहले ही अपनी श्रद्धांजलि लिख दी और उस श्रद्धांजलि को मुंह चिढ़ाते हुए आगे के कई साल मुस्कुराते हुए गुजार दिए.

खुशवंत सिंह ने अपनी मौत को लेकर 'विद मैलिस टुवार्डस वन एंड ऑल' में लिखा था कि, 'मैं 70 साल से लगातार लिखता रहा हूं. सच यह है कि मैं मरना चाहता हूं. मैंने काफी जी लिया और अब जिंदगी से तंग आ गया हूं. मुझे आगे कुछ नहीं देखना है और जिंदगी में ऐसा कुछ नहीं है जो करने की मेरी इच्छा हो, जो करना था कर चुका. अब जब कुछ करने को बचा नहीं तो जिंदगी आगे खींचने का क्या मतलब.'

उन्होंने कहा कि उनके लिए राहत की बात सिर्फ यह है कि अतीत की अपनी प्रेमिकाओं की यादें आज भी ताजा हैं और उनके बारे में वह सोच सकते हैं. वह कहते हैं कि एक सदी पूरा करने में अभी दो साल कम है, अपने स्वास्थ्य की कमजोर स्थिति और व्हीलचेयर से बंधे रहने के बावजूद यह मजाकिया 'सरदार' हमेशा की तरह आज भी प्रफुल्लित है.शायद इसी बेबाकी ने उनके आशिक मिजाज बूढ़े का ख़िताब बिन मांगे ही दे दिया गया.

खुशवंत सिंह को 1974 में उन्हें पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. लेकिन जब केंद्र सरकार ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर पर ब्लू स्टॉर ऑपरेशन को अंजाम दिया, तो उन्होंने पुरस्कार वापस लौटा दिया. उसके बाद वर्ष 2007 में पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया गया.

 आशिक मिजाज बूढ़े की छवि

दिक्कत यह है कि मेरे पिता की, लोगों में खास किस्म की छवि बन गई है, जिसे वे तोड़ना ही नहीं चाहते. यह छवि ऐसे रंगीन-आशिक मिजाज बूढ़े की, जिसे सेक्स के अलावा कुछ सूझता ही नहीं, जो औरतों का दीवाना है और चौंका देने वाले बयानों और अश्लील चुटकुलों से सुर्खियों में बने रहना चाहता है.

उनका बेटा होने के नाते मैं सच्चाई जानता हूं कि उन्हें सेक्स के मामले में हमारे समाज में व्याप्त ढोंग और दोहरे मानदंडों को बेनकाब करने में मजा आता है, लेकिन जहां तक औरतों की चाहत और आशिकमिजाजी का सवाल है, उन्हें खुद अपनी ऐसी छवि बनाने में मजा आता है. वे हमेशा जवान-खूबसूरत औरतों से घिरे रहते हैं और उन्हें यह अच्छा भी लगता है (यह अच्छा किसे नहीं लगता?) लेकिन मैं जानता हूं कि दिल से बहुत ही रूढ़िवादी शख्स हैं.

 

'डर्टी ओल्ड मैन'

खुशवंत सिंह ने साल 2000 में बीबीसी को एक इंटरव्यू दिया था. अपने साक्षात्कार में उन्होंने बताया कि मुझे 'डर्टी ओल्ड मैन' समझना लोगों ने क्लीशे बना दिया है. लेकिन हकीकत यही है कि मैं सुबह चार बजे उठकर काम करना शुरू कर देता हूं. जिस आदमी ने 80 से ज्यादा किताबें लिखी हों उसके पास ऐय्याशी के लिए कितना वक्त होगा भला.

मेरे पास तो बिल्कुल भी नहीं है. शाम को कुछ खूबसूरत लड़कियों के साथ महफिल जमती भी है तो 15-20 मिनट से ज्यादा टिकने नहीं देता. मैं अपने स्टडी रूम में वापस लौट जाता हूं.

First published: 20 March 2018, 12:30 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी