Home » इंडिया » Kidney racket bust: Delhi Police probing senior Apollo doctors
 

अपोलो किडनीकांड: अस्पताल के सीनियर डॉक्टरों की मिलीभगत के संकेत

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 June 2016, 23:33 IST

बृहस्पतिवार 2 जून को दिल्ली पुलिस ने राजधानी में किडनी रैकेट का पर्दाफाश किया. पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया जिनमें दो साउथ दिल्ली के मशहूर मल्टी-स्पेशियलिटी अपोलो अस्पताल में काम करते हैं. वास्तव में अपोलो दिल्ली के सबसे महंगे अस्पतालों में से एक है और देश भर में मौजूद सर्वाधिक संख्या वाले अस्पताल श्रृंखला का हिस्सा है.

पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए तीन अन्य दलाल बताए जा रहे हैं. रैकेट का सरगना टी राजकुमार राव अभी फरार है.

वहीं, पुलिस पहाड़गंज के एक होटल में ठहरी तीन महिलाओं तक भी पहुंच गई है. इनमें से दो महिलाओं ने पहले ही अपनी किडनी डोनेट कर दी है, तीसरी भी जल्द ही किडनी देने वाली थी.

पुलिस का यह भी दावा है कि उसने अवैध रूप से किए गए अंगदान के सात मामलों की पहचान की है.

सीनियर डॉक्टर्स भी थे शामिल?

दिल्ली पुलिस साउथ ईस्ट के डीसीपी मंदीप सिंह रंधावा के मुताबिक पकड़े गए दो व्यक्ति आदित्य सिंह (24) और शैलेष सक्सेना (31) पिछले तीन-चार साल से अपोलो अस्पताल के नेफ्रोलॉजिस्ट्स के पर्सनल सेक्रेटरी थे.

रिपोर्ट बताती है कि अस्पताल के स्टाफ को परिसर में चल रहे रैकेट की जानकारी थी और आरोप है कि इसमें सीनियर डॉक्टर्स की भी मिलीभगत हो सकती है. आखिरकार इसकी बहुत कम ही संभावना है कि ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर्स को यह न पता हो कि कानूनन डोनर का मरीज से कोई संबंध नहीं था.

दिल्ली: अपोलो अस्पताल में किडनी रैकेट का भंडाफोड़

वहीं, अपोलो अस्पताल द्वारा कहा गया कि गिरफ्तार किए गए दो व्यक्ति कुछ डॉक्टरों के सेक्रेटेरियल स्टाफ थे और अस्पताल के कर्मचारी नहीं थे. 

अस्पताल द्वारा जारी बयान में कहा गया, "सभी सावधानियां बरतने के बावजूद ऐसा लगता है कि आपराधिक उद्देश्य से इस रैकेट के लिए फर्जी दस्तावेज इस्तेमाल किए गए. मरीजों को धोखा देने वाली इस पूर्ण सुनियोजित कार्रवाई में अस्पताल एक पीड़ित है."

पुलिस जांच रही डॉक्टरों की भूमिका

इस बीच अपोलो का दावा है कि वो जांच में सहयोग कर रहा है. कथित रूप से बयान में कहा गया, "अस्पताल.. एक स्वतंत्र निकाय है जिसमें किसी भी ट्रांसप्लांट सर्जरी के लिए बाहरी सदस्यों के साथ उचित इजाजत ली जाती है. यह समिति एक्ट के अंतर्गत सभी जरूरी दस्तावेज देखती और सुनिश्चित करती है."

पुलिस ने कैसे किया रैकेट का भंडाफोड़

दक्षिण पूर्व जिला दिल्ली पुलिस को एक सूचना मिली कि मरीज के रिश्तेदार और डोनर के बीच मीटिंग कराने के लिए एक गैंग अपोलो अस्पताल में आ रहा है. 

इसके बाद पुलिस ने अपना जाल बिछाया, जिसके परिणामस्वरूप तीन दलाल पकड़ लिए गए. इन पर ऑर्गन डोनेेशन एक्ट की धारा लगाई गई जिसके तहत केवल एक रिश्तेदार ही अंगदान कर सकता है. 

केवल ऐसे मामलों में जब मरीज के परिवार के अंदर किसी का अंग मैच न करे तभी एक बाहरी व्यक्ति डोनेट कर सकता है, वो भी तब जब यह सुनिश्चित हो कि इसमें कहीं भी पैसों की भूमिका नहीं है और यह डोनेशन केवल और केवल दया के आधार पर ही किया जा रहा है.

सभी अस्पताल जिनमें ऐसे ऑपरेशन किए जाते हैं, के लिए जरूरी होता है कि वे कानून का पालन करें.

मोडस ऑपरैंडी

पुलिस के मुताबिक तीन दलाल असीम सिकदर, सत्य प्रकाश और देवाशीष मौलिक लोगों को अपनी किडनी दान करने के बदले पैसे देने का लालच देते थे.

पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार किए गए तीनों व्यक्ति डोनर को मरीज का रिश्तेदार साबित करने के लिए जाली दस्तावेज बनाते होंगे. दावा है कि तमाम इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के अलावा सीडी, कुछ दस्तावेज, जाली आधार कार्ड और मतदाता पहचान पत्र भी बरामद किए गए हैं. 

कथित रूप से एक डोनर को महज 5 लाख रुपये ही दिए जाते थे जबकि मरीज से 25-30 लाख रुपये की भारी भरकम रकम वसूली जाती थी. डोनर उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों से आते थे.

रिपोर्ट बताती है कि रैकेट का सरगना राव किडनी बेचने को राजी जरूरतमंद लोगों की तलाश में नेपाल और श्रीलंका भी जाता होगा. 

इन डोनरों को इस पूरी प्रक्रिया के दौरान शहर के आलीशान होटलों में ठहराया जाता था. रिपोर्ट्स के मुताबिक जालंधर और कोयंबटूर में चलने वाले ऐसे ही रैकेट्स का राव मास्टरमाइंड था. 

पकड़े गए दलालों ने कथितरूप से पुलिस को बताया है कि इस रैकेट का संचालन राव ही करता था. राव को कोलकाता का रहने वाला बताया जाता है. 

तीनों दलालों ने कथितरूप से पुलिस को यह भी बताया कि उन्हें केवल 1 लाख रुपये मिलते थे. हालांकि अभी तक यह साफ नहीं हो सका है कि बाकी रकम कौन ले जाता था.

First published: 5 June 2016, 23:33 IST
 
अगली कहानी