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परिजनों का आरोप: हिंदू होने के कारण सावन को जिंदा जलाया

अश्विन अघोर | Updated on: 23 January 2016, 22:49 IST
QUICK PILL
  • कथित रूप से 17 वर्षीय कचरा बीनने वाले सावन राठौड़ को पुणे के कस्बा पेठ में 13 जनवरी को इमरान तंबोली, ज़ुबैर तंबोली और इब्राहिम शेख ने आग के हवाले कर दिया था. दो दिन बाद उसकी मौत हो गई.
  • रिश्तेदारों के मुताबिक सावन की \"हत्या करने का ढंग\" आईएसआईएस आतंकवादियों के समान है. परिजनों का कहना है कि अगर 27 जनवरी तक पुलिस के आतंकवाद निरोधक दस्ते को मामले की जांच नहीं सौंपी तो वे आंदोलन करेंगे.

पुणे में एक किशोर की मौत में कथित रूप से तीन मुस्लिम युवकों के हाथ होने की जानकारी सामने आने के बाद वहां सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने का खतरा मंडराने लगा है.

सावन धर्म राठौड़ के रिश्तेदारों ने आरोप लगाया था कि वह हिंदू था इसलिए उसकी 'हत्या' कर दी गई.  कथित रूप से 17 वर्षीय कूड़ा बीनने वाले राठौड़ को पुणे के कस्बा पेठ में 13 जनवरी को इमरान तंबोली, ज़ुबैर तंबोली और इब्राहिम शेख ने आग के हवाले कर दिया था. दो दिन बाद ससून अस्पताल में उसकी मौत हो गई.

धर्म राठौड़ ने आरोप लगाया कि "वह हिंदू था इस बात की तस्दीक करने के बाद" उनके बेटे को आरोपियों ने पेट्रोल पीने के लिए मजबूर हैं और फिर उसके ऊपर पेट्रोल छिड़क कर आग लगा दी.

रिश्तेदारों का दावा है कि उन्होंने बिस्तर पर मौत से जूझते सावन को यह सब कहते हुए रिकॉर्डिंग भी की है. बंजारा समुदाय से संबंध रखने वाले राठौड़ ने जब अपने समुदाय के नेताओं को यह वीडियो दिखाया तब उन्होंने 21 जनवरी को वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मुलाकात की.

उन्होंने दावा किया कि सावन की "हत्या करने का ढंग" आईएसआईएस आतंकवादियों के समान है. उन्होंने पुलिस अधिकारियों से मांग की है कि अगर 27 जनवरी तक पुलिस के आतंकवाद निरोधक दस्ते को मामले की जांच का जिम्मा नहीं सौंपा तो वे आंदोलन करेंगे.

इसके तुरंत बाद पुलिस ने जल्द ही तीन संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया. फिलहाल तीनों संदिग्ध आरोपितों को 25 जनवरी तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है.

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, सावन ने बताया था कि "13 जनवरी की दोपहर को कस्बा पेठ की संकरी गली में जब वह कचरा बीन रहा था तब उसका संदिग्धों से सामना हुआ." 

वे कथित तौर पर यह जानना चाहते थे कि क्या सावन ही "क्षेत्र में दोपहिया वाहनों की बैटरी चोरी करने में शामिल है." कथित तौर पर उसकी जमकर पिटाई करने से पहले उसे संदिग्ध 3-4 स्थानों पर ले गए. 

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, अब कोई भी मरने वाले व्यक्ति का बयान रिकॉर्ड कर सकता है

एक व्यक्ति ने बताया, "फिर उसे पेट्रोल पीने के लिए मजबूर किया और यहां तक ​​कि उसके ऊपर भी डाला. जिसके बाद उन्होंने उसके आग लगा दी और वहां से भाग गए."

सावन ने किसी तरह पास में सुखाने के लिए रखे गए कंबल को खींचा और उसे लपेट लिया. आसपास के लोगों ने उसे देखा और पुलिस को सूचित किया.

पीड़ित के बयान की रिकॉर्डिंग

सावन का परिवार महाराष्ट्र के सोलापुर जिले में पंढरपुर के रहने वाला है. उसके पिता के अनुसार, इस घटना के एक सप्ताह पहले "बहुत ही छोटी बात" पर झगड़ा कर सावन घर छोड़ कर जा चुका था.

14 जनवरी को घटना की सूचना मिलने पर धर्म पुणे के लिए रवाना हो गए. उन्होंने आरोप लगाया, "जब उसने अपनी कठिनाई बताई, मैं चौंक गया था. सावन ने मुझे बताया कि आग लगाने से पहले उन्होंने उसका धर्म पूछा था." 

उन्होंने यह भी कहा, "मीडिया द्वारा घटना की सूचना मिलने के बाद बंजारा नेताओं के अस्पताल पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था. सावन ने जो कहा उन्होंने रिकॉर्ड भी किया है."

हाल ही के दिनों में यह तीसरी घटना है जब सांप्रदायिक आधार पर किसी की हत्या की गई है

बंजारा क्रांति दल के एक नेता रमेश राठौड़ ने कहा, "14 जनवरी को जब हम अस्पताल पहुंचे तो सावन की हालत बहुत गंभीर थी. पुलिस ने उसका बयान दर्ज करने के हमारे अनुरोध को ठुकराते हुए कहा कि वह शिकायतकर्ता था. इसलिए मैंने उसका बयान रिकॉर्ड कर लिया. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, अब कोई भी मरने वाले व्यक्ति का बयान रिकॉर्ड कर सकता है." रमेश ने आरोप लगाया कि सावन को "केवल इसलिए आग के हवाले कर दिया गया क्योंकि वह हिंदू था." 

उन्होंने यह भी दावा किया कि पुलिस ने घटना को दबाने की भी कोशिश की थी क्योंकि "वो इसके कारणों को भलीभांति जानती थी." उन्होंने कहा कि "हाल ही के दिनों में यह तीसरी घटना है जब लोगों को इसलिए मार दिया गया क्योंकि वह हिंदू हैं. पहली घटना कोधंवा में हुई, दूसरी पार्वती के पास और तीसरी यह है. इन सभी घटनाओं को पुलिस द्वारा रफा-दफा कर दिया गया."

रमेश ने बताया, "हमनें अदालत को सावन के बयान की एक सीडी सौंपते हुए इस मामले की जांच एटीएस को सौंपने की मांग की है." अगर हमारी मांग को पूरा नहीं किया गया तो हम 27 जनवरी को आंदोलन शुरू करेंगे. हमें लगता है पुलिस को डर है कि यदि मामला खुला तो सांप्रदायिक तनाव न हो जाए."

पुलिस ने किया खंडन

हालांकि पुलिस उपायुक्त तुषार दोशी ने इस सुझाव को खारिज कर दिया. वे बोले "पीड़ित खुद ही इस मामले में शिकायतकर्ता था और उसने हमें कभी नहीं बताया कि आरोपियों ने उससे धर्म के बारे में पूछा था. इसके अलावा हमने आरोपियों की पृष्ठभूमि की भी जांच की है और किसी भी तरह की सांप्रदायिक गतिविधियों से उनका कोई संबंध नहीं मिला है."

उन्होंने कहा, "आरोपियों ने उसे संदिग्ध बैटरी चोर समझते हुए पूछताछ की क्योंकि कुछ दिन पहले एक आरोपी इब्राहिम शेख के मिनी ट्रक की बैटरी चोरी हो गई थी. अभी तक की जांच में किसी तरह के सांप्रदायिक कोण का संकेत सामने नहीं आया है."

First published: 23 January 2016, 22:49 IST
 
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