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जानिए उरी हमले में हिंदुस्तान के लिए कुर्बान 18 जवानों के बारे में

कैच ब्यूरो | Updated on: 20 September 2016, 14:11 IST
(इंडियन आर्मी)

जम्मू-कश्मीर के उरी में सेना मुख्यालय पर हमले के बाद पूरे देश गुस्से और गम में डूबा हुआ है. हमले में शहादत पाने वाले 18 वीर जवानों को उनके पैतृक गांवों में पूरे राजकीय सम्मान से अंतिम विदाई दी जा रही है. देश के लिए शहादत देने वाले 18 जवानों में में ज्यादातर डोगरा रेजीमेंट और बिहार रेजीमेंट से हैं.

डोगरा रेजीमेंट के शहीद 2 जवान जम्मू-कश्मीर के रहने वाले थे. जबकि बिहार रेजीमेंट के शहीद जवानों में 4 यूपी, 4 महाराष्ट्र, 3 बिहार, 2 झारखंड, 2 पश्चिम बंगाल और 1 राजस्थान के थे. शहीद जवानों के बारे में आपको बताते हैं:

सिपाही जवरा मुंडा, खूंटी (झारखंड)

खूंटी जिले के मेरला गांव के रहने वाले 35 साल के सिपाही जवरा मुंडा पिछले तीन सालों से कश्मीर में तैनात थे. कुछ समय बाद उनका ट्रांसफर होने वाला था, लेकिन इससे पहले रविवार को उरी हमले में शहीद हो गए. जवरा मुंडा के परिवार में उनकी पत्नी और मां के अलावा दो बेटी भी हैं. जवरा मुंडा का एक छोटा भाई भी है जिसकी उम्र 18 साल है और वो भी सेना में जाकर अपने देश की सेवा करना चाहता है.

सुबेदार करनैल सिंह, जम्मू (जम्मू-कश्मीर)

जम्मू के बिश्नाह इलाके के शिबूचक के रहने वाले करनैल सिंह पिछले करीब ढाई सालों से उरी में तैनात थे. करनैल सिंह का 18 साल का बेटा अनमोल अभी बीए में पढ़ रहा है और उसका सपना अपने पिता की तरह सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करना है.

हवलदार रवि पाल, जम्मू (जम्मू-कश्मीर)

रविवार को श्रीनगर के उरी में सेना के कैंप पर हुए हमले में जम्मू के साम्बा सेक्टर के हवलदार रवि पॉल देश के लिए  कुर्बान हो गए. 43 साल के रवि पॉल 23 साल से सेना में थे. उनके घर में उनके 4 भाई, मां, पत्नी और 2 बेटे हैं.

नायक एसके विद्यार्थी, गया (बिहार)

एसके विद्यार्थी की मौत के बाद से बोकनारी गांव में मातम का माहौल है. करीब 16 साल पहले उनकी शादी हुई थी. उनके परिवार में मां और पत्नी के अलावा तीन बेटियां और एक सबसे छोटा दो साल का बेटा है.

लांस नायक जी शंकर, सतारा (महाराष्ट्र)

सतारा के माण तहसील के जाशी गांव के रहनेवाले शहीद लांस नायक चंद्रकांत शंकर गलांडे की उम्र अभी 27 साल थी. उनकी पत्नी के अलावा घर में दो बच्चे भी हैं. बच्चों की उम्र काफी छोटी है.

सिपाही हरिंदर यादव, गाजीपुर (यूपी)

अपने परिवार में छह भाइयों में पांचवें स्थान पर थे शहीद हरिंदर यादव. हरिंदर ने 2007 में सेना ज्वाइन की थी. उनके परिवार में पत्नी और दो बच्चों सहित कुल 10 लोग हैं. इसके अलावा वह अपने परिवार में अकेले सरकारी नौकरी में थे. साल 2011 में उनकी शादी हुई थी. 

सिपाही टीएस सोमनाथ, नासिक (महाराष्ट्र)

नासिक के रहने वाले शहीद संदीप सोमनाथ ठोक बिहार रेजीमेंट में थे. 25 साल के संदीप के शहीद होने की सूचना जब वहां पहुंची तो सभी सन्न थे. वे नासिक के सिन्नर तहसील के खडांगली गांव के रहने वाले थे. उनकी शादी नहीं हुई थी, लेकिन उसके लिए परिजन तैयारियों में जरूर लगे थे. 

हवलदार अशोक कुमार, आरा (बिहार)

आरा के रहने वाले 44 साल के  हवलदार अशोक कुमार सिंह के के दो बच्चे हैं. उनमें से एक बिहार रेजीमेंट में ही देश की सेवा में लगा है जबकि दूसरा अभी पढ़ाई कर रहा है. हवलदार अशोक के परिवार में इस तरह की ये दूसरी घटना है. इससे पहले उनके भाई कमता सिंह साल 1993 में बीकानेर में हुए एक बम धमाके में शहीद हो गए थे.

सिपाही राजेश कुमार सिंह, जौनपुर (उत्तर प्रदेश)

जौनपुर के भकूर गांव के रहने वाले 33 साल के राजेश कुमार 12 साल पहले सेना में भर्ती हुए थे. परिवार के तीन भाइयों में वे सबसे छोटे थे. राजेश के परिवार में उनकी पत्नी जूली के अलावा एक 10 साल का बेटा है, जो बनारस में अपने चाचा के यहां रहकर पढ़ाई कर रहा है.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उरी हमले में मारे गए यूपी के 4 जवानों के परिवार वालों को 20-20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का एलान किया है. 

इंडियन आर्मी

सिपाही राकेश सिंह, कैमूर (बिहार)

कैमूर के बंधा गांव के निवासी राकेश सिंह साल 2008 में सेना में भर्ती हुए थे. कश्मीर में ये उनकी दूसरी पोस्टिंग थी. उनके परिवार में माता-पिता के अलावा उनकी पत्नी किरन और एक छोटा बेटा हर्षित भी है. 

सिपाही नायमन कुजूर, गुमला (झारखंड)

गुमला के चैनपुर गांव के निवासी सिपाही नायमन कुजूर ने उरी हमले से एक दिन पहले अपनी पत्नी बीना से फोन पर बात की थी और कहा था कि बच्चों का ख्याल रखें और मेरी चिंता न करें.

इसके अगले ही दिन उनके शहीद होने की खबर से पूरे गांव में शोक का माहौल है. बीना की साल 2013 में ही नायमन से शादी हुई थी. अब उनके सामने पूरी जिंदगी पड़ी है और अकेले अपने बच्चों की परवरिश करनी है. नायमन के पिता महानंद कुजूर एक किसान हैं, जो छोटी सी जमीन पर खेती करके अपने पूरे परिवार का पालन-पोषण करते हैं. 

सिपाही विश्वजीत गोराई, दक्षिण 24 परगना (बंगाल)

उरी हमले में शहीद हुए दक्षिण 24 परगना के विश्वजीत गोराई के परिवार पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है. 20 साल के गोराई के पिता दैनिक मजदूरी कर के अपना घर चलाते रहे हैं. विश्वजीत की यह पहली ही पोस्टिंग थी. उसके बाद अब मजदूरी करने वाले पिता ही एक मात्र कमाने वाले शख्स उसके परिवार में बचे हैं. बेटे की मौत की खबर से परिवार टूट गया है. 

सिपाही गंगाधर दलाई, हावड़ा (बंगाल)

मात्र 23 साल की उम्र में गंगाधर दलाई उरी हमलें में शहीद हो गए. हावड़ा के जमुना बलाई गांव के रहने वाले गंगाधर ने दो साल पहले कॉलेज के पहले साल में ही सेना ज्वाइन की थी.

गंगाधर दलाई की मां ने कहा, "मैं न्याय और उन लोगों के लिए सख्त सजा की मांग करती हूं जिन्होंने मेरे बेटे की जान ली." पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में स्थित उनके गांव में शोक का माहौल है.

शहीद की मां ने कहा, "मेरे बेटे ने कुछ दिन पहले ही फोन किया था. उसने कहा था कि वह एकदम ठीक है. मुझे विश्वास नहीं हो रहा कि अब वह नहीं है."

लांस नायक आरके यादव, बलिया (उत्तर प्रदेश)

लांस नायक आरके यादव का परिवार बलिया के दुबर्धा में रहता है और हाल ही में उनकी शादी हुई थी. उनकी पत्नी 8 महीने की गर्भवती हैं, जबकि मां सिमरिया देवी हृदय रोग से पीड़ित हैं.

हवलदार एनएस रावत, राजसमंद (राजस्थान)

48 साल के एनएस रावत जलाई में एक महीने के लिए अपने घर आए थे और 8 दिन पहले ही उन्होंने अपने परिवार वालों से बात की थी. रावत की मौत के बाद से पूरा गांव गमगीन है. उनके परिवार में उनकी पत्नी बेटी आशा, दीपा, निशा, पायल और उनका बेटा चंदन है. वे अपने परिवार में अकेले कमाने वाले थे. एनएस रावत का पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया.

सिपाही गणेश शंकर, संत कबीर नगर (उत्तर प्रदेश)

संतकबीर नगर जिले के घोरापल्ली गांव में जब सिपाही गणेश शंकर के शहीद होने की खबर पहुंची, तब उनका परिवार उनकी छोटी बहन इंद्रावती की शादी की तैयारियों में व्यस्त था. 34 साल के गणेश शंकर के परिवार में उनकी पत्नी गुड़िया और उनके तीन बच्चे अमृता (9), अंकित (7) और खुशी (4) हैं.

सिपाही विकास जनराव उईके, अमरावती (महाराष्ट्र)

उरी हमले में शहीद हुए सिपाही विकास जनराव उईके का परिवार अमरावती के नंदगांव में तीन कमरों के एक मकान में रहता है. विकास जनराव हर महीने अपने परिवार को 10 हजार रुपये भेजते थे. वो अपनी बहन प्रीति की शादी भी करवाने वाले थे. 

सिपाही के विकास जर्नादन, यवतमाल (महाराष्ट्र)

यवतमाल के गांव पुरद के रहने वाले विकास रविवार को उरी हमले में घायल हो गए थे. इस घटना के एक दिन बाद अस्पताल में उनका निधन हो गया. विकास 2008 में सेना में भर्ती हुए थे और 6 महीने पहले ही उरी कैंप में उनका ट्रांसफर किया गया था. 

दो साल पहले ही विकास की शादी हुई थी. उनके परिवार में उनकी पत्नी (23) और 4 महीने के बेटे के अलावा एक छोटा भाई और मां-पिता भी हैं.

First published: 20 September 2016, 14:11 IST
 
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