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आयरन लेडी: 16 साल बाद ऐतिहासिक अनशन का अंत

निखिल कुमार वर्मा | Updated on: 26 July 2016, 16:47 IST

पिछले 16 सालों से मणिपुर से सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम (अफ्स्पा) को हटाने की मांग पर अनशन कर रही इरोम शर्मिला 9 अगस्त को भूख हड़ताल खत्म करने जा रही हैं. जानी मानी मानवाधिकार कार्यकर्ता और आयरन लेडी के नाम से मशहूर 44 वर्षीय शर्मिला अब चुनाव लड़ना चाहती हैं.

इरोम के सहयोगियों के अनुसार वह मणिपुर विधानसभा का चुनाव स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर लड़ेंगी. इरोम को उनके अनशन के दौरान जबरन नाक में डाली गई ट्यूब के जरिये खाना खिलाया जाता रहा है.

इसी साल मार्च महीने में उन्हें न्यायिक हिरासत से रिहा किया गया था. पिछले सालों में उन्हें कई बार रिहा करने के बाद आत्महत्या के प्रयास में दोबारा गिरफ्तार किया गया है. रिहा होने के बाद उन्होंने निराशा जताई थी कि वो जिस मकसद के लिए लड़ रही हैं उसके लिए लोगों का समर्थन अब कम होता जा रहा है.

16 साल पहले शुरू किया संघर्ष

इरोम शर्मिला का जन्म इंफाल, मणिपुर में 14 मार्च, 1972 के दिन हुआ था. उनके घर नाम 'चानू' है. राजधानी इंफाल के मालोम इलाके में असम राइफल की गोलीबारी में मारे गए 10 मणिपुरी युवकों की मौत के बाद 2 नवंबर, 2000 को इरोम भूख हड़ताल पर बैठी थीं.

उस समय 28 साल की रहीं इरोम ने मणिपुर से अफ्सपा हटाने की मांग को लेकर अपना अनशन शुरू किया. कई मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि इस कानून की आड़ में सेना ने कई मासूमों की 'फर्जी' मुठभेड़ों में हत्या की है. हालांकि, सेना अलगाववाद और आतंकवाद से निपटने के लिए इस कानून को जरूरी मानती हैं.

इरोम पर आरोप

इरोम आरोप है कि 2006 में दिल्ली के जंतर-मंतर पर उन्होंने खुदकुशी करने की कोशिश की थी, जो भारतीय दण्ड संहिता की धारा 309 के अनुसार एक अपराध है. इस आरोप के चलते वह पिछले दस सालों से न्यायिक हिरासत में रही हैं.

इरोम का देखभाल कर रहे है डॉक्टरों का कहना है कि लगातार 16 साल तक खाना न खाने की वजह से उनकी हड्डियां बहुत कमजोर हो गई हैं और कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं आ रही हैं.

आम आदमी पार्टी से उम्मीदें

2014 के लोकसभा चुनाव से पहले बीबीसी को दिए इंटरव्यू में इरोम ने कहा था कि उन्हें आम आदमी पार्टी से बहुत उम्मीद है. उन्होंने कहा, "अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में 49 दिन चली दिल्ली सरकार के काम से बहुत प्रभावित हुई हैं, 'वो सचमुच भ्रष्टाचार से लड़ना चाहते हैं. उनके शासन में लोगों ने एक बदलाव महसूस किया. मैं चाहती हूं वह लोकसभा में भी आएं.” आपको बता दें कि कांग्रेस ने इरोम को 2014 में लोकसभा चुनाव का टिकट देने का प्रस्ताव रखा था लेकिन इरोम ने मना कर दिया.

क्या है अफ्सपा

सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (अफ्सपा) को 1958 में संसद द्वारा पारित किया गया था. शुरुआत में अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड और त्रिपुरा में यह कानून लागू किया गया. जम्‍मू-कश्‍मीर में यह कानून 1990 में लागू किया गया था.

इस कानून के तहत जम्‍मू-कश्‍मीर की सेना को किसी भी व्‍यक्ति को बिना कोई वारंट के तशाली या गिरफ्तार करने का विशेषाधिकार है. इस कानून के अनुसार सेना के जवानों को कानून तोड़ने वाले व्‍यक्ति पर फायरिंग भी अधिकार है.

इस कानून की धारा-4 के तहत सेना को कानून-व्यवस्था बहाल रखने के लिए बिना वारंट के उपद्रवी तत्वों की तलाशी, प्राणघातक होने की हद तक बल प्रयोग, तथा संपत्ति जब्त या नष्ट करने का अधिकार है. कानून की धारा-6 के तहत सेना के जवानों पर केंद्र सरकार की अनुमति बगैर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं हो सकती अौर न ही अभियोजन चलाया जा सकता है.

First published: 26 July 2016, 16:47 IST
 
निखिल कुमार वर्मा @nikhilbhusan

निखिल बिहार के कटिहार जिले के रहने वाले हैं. राजनीति और खेल पत्रकारिता की गहरी समझ रखते हैं. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से हिंदी में ग्रेजुएट और आईआईएमसी दिल्ली से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा हैं. हिंदी पट्टी के जनआंदोलनों से भी जुड़े रहे हैं. मनमौजी और घुमक्कड़ स्वभाव के निखिल बेहतरीन खाना बनाने के भी शौकीन हैं.

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