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जानिए नोटबंदी पर कैसे बना मोदी का मास्टर प्लान और कौन है मास्टरमाइंड?

कैच ब्यूरो | Updated on: 9 December 2016, 13:02 IST
(फाइल फोटो)

नोटबंदी के पीएम मोदी के फैसले की देशभर में चर्चा हो रही है. इसे भारत की अर्थव्यवस्था के इतिहास में सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है. पर्दे के पीछे इस फैसले के पीछे कौन-कौन से दिमाग काम कर रहे थे और पीएम मोदी ने इस अहम फैसले को लागू करने के लिए जिस शख्स को चुना उसके बारे में ज्यादातर लोगों को नहीं पता.

एक अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी की रिपोर्ट में उस अफसर के बारे में जानकारी सामने आई है, जिसे पीएम मोदी ने विमुद्रीकरण को अमली जामा पहनाने के लिए चुना. समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक इस शख्स का नाम है हसमुख अधिया, जिन्हें वित्त महकमे में भी काफ़ी लो प्रोफाइल का माना जाता है. डॉक्टर हसमुख अधिया वित्त मंत्रालय में राजस्व सचिव के पद पर तैनात हैं.

हसमुख अधिया और पांच साथियों का प्लान

रिपोर्ट के मुताबिक हसमुख अधिया और उनके पांच सहयोगी पीएम मोदी के इस मास्टर प्लान का हिस्सा थे. हंसमुख के बाकी साथियों को योजना का हिस्सा बनाने से पहले गोपनीयता की अच्छे से तस्दीक कर ली गई थी.

वहीं नोटबंदी की तह तक खबर रखने वाले कुछ सूत्रों के मुताबिक इस हंसमुख समेत छह सदस्यों की टीम के साथ एक रिसर्च टीम भी पीएम मोदी के साथ काम कर रही थी.

आठ नवंबर को रात आठ बजे के बाद जब पीएम मोदी ने नोटबंदी का एलान किया, तो उससे पहले भी पीएम आवास पर दो कमरों में यह टीम लगातार काम कर रही थी.

जाहिर है पीएम मोदी इतने बड़े फैसले से पहले गोपनीयता भंग होने का कोई जोखिम नहीं उठाना चाहते थे. पीएम इस एलान से पहले काले धन को सोने, प्रॉपर्टी और संपत्ति में निवेश का मौका नहीं देना चाहते थे.

इस फैसले के बाद पीएम मोदी का बहुत कुछ दांव पर लगा है. यूपी जैसे अहम राज्य समेत कई राज्यों में अगले साल विधानसभा चुनाव हैं.

न्यूज़ एजेंसी ने 8 नवंबर को नोटबंदी की घोषणा से ठीक पहले कैबिनेट बैठक में शामिल रहे तीन मंत्रियों के हवाले से बताया है, "पीएम मोदी ने कैबिनेट बैठक में कहा कि मैंने हर तरह की रिचर्स कर ली है और अगर कुछ गलत होता है तो उसका जिम्मेदार मैं हूं."

पीएम मोदी ने हाल ही में नमो ऐप के जरिए नोटबंदी के फैसले पर जनता से रेटिंग देने का कहा था. (ट्विटर)

पीएम आवास में बैकरूम टीम

अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक मास्टर प्लान पर पर्दे के पीछे पीएम आवास से एक बैकरूम टीम काम कर रही थी. जिसके कर्ता-धर्ता थे हसमुख अधिया.

58 साल के डॉक्टर हसमुख अधिया, गुजरात में 2003 से 2006 के दौरान प्रधान सचिव रह चुके हैं. सियासी जानकार बताते हैं कि योग से तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी का अधिया ने ही परिचय कराया था.

समाचार एजेंसी ने अधिया के सहयोगियों से बात की है. रिपोर्ट के मुताबिक अधिया की ईमानदारी के वे सभी कायल दिखे. 

बतौर राजस्व सचिव सितंबर 2015 में अधिया की तैनाती हुई. वित्तमंत्री अरुण जेटली को अधिया रिपोर्ट करते थे. इस दौरान अधिया के सीधे तौर पर पीएम मोदी के संपर्क में आने से करीबी बढ़ गई.

'ब्लैक मनी पर सर्जिकल स्ट्राइक'

आठ नवंबर को पीएम मोदी ने एक झटके में एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की 86 फीसदी नकदी को रद्दी घोषित कर दिया. इसके साथ ही पांच सौ और एक हजार के पुराने नोट लेन-देन में बंद हो गए.

8 नवंबर को पीएम मोदी के नोटबंदी के फैसले के तुरंत  बाद रात आठ बजकर 48 मिनट पर हसमुख अधिया ने ट्वीट किया, "काले धन पर लगाम कसने के लिए यह सरकार का सबसे बड़ा और सबसे बोल्ड कदम है. यह ब्लैक मनी पर सर्जिकल स्ट्राइक की तरह है."

पीएम ने फैसले से पहले पूछे सवाल

लोकसभा चुनाव अभियान के दौरान पीएम ने देश की जनता से काले धन को वापस लाने का वादा किया था. समाचार एजेंसी को पीएम के एक करीबी सहयोगी ने बताया, "पिछले एक साल से ज्यादा वक्त से पीएम मोदी, वित्त मंत्रालय के अफसरों, रिज़र्व बैंक और विचारकों से इस पर शोध करने को कह रहे थे कि किस तरह काले धन के खिलाफ लड़ाई को आगे बढ़ाया जाए."

मसलन पीएम मोदी ने कुछ सवालों के जवाब मांगे, "भारत कितनी जल्दी नए नोट छाप सकता है. कैसे उनको जनता तक पहुंचाया जाएगा. जमा पैसे से राष्ट्रीय बैंकों को क्या फायदा होगा और नोटबंदी से आखिर किसको फायदा होगा? सभी विषयों को अलग-अलग रखा गया, जिससे यह शक न हो कि नोटबंदी या नए नोटों को लाने जैसा कोई प्लान बन रहा है."

समाचार एजेंसी को अभियान में शामिल वरिष्ठ अफसर ने बताया, "हम सारे पत्ते नहीं खोलना चाहते थे. अगर किसी को ज़रा सी भी भनक पड़ जाती तो सारी कवायद बेकार हो जाती."

हंसमुख अधिया की अगुवाई में टीम ने फैसले के संभावित असर के बारे में अनुमान लगाया. इस स्पेशल टीम में डाटा और वित्त आंकलन करने वाले भी थे.

इसके साथ ही अधिया के साथ वो यूथ टीम भी थी, जो पीएम का सोशल मीडिया अकाउंट और स्मार्टफोन ऐप हैंडल करती है. हालांकि पीएम मोदी और अधिया जानते थे कि इतने बड़े फैसले से पहले महज अंदाजा लगाकर नहीं चला जा सकता. इसके लिए काफी सोच-समझकर कदम उठाना होगा.

8 नवंबर को नोटबंदी के बाद से बैंकों के एटीएम और कैश काउंटर पर लंबी कतार देखी जा रही है. (कैच)

18 नवंबर को होनी थी नोटबंदी!

नोटबंदी को एक महीने बीत चुके हैं और बैंकों के एटीएम और कैश काउंटर पर कतार अभी कम नहीं हुई है. अनुमान के मुताबिक देश में बैंकनोट छापने वाली चार प्रेस को 500 और 2000 के नए नोट छापकर उन्हें वितरण प्रणाली में लाने में कम से कम तीन महीने लगने तय थे.

ऐसा नहीं है कि इस मिशन में कोई खामी नहीं रही. अप्रैल में ही एसबीआई के विशेषज्ञों ने कहा था कि बड़े नोट बंद हो सकते हैं. वहीं आरबीआई ने भी मई में कहा कि वह नए मूल्यों के नोट जल्दी ही लाने वाला है.

अगस्त में आरबीआई ने बताया कि 2000 के नए नोट की डिजाइन पर मुहर लग गई है. यही नहीं अक्टूबर के आखिरी दिनों में मीडिया में इससे जुड़ी खबरें भी छपने लगीं.

योजना से जुड़े एक और शख्स ने पहचान छुपाने की शर्त पर समाचार एजेंसी को बताया, "योजना तो 18 नवंबर की थी लेकिन ऐसा लग रहा था कि यह खबर पहले ही लीक हो जाएगी."

वित्त मंत्रालय के कुछ अफसरों ने भी चर्चा के दौरान बड़े नोटों को बंद करने के इरादे पर शंका जाहिर की थी. ऐसे में मोदी सरकार ने दस दिन पहले ही नोटबंदी का एलान कर दिया.

First published: 9 December 2016, 13:02 IST
 
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