Home » इंडिया » Know about the POSCO Act, Union Cabinet approved an Ordinance to death penalty rape below 12 years of age
 

जानिए क्या है POCSO एक्ट, जो नाबालिगों से रेप करने वाले दोषियों को देता है कड़ी सजा

कैच ब्यूरो | Updated on: 21 April 2018, 14:51 IST

कठुआ और उन्नाव गैंगरेप की घटनाओं के बाद सरकार ने रेप के कानून में सख्त बदलाव करने की पहल कर दी है. इसके लिए सरकार ने नया अध्यादेश लाया है, जिसके तहत 12 साल से कम की मासूम के साथ रेप करने पर मौत की सजा मिलेगी. कैबिनेट ने इसकी मंजूरी दे दी है. इस मंजूरी के साथ POCSO एक्ट में मौत की सजा जोड़ दी जाएगी. इस कानून के साथ अब 12 साल से कम उम्र की बच्चियों से रेप करने पर मौत की सजा मिलेगी.

जानिए क्या है पास्को एक्ट?
बच्चों के साथ यौन अपराधों को लेकर साल 2012 में केंद्र सरकार ने एक विशेष कानून बनाया था. यह कानून बच्चों को छेड़खानी, बलात्कार और कुकर्म जैसे मामलों से सुरक्षा प्रदान करता है. इसके अलावा एक्ट बच्चों को सेक्सुअल हैरेसमेंट, सेक्सुअल असॉल्ट और पोर्नोग्राफी जैसे गंभीर अपराधों से सुरक्षा प्रदान करता है. पास्को यानि 'प्रोटेक्शन आफ चिल्ड्रेन फ्राम सेक्सुअल अफेंसेस' एक्ट 2012 यानी लैंगिक उत्पीड़न से बच्चों के संरक्षण का अधिनियम 2012.

साल 2012 में बनाए गए इस कानून के तहत 18 साल से कम उम्र के बच्चों से किसी भी तरह का यौन व्यवहार इस कानून के दायरे में आ जाता है. यह कानून लड़के और लड़की को समान रूप से सुरक्षा प्रदान करता है. इस कानून के तहत पंजीकृत होने वाले मामलों की सुनवाई विशेष अदालत में होती है.

कानून के तहत अलग-अलग अपराध के लिए अलग-अलग सजा तय की गई है. आप भी जानिए कौन-कौन सी हैं धाराएं-

धारा 3- पॉक्सो एक्ट की धारा 3 के तहत पेनेट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट को भी परिभाषित किया गया है. जिसमें बच्चे के शरीर के साथ किसी भी तरह की हरकत करने वाले शख्स को कड़ी सजा का प्रावधान है.

धारा 4- इस अधिनियम की धारा 4 के तहत वो मामले शामिल किए जाते हैं जिनमें बच्चे के साथ दुष्कर्म या कुकर्म किया गया हो. इसमें सात साल सजा से लेकर उम्रकैद और अर्थदंड भी लगाया जा सकता है.

धारा 6- पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के अधीन वे मामले लाए जाते हैं जिनमें बच्चों को दुष्कर्म या कुकर्म के बाद गम्भीर चोट पहुंचाई गई हो. इसमें दस साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा हो सकती है और साथ ही जुर्माना भी लगाया जा सकता है.

धारा 7 एवं 8- पॉक्सो अधिनियम की धारा 7 और 8 के तहत वो मामले पंजीकृत किए जाते हैं जिनमें बच्चों के गुप्तांग से छेडछाड़ की जाती है. इसके धारा के आरोपियों पर दोष सिद्ध हो जाने पर पांच से सात साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है.

First published: 21 April 2018, 14:48 IST
 
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