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जानिए कैसे बंद कमरों में पुख्ता सुरक्षा इंतजामों के बीच तैयार होता है आम बजट

कैच ब्यूरो | Updated on: 31 January 2018, 17:33 IST

भारत का बजट कैसे बनता है और इसे कौन बनाता है. इस पूरी प्रक्रिया में कौन-कौन लोग शामिल होते हैं . साथ ही किस प्रिटिंग प्रेस में बजट की छपाई होती है. बजट की सूचनाएं लीक न हों, इसके लिए क्या इंतजाम किए जाते हैं. अगर, आप इन सवालों का जवाब जानना चाहते हैं तो हम आज आपको बजट बनने की पूरी प्रक्रिया के बार में बताएंगे.

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बजट का पहला चरण होता है सर्कुलर

वैसे तो देश का बजट एक फरवरी को लोकसभा में पेश किया जाता है. लेकिन इसे बनाने की प्रक्रिया सितंबर के महीने से ही शुरू हो जाती है. इसके लिए सबसे पहले सभी मंत्रालयों और विभागों को सर्कुलर भेजा जाता है. जिसके जवाब में आगामी वित्तीय वर्ष के अपने-अपने खर्च, विशेष परियोजनाओं का ब्यौरा और फंड की आवश्यकता की जानकारी देनी होती है. यह बजट की रूपरेखा के लिए पहला और आवश्यक कदम है.

टैक्स को लेकर होता है जोड़-घटाव

उसके बाद नवंबर के महीने में वित्त मंत्रालय के ऑफीसर्स नॉर्थ ब्लॉक में अपने जूनियर्स और सीनियर्स के साथ टैक्‍स को लेकर विचार विमर्श करते हैं. इसके बाद अधिकारी इसको फाइनल रूप देते हैं.

बजट के लिए बरती जाती है बहुत गोपनीयता

बजट से जुड़ी कोई सूचना इसके लोकसभा में पेश होने से पहले लीक ना हो इसके लिए विशेष इंतजाम किए जाते हैंइसके लिए वित्त मंत्रालय के शीर्ष अधिकारी, विशेषज्ञ, प्रिंटिंग टेक्निशियन और स्टेनोग्राफर्स नॉर्थ ब्लॉक में एक तरह से कैद में रहते हैं और बाद के सात दिनों में तो बाहरी दुनिया से एकदम कट जाते हैं. वे परिवार से भी बातचीत नहीं कर सकते. इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारी बजट बनाने वाली टीम की गतिविधियों और फोन कॉल्स पर नजर रखते हैं.

कहां होती है बजट  के भाषण की छपाई

वित्त मंत्री का भाषण बजट का सबसे सुरक्षित दस्तावेज होता है. बजट की घोषणा होने के दो दिन पहले सह मध्यरात्रि में प्रिंटर्स को सौंपा जाता है. बजट पेपर वित्त मंत्रालय में स्थित प्रेस में तैयार होते हैं.

राष्ट्रपति की अनुमति के बाद पेश होता है बजट

इस बार बजट 1 फरवरी को पेश किया जाएगा. सरकार को इसके लिए राष्ट्रपति की मंजूरी लेनी होगी. संसद के दोनों सदनों में बजट रखने से पहले इसे यूनियन कैबिनेट के सामने रखना होता है.

नई टीम का पहला बजट

इस बार का बजट बनाने वाली टीम नई है. बजट टीम के मुखिया यानी वित्त सचिव के तौर पर हसमुख अढिया का ये पहला बजट है. बजट बनाने के लिए जिम्मेदार यानी आर्थिक मामलों के विभाग के मुखिया सुभाष चंद्र गर्ग का भी ये पहला बजट है. हालांकि इस विभाग में डायरेक्टर और एक्सपेंडिचर डिपार्टमेंट में ज्वाइंट सेक्रेटरी के तौर पर पहले काम कर चुके हैं और आर्थिक मामलों पर इनकी तगड़ी पकड़ है.

जीएसटी के बाद पहला बजट होगा ये बजट

इस बार का बजट खास होगा. इसमें इनडायरेक्ट टैक्स यानी एक्साइज और सर्विस टैक्स का जिक्र नहीं होगा. क्योकिं जीएसटी लागू होने के चलते सभी तरह के इनडायरेक्ट टैक्स उसी में शामिल हो चुके हैं. लिहाजा इस बजट में सस्ते महंगे की लिस्ट ज्यादा लंबी नहीं होगी. हालांकि अगर सरकार पेट्रोलियम प्रोडक्ट पर एक्साइज ड्यूटी में कोई बदलाव करती है तो उसे जरूर शामिल किया जा सकता है.

First published: 31 January 2018, 17:33 IST
 
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