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केवल एक मिनट में जानिए नए उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू के बारे में

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 August 2017, 19:32 IST

भाजपा के वरिष्ठ नेता वेंकैया नायडू ने आखिरकार शुक्रवार को 15वें उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव में विजय हासिल कर ली और अब वे देश के 15वें उपराष्ट्रपति बनेंगे. शुक्रवार को कुल 785 में से पड़े 771 वोटों में से 516 मत हासिल करने वाले वेंकैया ने विपक्षी उम्मीदवार गोपालकृष्ण गांधी (244) को शिकस्त दी.

इस जीत के साथ ही यह जानना भी जरूरी हो जाता है कि देश के अगले उपराष्ट्रपति आखिर कौन हैं और इनसे जुड़ी कौन सी जरूरी बाते हैं. केवल सात बिंदुओं में जानिए वेंकैया नायडू के बारे में.

  1. वेंकैया नायडू को भाजपा का दक्षिण भारत का बड़ा चेहरा माना जाता है. इसके अलावा वो अपनी वाकपटुता और विपक्षी दलों से संबधों के कारण भी पार्टी में विशेष महत्व रखते हैं. उन्होंने कई बार पार्टी के लिए संकटमोचक की भूमिका निभाई है. इसी कारण मोदी-शाह की जोड़ी ने वेंकैया नायडू को अपना उम्मीदवार बनाया.
  2. वेंकैया नायडू का जन्म 1 जुलाई, 1949 को आंध्र प्रदेश के नेल्लोर जिले में हुआ. 1971 में वेंकैया नेल्लोर के वीआर कॉलेज के छात्र संघ अध्यक्ष चुने गए. इसके दो साल के भीतर वे आंध्र विश्वविद्यालय के कॉलेजों के छात्र संघ अध्यक्ष बने.
  3. वेंकैया 1974 में जनता आंदोलन से प्रभावित होकर आंध्र प्रदेश में लोक नायक जय प्रकाश नारायण छात्र संघर्ष समिति से जुड़ गए. इमरजेंसी के दौरान वेंकैया मीसा (मेनटेनेंस ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट) के तहत गिरफ्तार भी किए गए.
  4. वेंकैया 29 साल की उम्र में 1978 में पहली बार विधायक बने. 1983 में भी विधानसभा पहुंचे और धीरे-धीरे राज्य में भाजपा के सबसे बड़े नेता बनकर उभरे. 1980 में उन्हें भाजपा की यूथ विंग का वाइस प्रेसिडेंट और विधानसभा में पार्टी के विधायक दल का नेता बना दिया गया.
  5. 1998 में वे कर्नाटक से राज्यसभा पहुंचे. इसके बाद से ही 2004, 2010 और 2016 में वह राज्यसभा के सांसद बने. अब तक वो राजस्थान से राज्यसभा सदस्य थे.
  6. पार्टी अध्यक्ष पद से जनाकृष्णमूर्ति की विदाई के बाद वेकैंया को 2002 में भाजपा अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली. 2002 में वे पहली बार भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने. इसके बाद 2004 में वह दोबारा अध्यक्ष बने, लेकिन एनडीए की हार के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया.
  7. वेंकैया नायडू की उम्र 68 साल है और भाजपा द्वारा उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाने के बाद उन्होंने आवास और शहरी मामलों के मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. इसके अलावा उनके पास सूचना और प्रसारण मंत्रालय के साथ साथ शहरी गरीबी उन्‍मूलन मंत्रालय भी था.
First published: 5 August 2017, 19:35 IST
 
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