Home » इंडिया » Know the first 15 minutes why the mission is important for Chandrayaan-2?
 

श्रीहरिकोटा से चंद्रयान- 2 हुआ लॉन्च, 48 दिन बाद पहुंचेगा चंद्रमा की सतह पर

कैच ब्यूरो | Updated on: 22 July 2019, 16:18 IST

भारत के दूसरे मून-मिशन चंद्रयान-2 ने दोपहर 2: 43 बजे को श्रीहरिकोटा से उड़ान भरी. यह 48 दिन के सफर के बाद चन्द्रमा पर उतरेगा. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वैज्ञानिकों ने इस मिशन के लिए कड़ी मेहनत की है. छह साल पहले रूस ने चंद्रयान-2 पर इसरो के साथ अपने सहयोग को समाप्त कर दिया था.

इस मिशन को पिछली गर्मियों में एक और झटका लगा जब इसरो ने अंतरिक्ष यान के डिज़ाइन को फिर से बनाने का फैसला किया और जनवरी में फिर से जब चंद्र लैंडर विक्रम में परीक्षण के दौरान खराबी आ गई. चंद्रयान -2, चंद्रयान -1 की अगली कड़ी में तीन मॉड्यूल शामिल हैं. एक ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर. ऑर्बिटर 100 किलोमीटर दूर से चंद्रमा की परिक्रमा करेगा, जबकि लैंडर रोवर मॉड्यूल को चंद्रमा की सतह तक ले जाएगा. 

 

नतीजतन ISRO ने 15 जुलाई को उलटी गिनती शुरू करने से पहले अप्रैल और मई में लॉन्च विंडो बंद कर दीं. हालांकि टेक-ऑफ से बमुश्किल एक घंटे पहले 15 जुलाई को तकनीकी खराबी के बाद लॉन्च को रद्द कर दिया गया. सितंबर में चंद्र की कक्षा में पहुंचने के बाद विक्रम चंद्र की कक्षा से अलग हो जाएगा और चंद्रमा की सतह पर अपना काम शुरू करेगा. माना जा रहा है इस मिशन के पहले 15 मिशन बहुत महत्वपूर्ण हैं.

जैसा कि इसरो के प्रमुख के सिवन ने हाल ही में कहा, “वे 15 मिनट हमारे लिए सबसे भयानक होने जा रहे हैं. अन्य राष्ट्र जो ऐसा करने की तकनीकी क्षमता रखते हैं, जैसे कि जर्मनी, फ्रांस, जापान और अन्य के पास अंतरिक्ष की महत्वाकांक्षा नहीं है और उनकी सरकारें यह नहीं मानती हैं कि करदाता का पैसा ऐसी चीजों पर खर्च किया जाना चाहिए. चंद्रमा का अध्ययन करने का कारण यह है कि यह हमारे पूरे सौर मंडल के विकास को समझने में हमारी मदद कर सकता है. चंद्रमा 3.5 अरब वर्ष पुराना है.

श्रीहरिकोटा से चंद्रयान- 2 हुआ लॉन्च, 48 दिन बाद पहुंचेगा चंद्रमा की सतह पर

First published: 22 July 2019, 14:52 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी