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कौन है केजरीवाल के दफ्तर में सीबीआई छापे का सूत्रधार? आशीष जोशी से जुड़े कुछ तथ्य

कैच ब्यूरो | Updated on: 17 December 2015, 19:57 IST

मंगलवार को सीबीआई ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार के कार्यालय पर छापा मारा. इस घटना ने आम आदमी पार्टी के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार के बीच टकराव का एक नया मंच सजा दिया. आरोप-प्रत्यारोप का एक सिलसिला चल पड़ा.

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जहां केजरीवाल ने छापे को केंद्र की ओर से एक हमला घोषित किया. वहीं, सीबीआई ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव राजेंद्र कुमार के खिलाफ एक अन्य प्रशासनिक अधिकारी आशीष जोशी द्वारा की गई भ्रष्टाचार की शिकायत के बाद उसने छापे की कार्रवाई की.

छापेमारी की जड़ क्या हैं?

वरिष्ठ नौकरशाह आशीष जोशी दिल्ली डायलॉग कमीशन के पूर्व सदस्य सचिव थे. केजरीवाल सरकार ने जून में इन्हें हटा दिया था. इसके बाद जोशी ने भ्रष्टाचार निरोधक शाखा के प्रमुख मुकेश कुमार मीणा को पत्र लिखकर कुछ आरोप लगाए थे.

आरोपों के मुताबिक राजेंद्र कुमार ने मई 2002 से फरवरी 2005 तक शिक्षा निदेशक के रूप में, फिर सचिव (आईटी), सचिव (स्वास्थ्य) और आयुक्त (वैट) के पद पर रहते हुए कई कंपनियां बनाकर, बिना टेंडर जारी किए अपनी ही कंपनी को काम दिए. इसके जरिए उन्होंने गलत तरीके से कमाई की और सरकार को भी वित्तीय नुकसान पहुंचाया.

कौन हैं आशीष जोशी?

आशीष जोशी 2006 से 2011 तक अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय में तैनात थे. इसके बाद प्रधान निदेशक (सरकारी लेखा मानक सलाहकार बोर्ड, भारत), उप महानिदेशक (संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय), सदस्य वित्त, दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड और दूरसंचार विभाग में उप महानिदेशक के पद पर काम किया. अप्रैल में दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड में काम करने वाले आशीष को बाद में आप सरकार द्वारा दिल्ली डायलॉग कमीशन में लाया गया. यहां उनके रिश्ते सरकार से बिगड़ गए और सरकार ने उन्हें डीडीसी छोड़ने के लिए कह दिया.

क्या था जोशी के इस्तीफे का कारण?

आरोप है कि दिल्ली डायलॉग कमीशन (डीडीसी) के तहत कई पदों पर नियुक्तियां होनी थीं. डीडीसी के वाइस चेयरमैन आशीष खेतान ने इन पदों पर समन्वयक के रूप में छह आप स्वयंसेवकों को नियुक्त करने के लिए आशीष जोशी से कहा.

जोशी ने नियुक्तियों से इनकार कर दिया. इससे सरकार और जोशी के बीच टकराव पैदा हो गया और जोशी को डीडीसी छोड़ने के लिए कह दिया गया.

जोशी ने क्या किया?

इसके तुरंत बाद जोशी ने 16 जून को संयुक्त पुलिस आयुक्त (भ्रष्टाचार निरोधक शाखा) एमके मीणा से शिकायत करते हुए सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र से संबंधित भ्रष्टाचार के लिए केजरीवाल के प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार पर आरोप लगाया. आरोप लगाया गया कि कई ऐसी कंपनियों को 50 करोड़ रुपये से ज्यादा के आईटी संबंधित कार्य और एसएपी लाइसेंस दिए गए जिनमें राजेंद्र कुमार के रिश्तेदार निदेशक थे.

जोशी के आरोप क्या है?

दिल्ली सरकार के शिक्षा, आईटी और स्वास्थ्य विभाग से जुड़े रहने के दौरान राजेंद्र कुमार के कार्यों की भूमिका की जांच के लिए जोशी ने मीणा से शिकायत की थी. 

जोशी की छवि

दिल्ली सरकार की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा को जोशी के खिलाफ मिली एक शिकायत में आरोप है कि उन्होंने एक एनजीओ द्वारा दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड के लिए आवंटित धन का दुरुपयोग किया था. एक शिकायतकर्ता सुनील कुमार ने जोशी पर एक वित्तीय वर्ष में 12 करोड़ रुपये के गबन का आरोप लगाया था.

इस मामले में ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है.

First published: 17 December 2015, 19:57 IST
 
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