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चिकनगुनिया और डेंगू से डरें नहीं, आयुर्वेद और होम्योपैथ में सटीक उपचार

कैच ब्यूरो | Updated on: 16 September 2016, 17:05 IST

दिल्ली समेत देश भर में चिकनगुनिया और डेंगू से हर साल सैकड़ों लोगों की मौत हो जाती है. बावजूद इसके यह हर साल लोगों की जानें लेने वापस आ जाता है. निजी अस्पताल सामान्य या वायरल बुखार आने पर भी ढेरों टेस्ट करवाकर पैसे वसूलते हैं और मरीजों को कई दिनों तक बेवजह भर्ती रखते हैं. 

शरीर के जोड़ों में तेज दर्द के लिए जिम्मेदार चिकनगुनिया और शरीर की प्लेटलेट्स की संख्या तेजी से कम करने वाला डेंगू बुखार यूं तो हर किसी को परेशान करता है, लेकिन डॉक्टर इससे और ज्यादा डरा देते हैं. वैसे भी चिकनगुनिया और डेंगू के विषाणु को शरीर में नष्ट करने के लिए अब तक कोई दवा या वैक्सीन नहीं बन पाई है.

हालांकि इन बीमारियों की जांच और लक्षण दिखने में थोड़ा वक्त लगता है लेकिन तब तक शरीर में काफी कमजोरी आने लगती है. ऐसे में जरूरी है कि सामान्य बुखार आने पर ही उचित सावधानी बरती जाए. 

प्राचीन आयुर्वेद के अलावा होम्योपैथ में भी इन बीमारियों से बचाव के सटीक उपचार मौजूद हैं. बेहद आसान और सस्ते इन उपायों से रोगी जल्द ही तंदरुस्त महसूस करने लगेंगे.

जानिए क्या हैं उपायः

  • करेले और पपीते का ज्यादा सेवन करें.
  • कच्ची गाजर खाना भी रोगियों के लिए काफी फायदेमंद होता है. इससे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता में ईजाफा होता है.
  • तुलसी और आजवायन का सेवन भी काफी बेहतर होता है.
  • अजवायन, किशमिश, तुलसी और नीम की सूखी पत्तियों को एक गिलास पानी में उबालकर बिना छाने दिन में तीन बार पीएं.
  • पपीते की पत्ती न केवल चिकनगुनिया बल्कि डेंगू के दौरान शरीर के तेजी से गिरते प्लेटलेट्स को बढ़ाने के काम आती है. कहा जाता है कि पपीते की पत्तियां केवल तीन घंटे में ही प्लेटलेट्स बढ़ा देती हैं. इसके लिए पपीते की पत्तियों को डंठल से अलगकर केवल पत्ती को पीसकर जूस निकालें और दिन में तीन बार लें.
  • लहसुन और सजवायन की फली मिलाकर तेल गरम करने के बाद इसकी मालिश, रोगियों का दर्द कम 
  • तुलसी, नीम, गिलोय, थोड़ी सी सोंठ, थोड़ी सी छोटी पीपर और सबसे अंत में गुड़ डालकर बना काढ़ा तीन बार पीने से चिकनगुनिया कथितरूप से पूरी तरह खत्म हो जाता है.
  • दर्द दूर करने के लिए जोड़ों पर लहसुन को पीसकर उसमें लौंग का तेल मिलाकर कपड़े से बांध दें.
  • होम्योपैथिक दवा ओसिमम (OCIMUM 200) की दो-दो बूंदे, तीन-तीन बार मरीज को देने पर भी सकारात्मक परिणाम देखने को मिलता है. 

First published: 16 September 2016, 17:05 IST
 
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