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आखिर क्यों जरूरी है मोबाइल फोनों के लिए आधार वेरिफिकेशन?

अमित कुमार बाजपेयी | Updated on: 25 March 2017, 15:57 IST

बीते माह सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए एक आदेश के बाद अब देश के 110 करोड़ मोबाइल फोन यूजर्स को जल्द ही आधार वेरिफिकेशन कराना पड़ेगा. लेकिन इसकी क्या जरूरत है, यह जानना बहुत जरूरी है.

टेलीकॉम इंडस्ट्री का अनुमान है कि इस प्रक्रिया में कंपनियों पर कम से कम 1,000 करोड़ रुपये का भार आ जाएगा, और वो भी तब जब यह कंपनियां टैरिफ वार में लगी हुई हैं और कर्ज बढ़ता जा रहा है.

बृहस्पतिवार को दूरसंचार विभाग द्वारा जारी नोटिस में लिखा गया, "सभी लाइसेंसियों को अपने मौजूदा ग्राहकों को प्रिंट/इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में विज्ञापन के साथ-साथ SMS के जरिये सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश की जानकारी देनी होगी जिसमें कहा गया है कि दोबारा वेरिफिकेशन कराया जाए. इसके साथ ही कंपनियों को इसकी जानकारी वेबसाइट पर भी देनी होगी."

टेलीकॉम डिपार्टमेंट का यह नोटिस सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी उस आदेश के एक माह बाद आया है जिसमें कहा गया था कि आधार कार्ड के जरिये टेलीकॉम सब्सक्राइबर्स (ग्राहकों) को दोबारा सत्यापन किया जाए ताकि ऐसे लोगों का कनेक्शन बंद किया जा सके जिन्होंने गलत या धोखेबाजी से सिम हासिल किए हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने बीते 6 फरवरी को यह आदेश दिया था और इसे पूरा करने के लिए 6 फरवरी 2018 तक का वक्त दिया था.

कुछ वर्ष पहले फोन कंपनियों ने भी KYC (Know your customer) के जरिये इसी तरह की प्रक्रिया अपनाई थी जब सरकार ने सुरक्षा बढ़ाने के साथ ही अपराधियों-आतंकियों पर नकेल कसने के लिए टेलीकॉम कंपनियों से अपने ग्राहकों के पहचान और पते के दस्तावेज दोबारा जांचने के लिए कहा था.

 

हालांकि इस नए आदेश का एक दूसरा मतलब यह भी निकलता है कि जिन लोगों के पास आधार कार्ड है केवल उन्हें ही फोन कनेक्शन मिल सकेगा. हालांकि निजता की वकालत करने वालों ने पहचान स्थापित करने और तमाम स्थानों पर आधार को अनिवार्य बनाने के इस अभ्यास को लेकर अपनी चिंता जाहिर की है.

उद्योग के संगठन के मुताबिक यह एक बहुत भारी कार्य है और इसमें काफी रकम लगेगी. सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (COAI) के महानिदेशक राजन मैथ्यूज कहते हैं, "वास्तव में यह उद्योग के लिए बहुत बड़ी चुनौती है क्योंकि इसमें पूंजी की जरूरत होगी." बता दें कि COAI एयरटेल, वोडाफोन, आइडिया और जियो जैसे टेलीकॉम ऑपरेटर्स का प्रतिनिधित्व करती है.

उन्होंने आगे कहा, "इस प्रक्रिया को स्थापित करने, लोगों को प्रशिक्षित करने और पहचान डिवाइसों को लाने के लिए कम से कम 1,000 रुपये की जरूरत होगी."

आधार के जरिये पुर्न-सत्यापन के लिए टेलीकॉम ऑपरेटर्स को यह तय करने के बाद कि ग्राहक के पास वाकई सिम कार्ड मौजूद है, वेरिफिकेशन कोड के साथ एक SMS भेजना होगा,

केवल इस प्रक्रिया के बाद ही ऑपरेटर e-KYC के लिए आगे जा सकते हैं. ऑपरेटर को इसके 24 घंटे बाद री-वेरिफिकेशन के लिए सब्सक्राइबर के नंबर से एक SMS के जरिये कंफर्मेशन जरूरी होगा.

विशेषज्ञों की मानें तो निश्चित रूप से इस प्रक्रिया के तमाम फायदे होंगे जैसे, धोखेबाज, अपराधी, आतंकी आदि के लिए मोबाइल कनेक्शन रखना मुश्किल हो जाएगा, हर व्यक्ति पर नजर रखना आसान हो जाएगा, सुरक्षा बढ़ जाएगी आदि. लेकिन इसके कुछ नुकसान भी होंगे जिनमें ऐसे मोबाइल यूजर्स जिनके पास अभी आधार कार्ड नहीं है, वे फोन का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे.

First published: 25 March 2017, 15:54 IST
 
अमित कुमार बाजपेयी @amit_bajpai2000

पत्रकारिता में एक दशक से ज्यादा का अनुभव. ऑनलाइन और ऑफलाइन कारोबार, गैज़ेट वर्ल्ड, डिजिटल टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, एजुकेशन पर पैनी नज़र रखते हैं. ग्रेटर नोएडा में हुई फार्मूला वन रेसिंग को लगातार दो साल कवर किया. एक्सपो मार्ट की शुरुआत से लेकर वहां होने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों-संगोष्ठियों की रिपोर्टिंग.

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