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हवन और ब्रिटिश चिकित्सक भी मुलायम के सपनों को साकार नहीं कर पा रहा

अतुल चंद्रा | Updated on: 6 June 2016, 23:40 IST
(कैच)

लंबे समय से मुलायम सिंह यादव की योजना इटावा में लायन सफारी बनाने की रही है लेकिन गुरुवार की सुबह एक अन्य शेर कुबेर की मौत के बाद अब इस योजना पर ग्रहण लग सकता है.

कुबेर कैनाइन डिस्टेंपर नाम की बीमारी से मरा है. इस बीमारी की वजह से पहले भी शेरों की मौत हो चुकी है. कुत्तों से फैलने वाली इस बीमारी की वजह से सफारी में कुत्तों का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया है.

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कुबेर की मौत के बाद इटावा सफारी में फिलहाल 7 शेर ही बचे हुए हैं. इनमें से चार शेरनी और तीन शेर हैं. 

इससे पहले गुजरात से लाई गई शेरनी तपस्या की भी बीमारी से मौत हो चुकी है. शेरों की इन असमय मौतों से लायन सफारी की योजना को बड़ा झटका लगा है. 

नौवीं मौत

कुबेर इटावा लॉयन सफारी का नौंवा शेर हैै जो जानलेवा कैनाइन डिस्टेंपर की बीमारी का शिकार हुआ है.

सरकार और वन्य जीव अधिकारियों की जबरदस्त कोशिशों के बाद भी कुबेर को नहीं बचाया जा सका. कैनाइन डिस्टेंपर पैरामिक्सोवायरस फैमिली का वायरस है.

वायरस के संक्रमण की वजह से चेेचक और ब्रोंकाइटिस जैसी बीमारियां हो जाती हैं. यह कुत्तों में तेजी से फैलने वाली बीमारी है.

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शेर के मौत की पुष्टि करते हुए सफारी के निदेशक संजय श्रीवास्तव ने बताया कि शेर के अवशेष को आईवीआरआई बरेली में जांच के लिए भेज दिया गया है.

श्रीवास्तव ने बताया कि बाकी बचे शेरों को बीमारी से बचाने के लिए पर्याप्त सुरक्षा के इंतजाम किए जा रहे हैं.

सफारी निदेशक की तरफ से जारी प्रेस नोट में कहा गया है, 'बेहद दुख के साथ यह बताया जा रहा है कि इटावा सफारी पार्क में कुबेर की मौत सुबह आठ बजकर दस मिनट पर हो गई. कुबेर 16 अप्रैल से बीमार था और आईवीआरआई बरेली, पंडित दीनदयाल उपाध्याय यूनिवर्सिटी एंड काऊ रिसर्च इंस्टीट्यूशन मथुरा के विशेषज्ञों की टीम की देखरेख में उसका इलाज चल रहा था. आईवीआरआई बरेली के विशेषज्ञों ने बताया कि कुबेर कैनाइन डिस्टेंपर नाम की बीमारी से पीड़ित था और उसका इसी के मुताबिक इलाज चल रहा था. लेकिन बेहतरीन इलाज के बाद भी कुबेर को नहीं बचाया जा सका. अन्य शेरों में संक्रमण रोकने के लिए कुबेर के अवशेष को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है.'

सरकार के फैसलों पर सवाल

सफारी में एक के बाद एक शेरों की मौत के बाद सरकार के फैसले को लेकर सवाल उठने लगे हैं. जब मुलायम सिंह यादव ने पहली बार लायन सफारी के बारे में सोचा था तब इस परियोजना की लागत 5 करोड़ रुपये बताई गई थी.

2013 में इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू हुआ जो 2015 में पूरा हुआ. इस दौरान परियोजना पर कुल खर्च 53 करोड़ रुपये का खर्च आया. इसके अलावा सफारी की देख रेख के लिए 100 करोड़ रुपये की पूंजी रखी गई. सरकार हर महीने शेरों के प्रजनन पर एक लाख रुपये का खर्च करती है.

कुबेर और तपस्या के पहले विष्णु और लक्ष्मी नामक शेरों की मौत हो चुकी थी.

शुरुआत में इस सफारी में आठ शेर थे लेकिन अक्टूबर 2014 के बाद इनका मरना शुरू हो गया. बीमारी की वजह से उस साल एक शेर, दो शेरनी और दो बच्चे मर गए.

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जनवरी 2016 में जब गुजरात से लाई गई शेरनी तपस्या कुछ ही दिनों के भीतर मरी तो क्रोधित मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने तत्काल मुख्य वन संरक्षक एसके उपाध्याय को हटाते हुए तत्कालीन प्रिंसिपल सेक्रेटरी वीएन गर्ग की अध्यक्षता में जांच कमेटी का गठन कर दिया. उपाध्याय के खिलाफ आरोप यह था कि उन्होंने तपस्या की बीमारी को गंभीरता से नहीं लिया.

तपस्या के पहले विष्णु और लक्ष्मी नामक शेरों की मौत हो चुकी थी. राज्य सरकार ने सफारी की देख-रेख के लिए ब्रिटेन के मशहूर पशु चिकित्सक डॉ जोनाथन क्रैकनेल की सेवा ली है. वहीं शेरों को बचाने के लिए कुछ स्थानीय लोगों ने हवन करना भी शुरू कर दिया है. बावजूद इसके शेरों पर संकट घटता नहीं दिखता.

First published: 6 June 2016, 23:40 IST
 
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