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कुलदीप मोरान के अपहरण से असम में फिर ताजा हुए विद्रोह के घाव

सादिक़ नक़वी | Updated on: 7 February 2017, 8:20 IST

पूर्वी असम में भारतीय जनता पार्टी से जुड़े तिनसुकिया के एक किसान के बेटे कुलदीप मोरान के अपहरण की घटना दुखद है. दूसरी ओर हाल ही में क्षेत्र में हुए कुछ छिटपुट बम विस्फोटों को आतंकी संगठनों द्वारा स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर किए जाने वाले आम हमलों के रूप में देखा गया. अपहरण की घटनाएं कुछ लोगों को अतीत की भयावह तस्वीर की याद दिला सकती है. बम हमले कोई नई बात नहीं है.

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, ‘बम हमले कोई नई बात नहीं है. उल्फा उग्रवादी हर साल स्वतंत्रता दिवस पर इस क्षेत्र को निशाना बनाते हैं.’

माना जा रहा है मोरान के अपहरण के पीछे परेश बरूआ की अगुवाई वाले वार्ता विरोधी गुट उल्फा-आई का हाथ है. मोरान का स्वयं का अतीत संदिग्ध रहा है.

अचरज है कि अपहर्ताओं ने एक वीडियो जारी किया है, जिसमें मोरान को पांच अपहर्ताओं के साथ दिखाया गया है, जिन्होंने मास्क पहने हैं और उनके हाथ में हथियार हैं. वह अपने माता-पिता से याचना कर रहा है. 

असम में बीजेपी नेता के बेटे का अपहरण, उल्फा ने मांगी एक करोड़ की फिरौती

सदिया विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक बोलेन चेतिया और मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल से कुलदीप मोरान को अपहर्ताओं से छुड़ाने के लिए एक करोड़ रूपए की फिरौती मांगी गई है.

उसके पास इतना पैसा नहीं है कि अपहर्ताओं को फिरौती की रकम दे सकें

कुलदीप के पिता रत्नेश्वर मोरान तिनसुकिया जिला परिषद के उपाध्यक्ष हैं और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, उसके पास इतना पैसा नहीं है कि अपहर्ताओं को फिरौती की रकम दे सकें. 

वीडियो में कुलदीप अपने पिता से यह कहता दिखाई दे रहा है कि वे पैसों का इंतजाम चेतिया से कर लें. इससे संदेह होता है कि यह अपहरण दिखावे के लिए किया गया है. माना जाता है रत्नेश्वर मोरान और उनका बेटा चेतिया के काफी करीब हैं. इस बीच, मुख्यमंत्री सोनोवाल ने अपहर्ताओं से अपील की है कि वे मोरान को छोड़ दें.

स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मोरान को गत एक अगस्त को अरुणाचल प्रदेश से गिरफ्तार किया गया था. भारत-म्यांमार सीमा पर स्थित चांगलंग जिले के नाखुंग से उसका अपहरण किया गया था. कुछ रिपोर्टों के अनुसार, इस संबंध में 8 अगस्त को मामला दर्ज किया गया, जो एक और अजीब बात है.

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स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मोरान नवम्बर 2015 में अवैध उगाही के मामले में गिरफ्तार हो चुका है. तिनसुकिया पुलिस अधीक्षक मुग्धा ज्योति महंत ने बताया कि वह उल्फा के नाम पर लोगों से पैसा वसूल रहा था. 

इसलिए वह ढाई महीने जेल में बिता कर आया. उन्होंने यह भी बताया कि मोरान के मामा भास्कर बोरा उल्फा के शीर्ष कमाण्डर हैं. हालांकि उन्होंने कहा कि नवम्बर में जिस वसूली के कारण मोरान को जेल भेजा गया था, वह बोरा के इशारे पर थी या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है.

जब से इन संगठनों को पैसा देना बंद किया, ये आर्थिक संकट में चल रहे हैं, इसीलिए वसूली का रास्ता अख्तियार कर रहे

हाल के दिनों में तिनसुकिया में अपहरण का यह अकेला मामला नहीं है. पुलिस अधिकारी के मुताबिक जनवरी से लेकर अब तक दस अपहरण हो चुके हैं. उन्होंने कहा, 'जनता ने उल्फा जैसे आतंकी गुटों को ‘कर’ देने से इनकार कर दिया है. उन्होंने जब से इन संगठनों को पैसा देना बंद किया, ये आर्थिक संकट में चल रहे हैं, इसीलिए वसूली का रास्ता अख्तियार कर रहे हैं.'

उन्होंने बताया उल्फा-आई, एनएससीएन-के और चार अन्य गुटों ने मिलकर यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ वेस्टर्न साउथ ईस्ट एशिया नामक संगठन बनाया है. सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार इनकी इस क्षेत्र में दमदार उपस्थिति मानी जा सकती है, क्योंकि उनके लिए यहां से म्यांमार भागना आसान था,जहां उनके कैम्प लगे हुए थे.

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इस बीच, महंत ने दावा किया कि स्थानीय पुलिस ने दस अपहरण के मामलों में लिप्त अपहर्ताओं को मार गिराया. केवल दो उग्रवादी दृष्टि राजखोवा और बरूआ का साथी राभा पुलिस की पकड़ से अभी दूर है. माना जा रहा है कि वह बांग्लादेश में छिपा हुआ है और इस गुट का सहायक प्रचार सचिव अरूणोदय दहोतिया अभी पुलिस की गिरफ्त से दूर है.

स्थानीय पुलिस का कहना है कि मोरान को निशाना बनाने से उल्फा के शीर्ष नेतृत्व में दरार पैदा हो गई है. यह बताते हुए कि उल्फा के कई पदाधिकारी मोरान गुट से हैं और गुट के वित्त सचिव जिबॉन मोरान सहित कई लोग जो म्यांमार के बाहर से ही कार्य करते हैं, इन अपहरणों को लेकर नाराज हैं.

First published: 25 August 2016, 7:49 IST
 
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