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शहीद DSP अमन ठाकुर दो सरकारी नौकरी छोड़ देश के लिए हुए कुर्बान, बेटे ने कहा था- पापा जल्दी आना, लेकिन..

कैच ब्यूरो | Updated on: 25 February 2019, 16:53 IST

अमन ठाकुर, ऐसा नाम जिससे 24 फरवरी 2019 तक कोई वाकिफ नहीं था. लेकिन अब इस नाम की हर जगह चर्चा है. लोग उनकी देशभक्ति की मिसाल दे रहे हैं. सिर्फ देश के लिए ही नहीं अपने दोस्तों के लिए भी उन्होंने अपनी जान कुर्बान कर दी. जम्मू कश्मीर पुलिस के होनहार युवा अधिकारी डीएसपी अमन ठाकुर रविवार (24 फरवरी) को कुलगाम मुठभेड़ के दौरान साथियों की जान बचाते शहीद हो गए.

जम्मू कश्मीर पुलिस के डीजीपी दिलबाग सिंह ने उनकी बहादुरी को सराहते हुए बताया कि मुठभेड़ में जब सेना के मेजर जख्मी होकर गिर पड़े थे तो आतंकियों की तरफ से लगातार गोलीबारी हो रही थी. इसके बाद डीएसपी अमन ठाकुर अपनी जान की परवाह किए बगैर मेजर और अपने साथियों को वहां से निकालने के लिए खुद आगे गए.

अमन ठाकुर ने ने आतंकियों के गोलियों की बौछार की परवाह नहीं की. घायल सुरक्षाकर्मियों को वहां से उन्होंने निकाला और खुद जख्मी हो गए और बाद में शहादत को प्राप्त हुए. डीजीपी ने बताया कि वह एक सही व सच्चे पुलिसकर्मी थे. उन्होंने रियासत में अमन के लिए अपनी शहादत दी है. 

उन्होंने बताया कि अमन ठाकुर ने जब होश संभाला तो अपने क्षेत्र में आतंकवाद की पीड़ा को साफ महसूस किया. उन्होंने देखा कि अंधेरा होने के बाद कोई घर से बाहर नहीं निकलता, यहां तक कि दिन के उजाले में भी लोग डरे रहते हैं और सहमे-सहमें से रहते हैं. जैसे-जैसे वह बड़े होते गए उनका इस डर के माहौल में दम घुटने लगा.

इसके बाद उन्होंने इस डर के माहौल को खत्म करने का पक्का इरादा कर लिया. वह कहते थे, "घर वालों ने मेरा नाम अमन जरूर रखा है, लेकिन मैं सिर्फ आम लोगों के लिए अमन हूं. अपने देश के दुश्मनों के लिए मैं अमन नहीं काल हूं. बस, मौका मिलना चाहिए, फिर बताऊंगा कि अमन कैसे अमन बहाल करेगा. आतंकवाद को नष्ट करके ही अमन बहाल होगा."

देश की सेवा के लिए छोड़ दी थी दो-दो सरकारी नौकरी

40 साल के अमन ठाकुर को देश के लिए मर-मिटने और पुलिस में जाने की इतनी चाहत थी कि उन्होंने इसके लिए दो-दो सरकारी नौकरी छोड़ दी थी. वर्दी की चाहत में ही वह इस विभाग में शामिल हुए थे. अमन ठाकुर को पहली नौकरी समाज कल्याण विभाग में मिली थी. इसे उन्होंने छोड़ दिया था.

इसके बाद वह एक सरकारी कॉलेज में लेक्चरर के पद पर नियुक्त हुए थे. उन्होंने जंतु विज्ञान में स्रातकोत्तर की डिग्री हासिल की हुई थी. पुलिस विभाग में ही उनके एक करीबी दोस्त ने बताया कि वह हमेशा से ही पुलिस बल में शामिल होना चाहते थे और उन्हें वर्दी पहनने का जुनून सवार था. डोडा क्षेत्र में गोगला जिले के रहने वाले अमन साल 2011 बैच के जम्मू कश्मीर पुलिस सेवा के अधिकारी थे. 

बेटे से करके गए थे जल्द लौटने का वादा

अमन ठाकुर अपने तीन भाइयों में सबसे छोटे थे. उनके एक भाई शिक्षा में विभाग में लेक्चरर हैं और दूसरे राज्य पुलिस में हेड कॉन्स्टेबल है. वह भी इन दिनों कश्मीर घाटी में ही तैनात हैं. अब उनके परिवार में बुजुर्ग माता-पिता और पत्नी सरला देवी तथा छह साल के बेटे आर्य हैं. ड्यूटी जाने से पहले अमन ठाकुर अपने छह वर्षीय बेटे से जल्द घर लौटने का वादा कर गए थे, लेकिन अब उनका बेटा उनसे कभी मिल नहीं पाएगा.

अमन ठाकुर हाली ही में पुलिस पदक एवं प्रशंसा पुरस्कार से सम्मानित किये गये थे. आतंकवाद विरोधी अभियानों में उनके साहस के लिये उन्हें शेर-ए-कश्मीर वीरता पदक से सम्मानित किया गया था. जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने उनकी शहादत पर दुख प्रकट किया है. 

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First published: 25 February 2019, 12:10 IST
 
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