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मोदी आरसीए के चेयरमैन बने रहेंगे और राजस्थान क्रिकेट का संकट बना रहेगा

पत्रिका ब्यूरो | Updated on: 17 December 2015, 18:48 IST

ललित मोदी राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (आरसीए) के अध्यक्ष बने रहेंगे. सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस ज्ञानसुधा मिश्रा (रिटायर्ड) ने बुधवार को आरसीए के अध्यक्ष ललित मोदी व अन्य तीन पदाधिकारियों के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को वापस लेने की आधिकारिक पुष्टि कर दी.

जस्टिस ज्ञानसुधा के मुताबिक उन्होंने सभी पक्षों को सुना. उन्होंने बताया कि हमारी कोशिश मामले का तार्किक हल निकालने की थी. अविश्वास प्रस्ताव पारित करवाने के लिए बहुमत की ज़रूरत थी जो उनके पास नही था. 

अविश्वास प्रस्ताव वापस लेने के बाद अध्यक्ष मोदी के अलावा उपाध्यक्ष महमूद आब्दी, सचिव सोमेंद्र तिवारी और कोषाध्यक्ष पवन गोयल के अपने पदों पर बने रहने का रास्ता साफ हो गया है. पूर्व न्यायधीश मिश्रा ने उम्मीद जतायी कि आरसीए कार्यालय के ताले दो-तीन दिन में खुल जाने चाहिए.

Vasundhara Raje Lalit Modi

उन्होंंने बताया कि फैसले की रिपोर्ट वे सौंप देंगी. ताले खोलने का अंतिम फैसला कोर्ट ही करेगा. इस बीच आरसीए के उपाध्यक्ष अमीन पठान ने कहा की हमने फैसला काफी सोच समझकर क्रिकेट के हित में लिया है. सचिव सोमेंद्र तिवारी भी उनकी बात से सहमत थे. उन्होंंने कहा की अब अगला लक्ष्य राज्य क्रिकेट संघ को बीसीसीआई से दोबारा मान्यता दिलवाना है.

राजस्थान को चुकानी होगी कीमत

ललित मोदी के फिर आरसीए के अध्यक्ष पद पर काबिज होने की कीमत राजस्थान क्रिकेट को चुकानी पड़ सकती है. ललित मोदी के भारत छोड़ने और आईपीएल में उनके कथित भ्रष्टाचार के चलते भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने आरसीए को निलंबित कर रखा है. आशंका है कि राजस्थान को वनडे और आईपीएल मैचों की मेजबानी से वंचित तो रहना ही पड़ेगा, साथ ही राजस्थान को मिलने वाली करोड़ो रुपये की अनुदान राशि भी बंद रहेगी.

बीसीसीआई से मिलने वाली करीब 35 से 40 करोड़ रुपये की वार्षिक अनुदान राशि बंद होने का विपरीत असर जिलों और छोटे केंद्रों पर क्रिकेट के विकास पर पड़ेगा. क्रिकेट सुविधाओं के रखरखाव में भी परेशानी आएंगी. फिलहाल राजस्थान का क्रिकेट सिर्फ गुलाबी नगर तक ही सीमित रह गया है.

खिलाड़ियों को उठाना पड़ेगा खमियाजा

करीब 14 माह से आरसीए में चले सत्ता संघर्ष का खामियाजा खिलाड़ियों को उठाना पड़ा. मोदी और अमीन पठान गुट में हुए विवाद के बाद राजस्थान में क्रिकेट गतिविधियां पूरी तरह से ठप पड़ गई हैं. जिला और विश्वविद्यालय स्तर की क्रिकेट प्रतियोगिताएं ठप पड़ गई हैं.

यहां तक की राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए दो बार की राजस्थान रणजी टीम के कुछ सीनियर खिलाड़ियों को न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा. न्यायालय ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की सहमति से एक समिति गठित की जो आज तक राजस्थान में टीमों का चयन करने के साथ प्रतियोगिताएं आयोजित करवा रही है.

हमेशा दिखा सरकारी दखल

आरसीए में हमेशा सरकारी दखल दिखाई दिया. मोदी को आरसीए में काबिज कराने के लिए 2005 में खेल कानून लाया गया. खेल संघों पर शिकंजा कसने के लिए लाए गए खेल कानून का सबसे ज्यादा फायदा आरसीए को ही मिला. आरसीए में व्यक्तिगत सदस्यों का मताधिकार समाप्त किया गया और जिला संघों के सचिवों के बहुमत से मोदी पहली बार अध्यक्ष निर्वाचित हुए.

मोदी ने चार साल का कार्यकाल पूरा किया. कांग्रेस का कार्यकाल आते ही मोदी की खिलाफत शुरू हो गई और संजय दीक्षित की अध्यक्षता वाली आरसीए सिर्फ नौ माह बाद ही विवाद होने कारण भंग कर दी गई. आरसीए में तदर्थ समिति गठित की गई और जब चुनाव हुए तो कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सीपी जोशी ने अध्यक्ष पद पर दावेदारी पेश कर दी.

जिला सचिवों ने जोशी का दामन थामा, लेकिन 2013 में भाजपा की लहर देखकर जिला सचिवों ने मोदी खेमे का रुख किया. हालात ऐसे बने की जोशी अध्यक्ष पद की दावेदारी से हट गए. मोदी के अध्यक्ष बनने के बाद पठान गुट ने बगावत का झंडा तो उठाया, लेकिन सरकारी दखल के चलते उन्हे बैकफुट पर जाना पड़ा.

First published: 17 December 2015, 18:48 IST
 
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