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नीतीश को समर्थन देकर लालू ने साधे हैं एक तीर से तीन निशाने

चारू कार्तिकेय | Updated on: 21 April 2016, 20:11 IST

आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अगले आम चुनाव में पीएम उम्मीदवार बनाए जाने का समर्थन किया है. राजनीतिक जानकार इसे हाल-फिलहाल का सबसे बड़ा राजनीतिक अचरज मान रहे हैं.

पिछले तीन दिनों में लालू प्रसाद और उनके बेटे बिहार के उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने नीतीश को राष्ट्रीय स्तर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ उतारे जाने के बारे में सकारात्मक बयान दिए.

नीतीश कुमार हाल ही में जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने हैं. अध्यक्ष बनने के बाद बिहार के सीएम ने देश में एक गैर-बीजेपी-आरएसएस राष्ट्रीय गठबंधन बनाने की जरूरत की बात कही.

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नीतीश के बयान को आगामी आम चुनाव में पीएम पद का उम्मीदवार बनने की महत्वाकांक्षा से जोड़ कर देखा जा रहा है. हालांकि नीतीश ने अभी तक इसके बारे में खुलकर कुछ नहीं कहा है. उन्हीं की तर्ज पर लालू यादव ने भी इशारों में ही उन्हें समर्थन दिया है.

बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने गैर-बीजेपी राष्ट्रीय गठबंधन बनाने का आह्वान किया है

19 अप्रैल को पत्रकारों से बात करते हुए लालू ने नीतीश के गैर-बीजेपी राष्ट्रीय गठबंधन को समर्थन दिया. लालू ने कहा कि नीतीश बिहारी हैं और उनके छोटे भाई हैं. इसलिए ऐसा कोई गठबंधन बनता है और नीतीश उसके नेता चुने जाते हैं तो उन्हें ख़ुशी होगी.

तेजस्वी यादव ने अपने पिता की बात दोहराते हुए नीतीश के आरएसएस-मुक्त भारत के आह्वान का समर्थन किया. अगले ही दिन लालू ने कहा कि जब से नीतीश जेडीयू के अध्यक्ष बने हैं सभी पार्टियां नर्वस हो गयी हैं और उन्हें नीतीश की लोकप्रियता पच नहीं रही है.

लालू ने कहा कि "नीतीश का कद बढ़ा है" और वो राष्ट्रीय मंच पर जाने के लिए तैयार हैं, इसलिए सभी राजनीतिक पार्टियां डरी हुई हैं.

तेजस्वी ने नीतीश को 'पीएम मैटेरियल' बताया. उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री ईमानदार हैं और अपने दायित्वों के प्रति समर्पित हैं फिर वो प्रधानमंत्री क्यों नहीं बन सकते?"

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अभी तक किसी अन्य पार्टी ने खुलकर नीतीश के प्रस्ताव का समर्थन नहीं किया है. कांग्रेस ने ते छिपे शब्दों में जेडीयू को याद दिलाया कि वो एक क्षेत्रीय पार्टी है. बीजेडी ने नीतीश को सलाह दी है कि वो ऐसे गठबंधन के लिए सभी दलों से संपर्क करें.

कुछ दिनों पहले ही कैच से बातचीत में आरजेडी के प्रवक्ता मनोझ झा ने कहा था कि गैर-बीजेपी-आरएसएस गठबंधन की मांग सबसे पहले लालू प्रसाद ने ही उठायी थी. हालांकि उन्होंने ऐसे किसी गठबंधन के नीतीश के नेतृत्व करने पर सकारात्मक टिप्पणी नहीं की थी.

फिर लालू ने अचानक रुख क्यों बदल लिया? राजनीतिक जानकारों के अनुसार इसके पीछे तीन मुख्य कारण हैं.

1. निजी होड़ का न होना


लालू को अदालत ने चारा घोटाले में दोषी करार दिया है. इसलिए वो 2024 तक चुनाव नहीं लड़ सकते. ऐसे में नीतीश से उनकी कोई निजी होड़ नहीं है. कुछ विश्लेषकों का ये भी मानना है कि दूसरे दलों में लालू की वैसी स्वीकार्यता नहीं है जैसी नीतीश की है. ये बात नीतीश के हित में जाती है.

2. बेटों का राजनीतिक करियर


अपने दोनों बेटों के राजनीतिक करियर के सफल आगाज के बाद लालू चाहेंगे कि उनका राजनीतिक कद बढ़ता रहे. अगर नीतीश राष्ट्रीय राजनीति में जाते हैं तो लालू के बेटे तेजस्वी के बिहार के सीएम बनने की राह प्रशस्त हो जाएगी. ऐसे में उनके दूसरे बेटे तेज प्रताप यादव का भी प्रमोशन हो सकता है.

3. बेटी या बीवी की राज्य सभा सीट


लालू अपनी बेटी मीसा भारती को भी राजनीति में उतारना चाहते हैं. खबरों के अनुसार लालू मीसा या अपनी पत्नी राबड़ी देवी को राज्य सभा भेज सकते हैं. इसके लिए उन्हें जेडीयू के समर्थन की जरूरत पड़ेगी.

राज्य की कुल पांच राज्य सभा सीटों में से आरजेडी-जेडीयू-कांग्रेस गठबंधन चार सीटें जीत सकता है. कांग्रेस इसमें से एक सीट पर जरूरत दावा ठोकेगी. वहीं जेडीयू पार्टी के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव और पार्टी प्रवक्ता केसी त्यागी को राज्य सभा भेजना चाहेगी. ऐसे में आरजेडी को एक सीट से संतोष करना पड़ सकता है.

राष्ट्रीय राजनीति में नीतीश कुमार की महत्वाकांक्षाओं को हवा देकर लालू प्रसाद शायद अपने बेटे-बेटी का भला करना चाहते हैं

चर्चा ये भी है कि जेडीयू और आरएलडी का विलय हो सकता है. ऐसे में आरएलडी प्रमुख अजित सिंह भी राज्य सभा सीट के दावेदार होंगे. ऐसे में लालू को बीवी या बेटी को राज्य सभा भेजने के लिए नीतीश के समर्थन की सख्त जरूरत होगी.

कुछ राजनीतिक जानकार लालू द्वारा नीतीश को दिए गए इस समर्थन को बहुत गंभीरता से नहीं ले रहे. उनका मानना है कि अगले लोक सभा चुनाव में अभी काफी वक्त है. ऐसे में सभी राजनीतिक कई बार करवट बदल सकते हैं.

खुद तेजस्वी यादव ने अगले ही दिन किसी भी संभावित गठबंधन के नेता के रूप में राहुल गांधी की उम्मीदवारी को पूरी खारिज नहीं किया.

ऐसे में जब तक कांग्रेस अपने पत्ते नहीं खोलती नीतीश कुमार की राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाओं को पर लगने मुश्किल है.

First published: 21 April 2016, 20:11 IST
 
चारू कार्तिकेय @CharuKeya

Assistant Editor at Catch, Charu enjoys covering politics and uncovering politicians. Of nine years in journalism, he spent six happily covering Parliament and parliamentarians at Lok Sabha TV and the other three as news anchor at Doordarshan News. A Royal Enfield enthusiast, he dreams of having enough time to roar away towards Ladakh, but for the moment the only miles he's covering are the 20-km stretch between home and work.

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