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राम मंदिर विवाद : SC में हिंदू पक्षकारों की दलील, मामला प्रॉपर्टी विवाद का है, धार्मिक रंग ना दें

कैच ब्यूरो | Updated on: 27 April 2018, 18:38 IST

सुप्रीम कोर्ट ने आज (शुक्रवार) को अयोध्या विवाद मामले की सुनवाई की. इस दौरान सुन्नी वक्फ बोर्ड ने मामले को पांच सदस्यीय संविधान पीठ के पास भेजने की मांग की, जिसका हिंदू पक्षकारों ने विरोध किया.

रामलला विराजमान की तरफ से पेश हुए हरीश साल्वे ने कहा कि मामला प्रॉपर्टी विवाद का है. इसको संविधान पीठ के पास भेजने की कोई जरूरत नहीं है. कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अगली सुनवाई की तारीख 15 मई तय कर दी है.

मीडिया खबरों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में आज सीजेआई दीपक मिश्रा की अगुआई वाली सुप्रीम कोर्ट की 3 जजों की बेंच ने सुनवाई शुरू की. इस दौरान सुन्नी वक्फ बोर्ड की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील राजू रामचंद्रन ने कहा कि यह विवाद एक राष्ट्रीय मुद्दा है. इसको संविधान पीठ के पास भेज दिया जाए.

सुन्नी वक्फ बोर्ड की इस दलील का रामलला विराजमान ने विरोध किया. रामलला विराजमान की तरफ से पेश वकील हरीश साल्वे ने कहा कि बार बार कोर्ट में 1992 की उस घटना का हवाला दिया जाता रहा है. लेकिन देश इससे काफी आगे निकल चुका है.

इस मामले को राजनीतिक और धार्मिक रंग देने की कोशिश की जा रही है. बेहतर होगा कि ऐसी दलीलों को कोर्ट के बाहर छोड़कर आना चाहिए. हरीश साल्वे ने कहा कि कोर्ट मामले की सुनवाई प्रॉपर्टी विवाद की तरह करे.

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में इलाहाबाद हाईकोर्ट के साल 2010 के फैसलों को चुनौती दी गई है. सुप्रीम कोर्ट 13 याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है.

वहीं सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अन्य 32 याचिकाओं को खारिज कर दिया था. इसके साथ ही पिछली सुनावाई में सर्वोच्च अदालत ने इस मामले में दखल याचिका की लिस्टिंग करने से इनकार कर दिया था.

बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 30 सितंबर 2010 को दो-एक के बहुमत से फैसला सुनाते हुए राम जन्मभूमि को तीन बराबर हिस्सों में राम लला विराजमान, निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड मे बांटने का आदेश दिया था. इसको सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है.

First published: 27 April 2018, 18:35 IST
 
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