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'पीने की आजादी' के पक्षधर हसीब द्राबू पर 'शराब प्रतिबंध' के समर्थक पड़े भारी

गौहर गिलानी | Updated on: 29 June 2016, 12:59 IST
QUICK PILL
  • जम्मू-कश्मीर सरकार के राज्य में शराब की बिक्री और व्यापार पर प्रतिबंध लगाए जाने की संभावना को खारिज किए जाने के फैसले की कश्मीर के धर्म गुरुओं, सिविल सोसाएटी, अकादमिक जगत से जुड़े लोगों और मीरवाइज उमर फारुक के नेतृत्व वाली हुर्रियत ने आलोचना की है.
  • जम्मू-कश्मीर विधानसभा में वित्त मंत्री हसीब द्राबू ने कहा था कि राज्य में शराब को प्रतिबंधित किए जाने का फैसला पसंद की आजादी के अधिकार के मुताबिक तय किया जाना चाहिए. वित्त मंत्री का पीने के अधिकार का बयान लोगों को रास नहीं आ रहा है.

जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा राज्य में शराब की बिक्री और व्यापार पर प्रतिबंध लगाए जाने की संभावना को खारिज किए जाने के फैसले की कश्मीर के धर्म गुरुओं, सिविल सोसाएटी, अकादमिक जगत से जुड़े लोगों और आजादी समर्थक हुर्रियत गुट के नेता मीरवाइज उमर फारुक ने आलोचना की है.

जम्मू-कश्मीर विधान परिषद में शून्य काल के दौरान वित्त मंत्री हसीब द्राबू ने बयान दिया था, 'शराब को प्रतिबंधित किए जाने की मांग हो रही है लेकिन मेरा मानना है कि इस मसले को पसंद की आजादी के अधिकार के मुताबिक तय किया जाना चाहिए.'

शराब पर प्रतिबंध लगाए जाने की संभावना को खारिज करते हुए द्राबू ने कहा, 'राज्य की नीति के मुताबिक हम किसी पर अपने फैसले थोप नहीं सकते. लोगों को चुनने का अधिकार है. इस बारे में लोगों को तय करने दीजिए कि वह क्या चाहते हैं.' उन्होंने कहा, 'शाकाहारी, मांसहार को प्रतिबंधित नहीं कर सकता.'

वित्त मंत्री का पीने के अधिकार का बयान लोगों को रास नहीं आ रहा है. मुस्लिम बहुसंख्यक जम्मू-कश्मीर में शराब को समाज में अच्छे नजरिए से नहीं देखा जाता है.

हालांकि श्रीनगर के बाहरी इलाके में लाइसेंसी दुकानों पर शराब की बिक्री होती है. यह इलाका सेना की छावनी बदामी बाग के करीब है. इसके अलावा पर्यटकों के लिए पांच सितारा होटलों में शराब बेची जाती हैं. वहीं जम्मू क्षेत्र में होटल, बार और शराब की दुकानों पर यह बेहद आसानी से मिल जाती है.

हुर्रियत हुई आक्रामक

मीरवाइज उमर फारुक ऑल पार्टीज हुर्रियत कॉन्फ्रेंस (एएचपीसी) के धड़े के नेता हैं. फारुक ने द्राबू के बयान को बेहद 'खराब' बताया. उन्होंने वित्त मंत्री से बयान वापस लेने की मांग करते हुए जम्मू-कश्मीर की जनता से माफी मागने की अपील की.

मीरवाइज ने कैच को बताया, 'आप बहुमत जनसंख्या के धार्मिक रुझान को छोड़ दीजिए. हम सभी जातने हैं कि शराब सेहत के लिए ठीक नहीं है. यह हर लिहाज से हमारे समाज के लिए ठीक नहीं है.'

उन्होंने कहा, 'अगर शराब को बिहार और गुजरात जैसे हिंदू बहुमत वाले राज्यों में प्रतिबंधित किया जा सकता है तो फिर मुस्मिल बहुमत वाले जम्मू-कश्मीर में इसे प्रतिबंधित क्यों नहीं किया जा सकता.'

हुर्रियत के चेयरमैन ने कहा कि यह दुर्भाग्यूपर्ण है कि पीडीपी-बीजेपी गठबंधन की सरकार कश्मीर घाटी में शराब के इस्तेमाल और उसकी बिक्री को संरक्षण दे रही है जो सूफी और संतों की भूमि है.

उन्होंने कहा कि कई सामाजिक और धार्मिक समूह और विभिन्न समुदायों के नेता शराब पर प्रतिबंध लगाने के लिए सरकार पर दबाव बनाएंगे. उन्होंने ट्वीटर पर लिखा, 'मैं मुसिलम बहुल जम्मू-कश्मीर में शराब पर प्रतिबंध नहीं लगाए जाने के सरकार के फैसले की आलोचना करता हूं. अगर सरकार के लिए यह विकल्पों की आजादी का मुद्दा है तो फिर बीफ पर प्रतिबंध क्यों लगाया गया?'

जबरदस्त समर्थन

ओकलाहोमा यूनिवर्सिटी में पढ़ाने वाली कश्मीर की प्रोफेसर नाइला अली खान ने भी शराब पर प्रतिबंध की मांग का समर्थन किया है.

शेख अब्दुल्ला की पोती नाइला ने कैच को बताया, 'राज्य सरकार के लिए जम्मू-कश्मीर की सामाजिक और सांस्कृतिक एवं धार्मिक भावनाओं को समझना जरूरी है. शराब पर प्रतिबंध से किसी को भी नुकसान नहीं होगा. यह एक छोटा राज्य है और ऐसा करने में कोई बुराई नहीं है.'

खान ने कहा कि जम्मू-कश्मीर राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील है क्योंकि 'दमन और सेना की वजह से कश्मीर के सामजिक ढांचे को बेहद नुकसान हुआ है. इसलिए अब वक्त कुछ अच्छा करने का है.'

उनके मुताबिक जम्मू के कई हिंदू भी इस प्रतिबंध का समर्थन करेंगे क्योंकि इससे समाज की सेहत को नुकसान होता है. जम्मू के लेखक और राजनीतिक विश्लेषक जफर चौधरी का मानना है कि द्राबू का बयान महज राजनीतिक है.

चौधरी ने बिहार, गुजरात और हरियाणा की मिसाल देते हुए कहा कि शराब पर प्रतिबंध लगाने के फैसले का धर्म से कोई लेना देना नहीं है, बल्कि इससे सामाजिक नुकसान ज्यादा होता है. 1970 की शुरुआत में पाकिस्तान समर्थक सैयद अली शाह गिलानी ने विधानसभा में शराब पर प्रतिबंध किए जाने की मांग उठाई थी. गिलानी उस वक्त जमात-ए-इस्लामी के विधायक थे.

कश्मीर केंद्रीय विश्वविद्यालय में लीगल स्टडीज के प्रमुख डॉ. शेख शौकत हुसैन ने कहा, 'राज्य में शराब पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए क्योंकि इससे समाज को नुकसान होता है.' वहीं सोशल मीडिया पर भी लोगों ने शराब को प्रतिबंधित किए जाने की मुहिम का समर्थन किया.

वहीं सेंटर फॉर रिसर्च एंड डेवलपमेंट पॉलिसी (सीआरडीपी) के डायरेक्टर ने कहा कि शराब या बीफ पर प्रतिबंध लगाने का फैसला जम्मू-कश्मीर की बहुसंस्कृति और बहुधार्मिक ढांचे को ध्यान में रखकर लिया जाना चाहिए. उन्होंने कहा, 'बहुसंख्यक आबादी को निश्चित तौर पर अल्पसंख्यक समुदाय का ध्यान रखना चाहिए. ऐसा अल्पसंख्यक समुदाय को भी ध्यान में रखना चाहिए.'

First published: 29 June 2016, 12:59 IST
 
गौहर गिलानी @catchnews

श्रीनगर स्थित पत्रकार, टिप्पणीकार और राजनीतिक विश्लेषक. पूर्व में डॉयचे वैले, जर्मनी से जुड़े रहे हैं.

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