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कर्ज, वेश्यावृत्ति और राजनीतिः आंध्र प्रदेश में फैलता 'कॉल मनी रैकेट'

ऐश्वर्या ऐरा | Updated on: 21 December 2015, 21:31 IST
QUICK PILL
  • मीडिया में \"कॉल मनी\" रैकेट की खबरें आने के बाद आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने घोटाले की न्यायिक जांच के आदेश दे दिए हैं. कॉल मनी रैकेट हमारी सोच से कहीं ज्यादा गहरा और बड़ा है. ऐसे में तेलुगू देशम पार्टी खुद को इससे कैसे बाहर निकाल सकेगी?
  • पिछले सप्ताह विजयवाड़ा में पुलिस ने एक महिला की शिकायत के बाद \"कॉल मनी रैकेट\" का पर्दाफाश किया था. महिला ने आरोप लगाया था कि कर्ज देने वाले लोगों द्वारा उसका यौन शोषण किया गया है. 

आंध्र प्रदेश का कॉल मनी रैकेट हमारी सोच से कहीं ज्यादा गहरा और बड़ा है. ऐसे में तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) खुद को इससे कैसे बाहर निकाल सकेगी? 

मीडिया में "कॉल मनी" रैकेट की खबरें आने के बाद आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने घोटाले की न्यायिक जांच के आदेश दे दिए हैं.

मुख्यमंत्री ने पीड़ितों से यह भी कहा है कि वे माइक्रो फाइनेंस कंपनियों की आड़ में काम करने वाले चोर-डकैतों का कर्ज न चुकाएं. नायडू ने यह भी वादा किया कि कोई भी दोषी सजा से बच नहीं पाएगा.

कर्ज चुकाने में असमर्थ ग्रामीण महिलाओं के यौन शोषण के मामले का जिक्र करते हुए उन्होंने घोषणा की, "हम भी निर्भया अधिनियम (यौन शोषण के मुद्दे से संबंधित) के तहत मामलों की सुनवाई के लिए विजयवाड़ा में एक विशेष अदालत स्थापित करने जा रहे हैं. मामलों के शीघ्र निपटान और पीड़ितों को जल्द से जल्द न्याय मिले इसके लिए विशेष लोक अभियोजक नियुक्त किए जा रहे हैं."

साहूकारों द्वारा गरीब लोगों से कर्ज पर प्रति माह 20-200 फीसदी तक की दर पर ब्याज वसूला जाता था

पिछले सप्ताह विजयवाड़ा में पुलिस ने एक महिला की शिकायत के बाद "कॉल मनी रैकेट" का पर्दाफाश किया था. महिला ने आरोप लगाया था कि कर्ज देने वाले लोगों द्वारा उसका यौन शोषण किया गया है. 

इसे कॉल मनी क्यों कहते हैं और यह एक घोटाला क्यों है?

जब भी किसी व्यक्ति को एक नगद कर्ज की बहुत जरूरत होती है, तो वह माइक्रो फाइनेंस कंपनी या कर्जदाता को टेलीफोन कॉल करता है. इसके बाद कर्ज देने वाला पहले से ही तैयार दस्तावेज, शपथ पत्र और रकम के साथ उधार मांगने वाले के घर पर पहुंच जाता है. ग्राहक तो केवल दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने होते हैं. यानी एक कॉल पर मनी मिल जाती है.

हालांकि, यहां सबसे ज्यादा चौंकाने वाला मुद्दा बेहद ऊंची ब्याज दरों को लेकर है जो प्रति माह 20-200 फीसदी के बीच होती हैं. उधार लेने वालों को उनकी भूमि, वाहन, घर या कोई दूसरी चीज़ गिरवी रखनी होती थी.

इस रैकेट में अलग क्या है?

राज्य में माइक्रो फाइनेंस का धंधा नया नहीं है. 2011 में संयुक्त आंध्र प्रदेश को बड़े पैमाने पर गैर जिम्मेदाराना कर्ज देने वालों का सामना करना पड़ा. इसके बाद सरकार को एपी माइक्रो फाइनेंस रेगुलेशन एक्ट लागू करने के लिए मजबूर होना पड़ा.

हालांकि, यौन शोषण और वेश्यावृत्ति के जुड़ने से विजयवाड़ा मामले ने इस रैकेट में एक नया अध्याय जोड़ दिया है.

कौन थे निशाने पर?

विजयवाड़ा सिंडिकेट सबसे आसान निशाने चुनते थे. वे ऐसी महिलाओं को कर्ज देने की पेशकश करते थे जिन्हें पैसों की सख्त जरूरत होती थी. इनमें गृहणियां और छात्राएं पूरी तरह से फिट बैठती थीं. जब यह महिलाएं कर्ज का भुगतान करने में असमर्थ होती थीं, सिंडिकेट इस मौके को भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ता था. 

न केवल सिंडिकेट उनकी संपत्ति हड़प लेता था बल्कि उन्हें जबरन खाली चेक और शपथ पत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर कर देता. सिंडिकेट बहुत शातिराना तरीके से कर्ज में दबी महिलाओं का यौन उत्पीड़न करता था.

यौन शोषण और वेश्यावृत्ति के जुड़ने से विजयवाड़ा मामले ने इस रैकेट में एक नया अध्याय जोड़ दिया

साक्षी पोस्ट वेबसाइट का दावा है कि सिंडिकेट के लोग महिला बकाएदारों को ड्रग देकर उनकी आपत्तिजनक स्थिति में फोटो-वीडियो ले लेते थे. इसके बाद यह साहूकार महिलाओं को वेश्यावृत्ति के लिए ब्लैकमेल करते थे.

पीड़ित महिलाओं को चालाकी से ब्लैकमेल करते हुए सिंडिकेट उन्हें अपने आसपड़ोस की अन्य महिलाओं को कर्ज लेने और शिकार बनाने को मजबूर करते थे.

कितना बड़ा है यह मामला?

जांच के बाद एक से बढ़कर एक चौंकाने वाले रहस्योद्घाटन हो रहे हैं. निर्वाचित प्रतिनिधियों के रिश्तेदारों के साथ ही कुछ पुलिसकर्मियों के नाम भी रैकेट से जुड़े पाए गए हैं. इस बात का भी काफी संदेह है कि सिंडिकेट को सत्तारूढ़ टीडीपी का समर्थन प्राप्त था.

सबसे पहले जब यह मामला प्रकाश में आया तब माना जाता था कि यह केवल विजयवाड़ा तक ही यह सीमित है. मामले से जुड़ी एक के बाद एक रोजाना आती जानकारियों ने इस बात को पुख्ता किया कि  यह सिंडिकेट उत्तर में श्रीकाकुलम जिले से लेकर दक्षिण में चित्तूर जिले तक फैला हुआ है. 

जहां पहले केवल संदेह था 500 परिवार ही इस दलदल में फंसे हैं, अब लगता है कि यह आंकड़े हकीकत की तुलना में बहुत ही कम हैं.

रैकेट के भंडाफोड़ के छह दिन बाद ही विजयवाड़ा पुलिस आयुक्त कार्यालय स्थित केंद्रीय शिकायत केंद्र और राज्य भर के पुलिस थानों के बाहर इन सिंडिकेट या कर्ज दाताओं के खिलाफ शिकायत दायर करने के लिए महिलाओं की कतारें लग गईं. अधिकांश महिलाओं ने इस गैंग के सरगना या उनके गुर्गों से छिपने के लिए अपने मुंह और सिर ढंक रखे थे.

कितनी जांच की जा चुकी है?

पिछले कुछ वर्षों में इस रैकेट से संबंधित कम से कम 80 गिरफ्तारियां की गई हैं. गिरफ्तार किए गए लोगों में से गिरोह के कथित सरगना वाई रामचंद्र मूर्ति और ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ आंध्र प्रदेश के डिप्टी इंजीनियर सत्यानंद भी शामिल हैं.

द हिंदू अखबार में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस, वाईएसआर कांग्रेस और टीडीपी से जुड़े कम से कम 38 पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं को भी हिरासत लिया गया है. रिपोर्ट बताती है कि इसमें कांग्रेस के 10, वाईएसआर कांग्रेस के 10, भाकपा के एक और सत्तारूढ़ टीडीपी के आठ पार्टी कार्यकर्ताओं को आकस्मिक छापेमारी के दौरान कॉल मनी ऑर्गनाइजर्स के साथ गिरफ्तार किया गया.

कांग्रेस, वाईएसआर कांग्रेस और टीडीपी से जुड़े 38 कार्यकर्ता-नेता इस घोटाले के संबंध में हिरासत में लिए गए हैं

विजयवाड़ा के पुलिस आयुक्त गौतम सावंग ने द हिंदू को बताया, "हमनें कॉल मनी आयोजकों द्वारा विभिन्न संपत्तियों के गिरवी रखे गए 938 वचनपत्र (शपथपत्र), 192 ब्लैंक चेक, आठ स्टांप पेपर, 25 अकाउंट बुक्स, 310 संपत्ति दस्तावेज, समझौते के कागजात और पंजीकरण दस्तावेज जब्त किए हैं." 

राजनीतिक नतीजे

इस रैकेट के चलते 16 दिसंबर को आंध्र प्रदेश विधानसभा में खलल पड़ गया.

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के सदस्यों और तेदेपा विधायकों के बीच विधानसभा के अंदर ही भिड़ंत हो गई. इस दौरान कुछ विपक्षी नेताओं द्वारा विधानसभा अध्यक्ष के सिवप्रसाद राव पर कागज के गोले भी फेंके गए. इसके बाद वाईएसआरसीपी अध्यक्ष और विधायक जगन मोहन रेड्डी और 58 विपक्षी विधायकों को निलंबित कर दिया गया. उन्होंने इसके विरोध में विधानसभा के मैदान पर प्रदर्शन भी किया.

इस मामले से हर दिन जुड़ते एक नए अध्याय और अब तक जिन राजनीतिक संपर्कों को बेपर्दा किया गया है, को देखकर लगता है कि इस रैकेट का अभी पूरा खुलासा होना बाकी है और वो कैसे होगा ये देखने वाली बात है?

First published: 21 December 2015, 21:31 IST
 
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