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लॉकडाउन: पैदल घर का रास्ता नापने के लिए NH 24 पर दिखे हजारों की संख्या में लोग

कैच ब्यूरो | Updated on: 28 March 2020, 9:20 IST

Lockdown: प्रधानमंत्री द्वारा 24 मार्च को पूरे देश में कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर लॉकडाउन की घोषणा के बाद दिल्ली जैसे बड़े शहरों में मजदूरी करने वाले लोग हजारों किलोमीटर तक अपने गावों पैदल निकल पड़े हैं. शुक्रवार शाम को भी दिल्ली गाजियाबाद बॉर्डर NH 24 पर ऐसा ही नजारा देखने को मिला. जहां हजारों की संख्या में लोग सड़क पर काफिले के साथ पैदल दिखे. दैनिक मजदूरी करने वाले लोगों का कहना है कि अब उनके पास काम नहीं है पैसे ख़त्म हो रहे हैं और मकान मालिक उन्हें बिना किराये के घरों में रहने नहीं देते हैं.

हालांकि कई राज्यों ने अपने प्रवासियों को निकालने के लिए कदम भी उठाये हैं. उत्तराखंड की त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार ने दिल्ली में फंसे लोगों की सहायता के लिए 50 लाख रुपए का फंड जारी किया है. 24 मार्च को रात 8 बजे पीएम की घोषणा के बाद गृह मंत्रालय ने प्रतिबंधों पर दिशा-निर्देश जारी किए और कहा कि राशन की दुकानें जिनमें भोजन, किराने का सामान, फल और सब्जियां, डेयरी और दूध बूथ, मांस और मछली, पशु चारा शामिल हैं, को छूट दी गई है.


समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार दिल्ली और हरियाणा के विभिन्न स्थानों से पैदल चलकर प्रवासी श्रमिक, महिलाएं और बच्चे NH-24 पर लगातार दिख रहे हैं. एक वर्कर आशीष का कहना है "मैं बहादुरगढ़ (हरियाणा) से आ रहा हूं और इटावा (358.7 किमी दूर) जाना है. मेरी कंपनी बंद है, अगर मैं घर न लौटूं तो मेरे पास क्या विकल्प है''. दिल्ली, गुरुग्राम और अन्य स्थानों से पैदल चलने के बाद बड़ी संख्या में प्रवासी श्रमिक लाल कुआ तक पहुंचते हैं और अपने-अपने गृहनगर की बसों की तलाश करते हैं.

परिवहन सेवाओं के उपलब्ध न होने के कारण कारण उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में अपने मूल स्थानों की ओर जाने वाले लोग दिल्ली-यूपी सीमा के पास कालिंदी कुंज क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में दिखाई दिए. WHO का कहना है कि COVID19 के 5 लाख से अधिक पुष्टि मामले और 20,000 से अधिक मौतें सामने आयी हैं. ये दुखद संख्याएं हैं, लेकिन हमें यह भी याद रखना चाहिए कि दुनिया भर में एक सौ से अधिक लोग रिकवर हुए हैं.

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First published: 28 March 2020, 9:12 IST
 
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