Home » इंडिया » Lockheed Martin promises not to sell F-21 fighter jets to other countries if India buys 114 aircraft
 

पसंद आया अमेरिकी सौदा तो भारत में टाटा और लॉकहीड मार्टिन बनाएंगे 114 फाइटर जेट

कैच ब्यूरो | Updated on: 14 May 2019, 13:11 IST

संयुक्त राज्य अमेरिका की एयरोस्पेस कंपनी लॉकहीड मार्टिन ने सोमवार को कहा अगर भारत उन्हें 114 जेट खरीदता है तो वह अपने नए लॉन्च किए गए इन एफ -21 फाइटर जेट को किसी अन्य देश को नहीं बेचेगी. अमेरिकी कंपनी के इस बयान उस होड़ का हिस्सा माना जा रहा है जिसमे दुनिया की कई बड़ी कंपनियां भारत को फाइटर जेट बेचना चाहती है. कंपनी का यह बयान भारत द्वारा 18 बिलियन डॉलर में 114 जेट प्राप्त करने के लिए भारतीय वायु सेना की निविदा के बाद आया है.

हालही में भारत ने फ्रांस के डासाल्ट से 36 राफेल लड़ाकू विमानों का सौदा किया था लेकिन भारत अभी और भी विमान खरीदना चाहता है. भारत को अपने विमान बेचने में जो दिग्गज कंपनियां शामिल हैं उनमे अमेरिकी लॉकहीड मार्टिन, स्वीडन साब और ब्रिटेन की यूरोफाइटर टाइफून शामिल है. लॉकहीड मार्टिन, एमएमआरसीए (मीडियम मल्टी-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) कॉन्ट्रैक्ट - बोइंग (एफ / ए -18), एसएएबी (ग्रिपेन), मिग कॉरपोरेशन (मिओ 35), यूरोफाइटर (टाइफून) और डसॉल्ट (राफेल) जैसी अन्य पांच कंपनियों के साथ इस सौदे को हासिल करने के लिए बोली लगाने की खबरें चर्चा में थी. 

हालही में खबर आयी थी कि भारत यूरोफाइटर टाइफून में दिलचस्पी दिखा सकता है. यह भी कहा जा रहा था कि वायुसेना ने एमएमआरसीए प्रक्रिया में इसे शॉर्टलिस्ट किया है. पीटीआई के अनुसार भारत अगर इस खरीद को मंजूरी देता है तो अमेरिकी कंपनी टाटा समूह के साथ मिलकर एक अत्याधुनिक विनिर्माण सुविधा स्थापित कर सकती है.

हालही में टाटा ने लॉकहीड मार्टिन से समझौता दिया था. हालही में लॉकहीड मार्टिन (LM) ने F-16 को अपने सबसे ज्यादा बिकने वाले और सबसे ज्यादा युद्ध में परीक्षण करने वाले फाइटर के रूप में बाजार में उतारा था. जिसमें अपडेटेड एवियोनिक्स और भारतीय आवश्यकताओं को पूरा करने की क्षमताएँ थीं.

लॉकहीड मार्टिन के अधिकारी ने कहा कि एफ -21 में पारंपरिक बूम-डिलीवर ईंधन भरने की सुविधा है. यह दुनिया का एकमात्र लड़ाकू विमान है, जिसमें यह क्षमता है. साथ ही इसमें आधुनिक कॉकपिट और सूचना को संश्लेषित करने की महत्वपूर्ण क्षमता है. लाल ने कहा ये अद्वितीय क्षमताएं दुनिया के अन्य देशों को नहीं दे रहे हैं.”

First published: 14 May 2019, 13:07 IST
 
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