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Locust Attack: यूपी-एमपी और राजस्थान में टिड्डियों का कहर, 100 की गति से आगे बढ़ रहे टिड्डी दल

कैच ब्यूरो | Updated on: 28 May 2020, 11:12 IST

Locust Attack: इनदिनों पूरा देश कोरोना वायरस (Corona Virus) की मार झेल रहा है, वहीं दूसरी ओर टिड्डियों (Locust) के दलों ने लोगों की मुश्किल बढ़ा दी है. राजस्थान (Rajasthan), मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) और उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के बाद अब दिल्ली-एनसीआर (Delhi NCR) में भी टिड्डियों का खतरा मंडराने लगा है. टिड्डियों पर काबू पाने के लिए पश्चिमी सीमावर्ती राज्यों मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में प्रयास युद्ध स्तर पर शुरू कर जा रहे हैं. जिससे खरीफ सीजन की फसलों को इनके कहर से बचाया जा सके.

टिड्डी दलों (Locust swarm) के भारतीय सीमा में प्रवेश से पहले ही रबी सीजन की फसलों की कटाई लगभग पूरी हो चुकी थी, जिसके चलते इन्हें कोई नुकसान नहीं हुआ. लेकिन अब खरीफ की फसल को टिड्डियों से नुकसान पहुंच रहा है. लोकस्ट वॉर्निंग ऑर्गनाइजेशन (LWO) के अधिकारियों के मुताबिक, उत्तरी राज्यों में सक्रिय टिड्डी दलों का सफाया जल्दी ही कर लिया जाएगा. उन्होंने बताया कि, पाकिस्तान की सीमा में इन टिड्डी दलों ने भारी तबाही मचाई है.


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पाकिस्तान में टिड्डी दलों पर नियंत्रण के लिए कोशिशें तेज कर दी गई है. अधिकारियों का कहना है कि भारतीय सीमा में उनसे बहुत बड़ा खतरा नहीं है. पाकिस्तानी कोशिशों का लाभ भी मिलेगा जिससे इन कीटों पर समय रहते काबू पा लिया जाएगा. वहीं कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून सीजन से पहले और भारी चक्रवात बनने की हालत में टिड्डियों का प्रजनन बहुत तेज हो जाता है. इन टिड्डी दलों के उड़ने की रफ्तार 100 किलोमीटर रोजाना होता है.

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दुनिया के सबसे प्राचीन कीट पतंगों में शुमार टिड्डी दलों ने इस साल अफ्रीकी देशों से चलकर यमन, ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान होते हुए भारत में प्रवेश कर गए. राजस्थान और गुजरात होते हुए अब उनका प्रसार तेजी से अन्य राज्यों की ओर होने लगा है. जानकारी के मुताबिक, पिछले 26 साल में टिड्डी दलों का यह सबसे तेज हमला हुआ है. भारत में टिड्डी दलों के नियंत्रण के लिए पहले से ही मुख्यालय है.

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कृषि मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक, राजस्थान और गुजरात में टिड्डी दलों को कुछ हरी वनस्पतियां नहीं मिलने की दशा में उनका दल तेजी से आगे बढ़ा है. तेज हवाओं से उनके उड़ने की गति भी बढ़ गई है. अब वो महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के जिलों तक दिखने लगे हैं. केंद्रीय व राज्य एजेंसियां इस दिशा में कारगर तरीके से काम कर रही हैं.

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इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च के महानिदेशक डॉ. टी महापात्र ने बताया कि इन टिड्डी दलों के प्रकोप का कोई असर रबी सीजन की गेहूं, दलहन व तिलहन वाली फसलों पर नहीं हुआ है. उनका कहना है कि जून और जुलाई के दौरान मानसून के आने से उनका प्रजनन बहुत बढ़ जाएगाए जो खरीफ की फसलों के लिए बड़ा खतरा है. इसलिए इन्हें मानसून से पहले खत्म करना जरूरी है.

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First published: 28 May 2020, 11:12 IST
 
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