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क्रिकेट में सट्टेबाजी को कानूनी मान्यता मिलेः जस्टिस लोढ़ा समिति

कैच ब्यूरो | Updated on: 4 January 2016, 19:00 IST
QUICK PILL
  • बीसीसीआई में सुधार से संबंधित 159 पन्नों की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट मे सौंपने के बाद पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस आरएम लोढ़ा ने कहा कि इस संबंध में बोर्ड अधिकारियों, क्रिकेटरों और अन्य भागीदारों के साथ 38 बैठकें की गईं.
  • बीसीसीआई में कई बदलावों के साथ ही इसके पदों पर मंत्रियों-नेताओं की नियुक्ति रोकने, उम्र और कार्यकाल निर्धारित करने की भी सलाह समिति ने दी है.

क्रिकेट में फैले भ्रष्टाचार और तमाम विवादों का सामना कर रही बीसीसीआई की कायापलट के लिए गठित जस्टिस लोढ़ा कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय को सौंप दी. इसकी सिफारिश है कि भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए क्रिकेट में सट्टेबाजी को कानूनी मान्यता दी जानी चाहिए. यह काफी चौंकाने वाला सुझाव है. इसके साथ ही बीसीसीआई में कई और अहम बदलाव करने का सुझाव समिति ने दिया है.

पूर्व न्यायमूर्ति आरएम लोढ़ा के नेतृत्व वाली तीन सदस्यीय समिति ने बीसीसीआई में कड़े सुधार करने की सिफारिश की है. इसमें कहा गया है कि प्रत्येक राज्य का प्रतिनिधित्व केवल एक इकाई करेगी जबकि संस्थानिक और शहरी इकाईयों के मतदान अधिकार वापस ले लिए जाएं. वहीं, बोर्ड के प्रशासनिक ढांचे का पुनर्गठन करते हुए सीईओ का पद बनाने, जो शीर्ष परिषद के प्रति जवाबदेह हो, की भी सलाह दी गई है.

सुप्रीम कोर्ट में 159 पन्नों की रिपोर्ट सौंपने के दौरान पत्रकार वार्ता में जस्टिस लोढ़ा ने कहा कि इस संबंध में बोर्ड अधिकारियों, क्रिकेटरों और अन्य भागीदारों के साथ 38 बैठकें की गईं. अब सर्वोच्च न्यायालय को निर्णय लेना है कि बीसीसीआई यह सिफारिशें मानें या नहीं.

क्या हैं समिति की प्रमुख सिफारिशें

  • बोर्ड के ढांचे और संविधान में बदलाव की जरूरत है क्योंकि तमाम ऐसे सदस्य हैं जिन्होंने आज तक कोई टूर्नामेंट नहीं खेला है. कई राज्यों से तो एक से ज्यादा सदस्य हैं. जैसे महाराष्ट्र-गुजरात में तीन-तीन सदस्य हैं. बैठक में अधिकांश ने इसपर सहमति जताई कि बोर्ड में एक राज्य से एक इकाई का प्रतिनिधित्व ही सही विचार होगा.
  • बोर्ड के कामकाज में पारदर्शिता लाने के लिए इसे आरटीआई (सूचना का अधिकार) अधिनियम के अंतर्गत लाया जाए. अब तक बोर्ड इसका विरोध करता आया है. लेकिन यह सार्वजनिक कार्यों से जुड़ी संस्था है और लोगों को इसके बारे में जानकारी पाने का अधिकार है. 
  • बोर्ड के पदाधिकारियों की उम्र और कार्यकाल निर्धारित किए जाने चाहिए. बोर्ड सदस्य अधिकतम तीन कार्यकाल से ज्यादा वक्त तक पद पर न रहें और अध्यक्ष तीन वर्ष के दो कार्यकाल ले सकता है. इन पदों पर काबिज सदस्यों-अधिकारियों को लगातार चुना-नियुक्त किया जा सकता है.
  • समस्त पदाधिकारी मसलन अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव, संयुक्त सचिव और कोषाध्यक्ष की पात्रता का निर्धारण किया जाए. जैसे पदाधिकारी भारतीय हो, 70 वर्ष से ज्यादा आयु का न हो, दिवालिया न हो, मंत्री या सरकारी नौकरी पर न हो और नौ साल के संचयी वक्त तक बोर्ड के किसी पद पर न रहा हो. 
  • एक सीईओ बोर्ड के दैनिक कामकाज को देखे और खिलाड़ियों का संघ बने ताकि बोर्ड के कार्यों में खिलाड़ी भी अपने विचार दे सकें. सीईओ के लिए छह प्रबंधक रखे जाएं और इनकी जवाबदेही सर्वोच्च परिषद के लिए तय हो. इसकी परिषद में नौ सदस्य रखे जाएं जिनमें पांच निर्वाचित, दो खिलाड़ी संघ के प्रतिनिधि और एक महिला हो.  
  • पूर्व गृह सचिव जीके पिल्लई के नेतृत्व में पूर्व क्रिकेटर मोहिंदर अमरनाथ, अनिल कुंबले और पूर्व महिला खिलाड़ी डायना एडुल्जी की एक संचालन समिति खिलाड़ियों के संघ का गठन करे. संघ में प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेलने वाले सभी खिलाड़ियों को शामिल किया जाए. संघ को भी सक्रिय रहते हुए मौजूदा और पूर्व खिलाड़ियों की बात बोर्ड में रखनी चाहिए.
  • बोर्ड चुनाव के लिए निर्वाचन अधिकारी (जो पूर्व चुनाव आयुक्त हो) की नियुक्ति की जाए. अधिकारी का नामांकन चुनावों से न्यूनतम दो हफ्ते पहले हो. साथ ही बोर्ड का लोकपाल भी होना चाहिए. 

आईपीएल के लिए सलाह

  • इसकी मुख्य संचालन संस्था एक संचालन परिषद के नाम वाली होगी. इसके कुल नौ सदस्यों में बीसीसीआई के सचिव, कोषाध्यक्ष इसके पदेन सदस्य होंगे. दो अन्य पूर्ण सदस्यों द्वारा नामित-निर्वाचित, दो फ्रेंचाइजी द्वारा नामित, एक खिलाड़ी संघ का प्रतिनिधि और एक प्रतिनिधि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक से नामित हो.
  • एक व्यक्ति एक ही वक्त बीसीसीआई और राज्य संघ दोनों का पदाधिकारी नहीं हो सकता. संघ का कोई आजीवन सदस्य या नौ साल से अधिक समय तक सदस्य नहीं होना चाहिए. राज्य संघों में सामाजिक और क्रिकेट गतिविधियों को न तो अलग किया जाए और न ही जाली मतदान हो. खातों का लेखा परीक्षण बीसीसीआई करे.

First published: 4 January 2016, 19:00 IST
 
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