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शत्रुघ्न सिन्हा ससंद में रहे 'खामोश', लेकिन सांसद निधि खर्च करने में सबसे आगे

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 April 2019, 8:45 IST

बीजेपी छोड़ चुके पटना साहिब के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने भले ही संसद में हमेशा खामोश नजर आए, लेकिन सांसद निधि खर्च (MPLAD) को करने में वो सभी सांसदों से सबसे आगे रहे.

लोकसभा के रिकॉर्ड के अनुसार, 2014-19 के बीच शत्रुघ्न सिन्हा ने अपनी सांसद निधि का 106 फीसदी फंड इस्तेमाल किया. इतना ही नहीं सिन्हा ने इन पांच सालों में संसद में 67 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज कराई, जबकि इस दौरान लोकसभा में सासंदों की उपस्थिति 81 फीसदी रही. 


लोकसभा के अंदर शत्रुघ्न सिन्हा ने एक भी सवाल पूछते नजर नहीं आए. पर संसद के बाहर अपनी ही पार्टी बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कई बार सवालों के घेर में लिया है.

सांसद को लोकसभा में सवाल पूछने का अधिकार होता है. सांसद का संसदीय क्षेत्रों का जायजा लेकर कार्यों का मूल्यांकन करना उनका दायित्व होता है. साथ ही इलाके में सरकार की ओर से चलाई जाने वाली तमाम योजनाओं पर लाभ और हानी को लेकर सांसद लोकसभा में सवाल खड़े कर सकता है.

लोकसभा में सवाल पूछने और अपने कार्यों के दायित्व को समझना ये दर्शाना है कि सांसद अपने संसदीय क्षेत्र के प्रति कितना जवाबदेही है. सांसद द्वारा जब कोई सवाल लोकसभा में पूछा जाता है या फिर कोई भी चर्चा के दौरान सांसद जो भी बात कहता है, वो लोकसभा की कार्यवाही में दर्ज हो जाती है.

हर एक सांसद को पांच सालों में लोकसभा में 1605 सवाल पूछने का अधिकार होता है. सांसद इस दौरान 32 हजार 351 चर्चाओं में भी हिस्सा ले सकता हैं. इसके साथ ही सांसद 60 प्राइवेट मेंबर बिल भी पेश कर सकते हैं. इन पांच सालों में शत्रुघ्न सिन्हा द्वारा एक भी सवाल नहीं किया गया.

वहीं, लोकसभा में एनसीपी की सुप्रिया सुले ने सबसे ज्यादा सवाल किए. उन्होंने संसद में एक हजार 181 सवाल, समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव ने एक हजार 25 सवाल और कांग्रेस के राजीव सातव ने एक हजार 115 सवाल पूछे.

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First published: 5 April 2019, 8:12 IST
 
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