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अगर देश में आई गठबंधन की सरकार तो बर्बाद हो जाएगी भारत की अर्थव्यवस्था !

कैच ब्यूरो | Updated on: 15 January 2019, 12:10 IST

2019 लोकसभा चुनाव से पहले देशभर मेंं महागठबंधन बनाने की कवायद चल रही है. केंद्र की वर्तमान मोदी सरकार को हराने के लिए सारी पार्टियां इकट्ठा हो रही हैं. लेकिन इतिहास बताता है कि देश में जब-जब गठबंधन की सरकार बनी है भारत की अर्थव्यवस्था बर्बादी के कगार पर आ गई है. साल 2019 का लोकसभा चुनाव साल 1977 वाली स्थिति पर नजर आता है.

साल 1977 में इंदिरा गांधी को हराने के लिए पूरा विपक्ष एकजुट हुआ था. तब जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में एक छतरी के नीचे मोरारजी देसाई, चौधरी चरण सिंह, बाबू जगजीवन राम, राज नारायण और जेबी कृपलानी जैसे नेता इकट्ठा हुए थे. उन्होंने इंदिरा गांधी को हराने के लिए देशभर में गठबंधन बनाया था. अब नरेंद्र मोदी के विरोध में राहुल गांधी, मायावती, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी और तेजस्वी यादव, शरद पवार, चंद्रबाबू नायडू जैसे नेताओं की कतार है.

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साल 1977 में जब जनता पार्टी की सरकार बनी तब मोरारजी देसाई देश के प्रधानमंत्री बने थे. हालांकि चौधरी चरण सिंह बनना चाहते थे. इसके बाद पार्टी में खेमेबाजी शुरू हो गई और अंत में पार्टी टूट गई. परिणाम ये निकला की तीन साल के भीतर साल 1980 में कांग्रेस सत्ता में लौट आई. 

लेकिन इन तीन सालों में यानि खिचड़ी सरकार में देश की अर्थव्यवस्था बर्बादी के कगार पर आ गई थी. जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद 1978 में 54 मल्टीनेशनल कंपनियों ने देश छोड़ दिया था. कोकाकोला, आईबीएम, कोडैक जैसी कंपनियां देश से वापस चली गईं थी. 1977 में जो जीडीपी ग्रोथ रेट 7.47% थी, 1979-80 में गिर कर -5.20% फीसदी पर पहुंच गई थी. 

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इसके बाद राजीव गांधी की स्थाई सरकार में कंप्यूटर क्रांति हुई. वहीं वीपी सिंह की गठबंधन सरकार में रक्षा मंत्री रहते हुए मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबिया सईद को बचाने के लिए आतंकियों को छोड़ना पड़ा था.

चंद्रशेखर की गठबंधन सरकार में देश का सोना गिरवी रखा गया तो नरसिम्हा राव की मजबूत सरकार में इकनॉमिक रिफॉर्म हुए. वहीं देवेगौड़ा से गुजराल की सरकार आते-आते ग्रोथ रेट 7.97 फीसदी से गिरकर 4.30% पर आ गया. फिर जब देश में मजबूत अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार बनी तो परमाणु परीक्षण किया गया.

First published: 15 January 2019, 12:10 IST
 
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