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फाइव स्टार होटल में 50 लाख हर महीने किराया दे रहा है लोकपाल का कार्यालय

कैच ब्यूरो | Updated on: 2 January 2020, 15:40 IST

लोकपाल कार्यालय जल्द अपने नए दफ्तर में शिफ्ट हो जायेगा. फिलहाल यह अपने दफ्तर के लिए 50 लाख प्रति माह किराया दे रहा है. लोकपाल का यह दफ्तर  फ़िलहाल चाणक्यपुरी के पांच सितारा अशोक होटल में है. एक रिपोर्ट के अनुसार एक अधिकारी ने कहा कि इस महीने लोकपाल का दफ्तर अपने स्थाई दफ्तर में शिफ्ट हो जायेगा. इस दफ्तर का मासिक किराया 50 लाख रुपये है. एक पत्रकार द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि इसका कुल मासिक किराया लगभग 50 लाख है और इसके लिए 22 मार्च 2019 से 31 अक्टूबर, 2019 तक 3,85,09,354 रुपये का भुगतान किया गया है. अब लोकपाल के कार्यालय के लिए पूर्व ICDAR (इंटरनेशनल सेंटर फॉर अल्टरनेटिव डिस्प्यूट रिजॉल्यूशन) भवन में स्थान आवंटित किया गया है.

हालांकि आरटीआई के जवाब में कार्यालय के स्थान का विवरण नहीं दिया गया है. रिपोर्ट के अनुसार एक अधिकारी ने कहा "लोकपाल का कार्यालय राष्ट्रीय राजधानी में अपने स्वयं के स्थायी कार्यालय में चला जाएगा." लोकपाल राष्ट्रीय स्तर पर भ्रष्टाचार के मामलों से निपटने के लिए एक सर्वोच्च निकाय है. इसमें केंद्र सरकार के सार्वजनिक अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की समय-समय पर जांच की जानी है. राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने 23 मार्च को लोकपाल के अध्यक्ष के रूप में न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष को पद की शपथ दिलाई. लोकपाल के आठ सदस्यों को न्यायमूर्ति घोष ने 27 मार्च को शपथ दिलाई थी.


उच्च न्यायालयों के पूर्व मुख्य न्यायाधीशों जस्टिस दिलीप बी भोसले, प्रदीप कुमार मोहंती, अभिलाषा कुमारी और अजय कुमार त्रिपाठी ने लोकपाल के न्यायिक सदस्यों के रूप में शपथ ली थी. तब सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की पहली महिला प्रमुख अर्चना रामासुंदरम, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्य सचिव दिनेश कुमार जैन, पूर्व आईआरएस अधिकारी महेंद्र सिंह और गुजरात कैडर के पूर्व आईएएस अधिकारी इंद्रजीत प्रसाद गौतम ने लोकपाल के गैर-न्यायिक सदस्यों के रूप में शपथ ली थी.

लोकपाल पैनल में एक चेयरपर्सन और अधिकतम आठ सदस्यों के लिए प्रावधान है. इनमें से चार को न्यायिक सदस्य बनाने की जरूरत है. लोकपाल अधिनियम, जो केंद्र में लोकपाल की नियुक्ति की परिकल्पना करता है और राज्यों में लोकसेवकों की कुछ श्रेणियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों को देखने के लिए 2013 में पारित किया गया था.

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First published: 2 January 2020, 15:35 IST
 
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