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बॉस की मनमानी पर सरकार ने लगाई लगाम, अब घर से नहीं देना होगा ऑफिस मेल और कॉल का जवाब

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 January 2019, 9:17 IST

नौकरीपेशा लोगों के लिए सरकार एक और खुशखबरी लेकर आई है. लोकसभा में एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले ने एक प्राइवेट मेंबर्स बिल पेश किया है जिसके तहत अब ऑफिस के कर्मचारियों को ऑफिस हॉर्स के बाद बॉस की कॉल्स और मेल का जवाब देने के लिए कोई बाध्यता नहीं होगी. इस प्रिवेट मेंबर्स बिल में कर्मचारियों को ऑफिस की साल या मेल को रिजेक्ट करने के अधिकार देने की बात कही गई है.

एनसीपी सांसद द्वारा पेश किये गए इस बिल को राइट टू डिसकनेक्ट (Right To Disconnect) नाम दिया गया है. इस बिल को पेश करते हुए सुप्रिया सुले ने कहा कि इस बिल के जरिए कंपनी कर्मचारियों पर जरुरत से ज्यादा काम का बोझ नहीं डाल सकेगी. उन्होंने बताया कि इस बिल के आने के बाद से नौकरीपेशा लोगों को ऑफिस का तनाव काम करने में मदद मिलेगी और साथ ही ऑफिस की जिम्मेदारियों के दाथ वो अपनी पर्सनल लाइफ को स्टेबल कर सकेंगे. गौरतलब है कि यह बिल अभी सिर्फ लोकसभा में पेश किया गया है. इस बिल पर क़ानून बनने के लिए अभी इसे लोकसभा और राज्‍यसभा, दोनों सदनों से मंजूरी मिलना आवश्यक है.

बता दें, इस बिल के अंतर्गत कल्याण प्राधिकरण का गठन किया जाएगा, जिसमें आईटी, कम्यूनिकेशन और श्रम मंत्रियों को शामिल किया जाएगा. इसी के साथ इस बिल के अंतर्गत एक चार्टर भी तैयार किया जाएगा. इस चार्टर के तहत जिस भी कंपनी में कर्मचारियों की संख्या 10 से अधिक है वो कर्मचारियों की सहमति से इस चार्टर में शामिल होंगे. इसके बाद ही एक इसके आधार पर रिपोर्ट बनाई जाएगी.

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गौरतलब है कि इस तरह का बिल फ्रेंच सुप्रीम कोर्ट द्वारा लागू किया जा चुका है. इसी तर्ज पर न्यूयॉर्क में भी इसकी शुरुआत हो चुकी है और जर्मनी में भी इसे कानून बनाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. अगर यह राइट टू डिसकनेक्ट बिल पारित होकर कानून बन गया तो निश्चित तौर पर प्रावइेट कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत होगी.

First published: 10 January 2019, 9:04 IST
 
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