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दिल्ली में स्ट्राइक का जश्न, घाटी में घुसपैठ बढ़ी

सुहास मुंशी | Updated on: 16 October 2016, 4:06 IST
(सजाद मलिक/कैच न्यूज़)
QUICK PILL
  • बीजेपी नेता, खासतौर पर रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर सर्जिकल स्ट्राइक का जश्न मनाए जा रहे हैं और उधर घाटी में सुरक्षाबलों को अब तक का सबसे मुश्किल वक्त देखने को मिल रहा है.
  • घाटी में घुसपैठियों और मुठभेड़ों की संख्या में जैसे बाढ़ आ गई है. शस्त्रागार से भारी संख्या में हथियार गायब हैं और उग्रवादी बनने वाले युवा कश्मीरियों की तादात में भी इजाफा हुआ है.   

घाटी में कुछ महीनों से फैली अशांति के चलते खुफिया सेवा को तगड़ा झटका लगा है. लगातार बढ़ते आतंकी हमलों की वजह से सेना पिछले कई हफ्तों से हाई अलर्ट पर है. रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक इस बार एलओसी पार कर सीमा में घुसे घुसपैठियों की संख्या पिछले साल के मुकाबले ढाई गुना ज्यादा है. 

खुफिया सू़त्रों के मुताबिक, फिलहाल घुसपैठ को कोशिशों में जबरदस्त बढ़ोतरी देखी गई है और इनमें से 87 बार वे सफल भी हुए हैं. पिछले साल घुसपैठ की 90 कोशिशों में से महज़ 35 सफल हुई थीं. लगता नहीं कि अगले एक-डेढ़ महीने तक घुसपैठ की कोशिशों में कोई कमी आएगी. बल्कि सच बात तो यह है कि इनकी संख्या बढ़ेने वाली है. सुरक्षा एजेंसियों की मानें तो इसी दौरान घुसपैठ बढ़ने की आशंका है क्योंकि इसके बाद बर्फबारी शुरू हो जाएगी और दोनों तरफ की हलचल अपने आप थम जाएगी. 

100 कश्मीरियों ने घर छोड़ा

2014 में घुसपैठ की संख्या 65 थी, 13 में 97, 12 में 121, 11 में 52, 10 में 82, 9 में 99 और 8 में 27 थी. ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक सेना ने इस साल अकेले 120 उग्रवादियों को मार गिराया है जबकि पिछले साल यह संख्या 102 थी. अगर इसमें राज्य पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के साथ हुई मुठभेड़ों को जोड़ दिया जाए तो मरने वाले की संख्या तकरीबन 130 होगी.

घाटी की ज़मीनी हक़ीक़त ये है कि घुसपैठ पूरी तरह नहीं रोकी जा सकती. उनकी तरफ़ से लगातार कोशिशें होंगी. हम सिर्फ़ इतना कर सकते हैं कि उन्हें घुसपैठ की भरी कीमत चुकानी पड़े. 

इस बीच घाटी के शस्त्रागारों से हथियार गायब होने लगे हैं. पिछले दिनों हुई हिंसा के दौरान ये हथियार शस्त्रागार से उठा लिए गए. मोटेतौर पर कम से कम 100 क्लाशनिकोव राइफल्स और एसएलआर गायब हैं. जम्मू-कश्मीर सरकार की खुफ़िया एजेंसी के मुताबिक कम से कम 80 से 100 के बीच युवा भी अपना घर छोड़ चुके हैं. 

अधिकारी ने कहा कि हमें गायब नौजवानों की चिंता ज़्यादा नहीं है. देर-सबेर हम उनका पता लगा ही लेंगे. हमारे लिए उनकी कोई खास अहमियत नहीं है. वो ज्यादा से ज्यादा क्या करेंगे सिवाय माहौल बनाने के. बड़ा सवाल तो लश्कर-ए-तैयबा के प्रशिक्षित उग्रवादियों की घुसपैठ की. हमारा पूरा ध्यान फिलहाल उन पर है.

अधिकारी ने यह भी बताया कि जब से घाटी में हिंसा फैली है, तभी से वहां सेना की टुकडि़यां अलर्ट पर हैं लेकिन स्ट्राइक के बाद ये और सतर्क हो गई हैं. सूत्रों के अनुसार पाकिस्तानी और भारतीय दोनों सेनाओं ने एलओसी पर पांच-सात बटालियनें और बढ़ा दी हैं. ताकि दोनों ओर से सीमा चाक-चौबंद हो जाए.

ख़ुफ़िया तंत्र पर असर

लेकिन सेना के लिए सबसे बड़े नुकसान की बात यह है कि अशांति के वक्त उनका सम्पर्क अपने निजी लोगों और खुफिया एजेंसी दोनों से कट जाता है. फिलहाल घाटी में कुछ शांति हुई है लेकिन इसके बावजूद आपसी अविश्वास और नफरत का असर साफ़ देखा जा सकता है.

उन्होंने कहा कि घाटी में फैली अशांति की वजह से खुफिया सूचना पर आधारित सारी कार्यवाई रोक दी गई है. इसीलिए विरोध प्रदर्शन भी पूरी तरह बंद गए हैं. हम फिर से काम पर लौट रहे हैं. हमारा अनुमान है कि अभी सेब और खेती का मौसम चल रहा है. स्कूल और अस्पतालों पर सामान्य रूप से काम करने का दबाव है, लोग थक-हार गए हैं. इसलिए सब कुछ सामान्य होने को है.

First published: 16 October 2016, 4:06 IST
 
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