Home » इंडिया » M. Nageswara Rao as CBI director challenged in Supreme Court
 

एम नागेश्वर राव को CBI का अंतरिम निदेशक बनाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे प्रशांत भूषण

कैच ब्यूरो | Updated on: 14 January 2019, 16:07 IST

गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) कॉमन कॉज़ की ओर से वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषन ने एम नागेश्वर राव की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के अंतरिम निदेशक के रूप में नियुक्ति को चुनौती देते हुए सोमवार को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. पूर्व सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को उच्च-स्तरीय चयन पैनल द्वारा हटाए जाने और 10 जनवरी को अग्नि सेवाएं, नागरिक सुरक्षा और होमगार्ड के महानिदेशक बनाए जाने के बाद राव अंतरिम निदेशक की जिम्मेदारी दी गई थी.

इसके बाद वर्मा ने भारतीय पुलिस सेवा (IPS) से इस्तीफा देकर इसे ठुकरा दिया. अंतरिम सीबीआई निदेशक के रूप में नियुक्त होने के कुछ घंटों के भीतर नागेश्वर राव ने बुधवार और गुरुवार को वर्मा द्वारा जारी किए गए सभी स्थानांतरण आदेशों को उलट दिया था. आलोक वर्मा को हटाने वाली समिति ने सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश ए.के. सीकरी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विपक्ष के प्रतिनिधि मल्लिकार्जुन खड़गे शमी थे.

8 जनवरी को भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने 23 अक्टूबर के सरकारी आदेश को रद्द करते हुए वर्मा फिर से सीबीआई के निदेशक पद पर नियुक्त करने का आदेश दिया था लेकिन उच्च स्तरीय समिति द्वारा सीवीसी के निष्कर्षों की समीक्षा करने तक किसी भी नए नीतिगत निर्णय लेने से रोक दिया था.

ये भी पढ़ें : 8 महीने के निचले स्तर पर आयी थोक महंगाई, दिसंबर तक आयी इतनी बड़ी गिरावट

नए सीबीआई निदेशक के चयन की तैयारी 

आलोक वर्मा को सीबीआई निदेशक पद से हटाए जाने के बाद कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने सीबीआई के शीर्ष पद के लिए कुछ 10 महानिदेशक स्तर के आईपीएस अधिकारियों में से अगला सीबीआई निदेशक चुनने की कवायद शुरू कर दी है. इस सूची में 1983, 1984 और 1985 में चुने गए वरिष्ठ भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों के नाम शामिल है.

फिलहाल इस दौड़ में सब आगे 1985-बैच के आईपीएस अधिकारी, मुंबई पुलिस आयुक्त सुबोध कुमार जायसवाल, उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक ओ.पी. सिंह और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के प्रमुख वाई.सी. मोदी का नाम सबसे आगे है. DoPT द्वारा CBI निदेशक पद के लिए कम से कम तीन या चार अधिकारियों के नामों का चयन करने के बाद, उन्हें प्रधानमंत्री, भारत के मुख्य न्यायाधीश और लोकसभा में विपक्ष के नेता वाली समिति के पास भेजा जायेगा.

First published: 14 January 2019, 16:07 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी