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मध्य प्रदेश: किसानों की जमीन पर अरबों का लोन लेकिन कंपनी ने नहीं लगाया पावर प्लांट

पत्रिका स्टाफ़ | Updated on: 13 August 2016, 16:35 IST

मध्य प्रदेश के रीवा के डभौरा में पॉवर प्लांट के नाम किसानों की जमीन का अधिग्रहण करने वाली वीडियोकॉन ग्रुप ने छह साल भी बाद जमीन पर कुछ भी काम नहीं किया है. 2010 में इस ग्रुप ने 1346 एकड़ जमीन औने-पौने दाम में खरीद ली. किसानों को भुगतान के तौर पर 25 करोड़ रुपये दिए गए, लेकिन कंपनी ने जमीन के नाम पर अरबों रुपये बैंक से लोन लिया. 

मध्य प्रदेश में निवेश के नाम पर चल रहे इस खेल का खुलासा पिछले विधानसभा सत्र में सरकार द्वारा दिए गए जवाब से हुआ है. अक्टूबर 2010 में खजुराहो में हुई इंवेस्टर्स समिट में वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने रीवा जिले के डभौरा (घूमन) में बिजली संयंत्र लगाने के लिए एमओयू साइन किया था. इसके बाद वीडियोकॉन ने बिचौलियों के जरिए किसानों की जमीन का अधिग्रहण करना शुरू किया. छह साल बीत जाने के बाद भी इस जमीन पर कोई काम नहीं शुरू हुआ है.

कंपनी अब भी दावा कर रही है कि वह पावर प्लांट लगाएगी. 22 अक्टूबर 2010 को एमओयू साइन करने वाली वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज लिमिटेड छह साल में छह बार एग्रीमेंट में संशोधन कर चुकी है. इस दौरान प्रोजेक्ट एम्प्लीमेंट के लिए कंपनी भी बदल दी. अब इस प्रोजेक्ट को उसने प्रास्परस एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के हवाले कर दिया है.

किसानों से जमीन लेने के बाद मेसर्स प्रास्परस एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड ने इसे आईडीबीआई बैंक में गिरवी रख दिया. कंपनी ने पावर प्लांट लगाने के नाम पर अरबों का लोन लिया है. जमीन गिरवी किए जाने की जानकारी राज्य सरकार को भी है. इस संबंध में सरकार ने प्रास्परस कंपनी से जवाब मांगा था, तो उसके द्वारा जमीन आईडीबीआई बैंक में बंधक होने की जानकारी दी है.

First published: 13 August 2016, 16:35 IST
 
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