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एमपी: बीजेपी के 75+ फॉर्मूले से मंत्री गौर और सरताज पर गाज

कैच ब्यूरो | Updated on: 1 July 2016, 10:00 IST
(एएनआई)

मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान कैबिनेट के विस्तार के दौरान चले सियासी ड्रामे का अंत उम्रदराज मंत्री बाबूलाल गौर और सरताज सिंह के इस्तीफे के साथ हुआ. गुरुवार को फेरबदल से पहले दोनों मंत्रियों से इस्तीफा देने को कहा गया था.

बीजेपी के दिग्गज नेता और राज्य के गृहमंत्री बाबूलाल गौर ने इस्तीफा देने से मना कर दिया था और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को उन्हें बर्खास्त करने की चुनौती तक दे डाली थी. बाद में पार्टी नेताओं और आलाकमान के निर्देश के बाद दोनों मंत्रियों ने अपना इस्तीफा दे दिया.

गौर ने बर्खास्तगी की दी चुनौती

सीएम शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करते हुए नौ नए चेहरों को शामिल किया है. दरअसल बीजेपी आलाकमान ने साफ किया है कि पार्टी की जहां भी सरकारें हैं वहां पर 75 वर्ष से ज्यादा के किसी भी व्यक्ति को मंत्री पद पर नहीं रखा जाएगा.

शिवराज सरकार में सरताज सिंह, बाबूलाल गौर और कुसुम महदेले की उम्र 75 वर्ष से ज्यादा है. इसी वजह से 75 पार के फॉर्मूले का पालन करते हुए उनसे इस्तीफा देने के लिए कहा था.

इस्तीफे से पहले खरी-खरी

पार्टी हाईकमान का इस्तीफा देने का फरमान लेकर पहुंचे प्रदेश प्रभारी डॉक्टर विनय सहस्त्रबुद्धे और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान को खरी-खरी सुननी पड़ी.

सरताज सिंह ने इस्तीफा देने में ना-नुकर करते हुए कह दिया कि पार्टी हाईकमान को भी उनका यह संदेश पहुंचा दिया जाए कि चुनाव में उम्र से नहीं काम की बदौलत जीत मिलती है. 

75 पार के फॉर्मूले ने ली बलि

बीजेपी आलाकमान ने 75 के फॉर्मूले में मंत्री बाबूलाल गौर और सरताज सिंह से इस्तीफा मांग लिया. अचानक इस्तीफे का फरमान सुनाए जाने से भौंचक दोनों मंत्रियों ने पहले विरोध किया, लेकिन दिल्ली के दबाव में उन्होंने अपने इस्तीफे भेज दिए.

मंत्रिमंडल में अब मुख्यमंत्री सहित कुल 30 सदस्य हो गए हैं, जबकि 4 पद खाली हैं. राजभवन में आयोजित समारोह में राज्यपाल रामनरेश यादव ने सभी मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई.

इस्तीफे के लिए आलाकमान का संदेश

अंतिम क्षणों तक मंत्रिमंडल की सूची को लेकर काट-छांट का दौर चलता रहा. इंदौर के सुदर्शन गुप्ता सहित 3 सदस्यों के नाम दोपहर में ही काटे गए. वहीं शपथ ग्रहण समारोह से गौर और सरताज सिंह गैर हाजिर रहे.

इससे पहले दोनों मंत्रियों से इस्तीफा मांगने के लिए बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने प्रदेश प्रभारी डॉ. विनय सहस्त्रबुद्धे और प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान को तैनात किया था.

रामलाल से चर्चा के बाद इस्तीफा

दोपहर में उन्होंने दोनों मंत्रियों के निवास पर जाकर पार्टी हाईकमान का संदेश दिया, लेकिन गौर और सरताज ने उन्हें दो टूक जवाब देकर कहा कि उनका कुसूर बताया जाए. सूत्रों के मुताबिक दोनों ने यह भी कहा कि अगर 75 का फॉर्मूला लागू करना था, तो उन्हें पार्टी ने चुनाव में टिकट ही क्यों दिया? 

इसके बाद दिल्ली से राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल ने दोनों मंत्रियों से फोन पर लंबी चर्चा की. आखिरकार गौर और सरताज इस्तीफा देने के लिए राजी हो गए. दोनों ने शाम साढ़े चार बजे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को अपने इस्तीफे भेज दिए. 

केंद्र में लागू होगा फॉर्मूला!

हालांकि पार्टी ने कुसुम महदेले के इस्तीफे पर ज्यादा जोर नहीं दिया, जबकि वे भी 75 के फॉर्मूले में फिट नहीं थीं. कहा जा रहा है कि इसके पीछे जातिगत समीकरण हैं.

शिवराज मंत्रिमंडल में फेरबदल के बाद अब यही फॉर्मूला केंद्र में भी लागू किया जा सकता है. ऐसे में नजमा हेपतुल्ला का मंत्री पद जा सकता है. इसके अलावा कलराज मिश्र भी इस फॉर्मूले के दायरे में हैं.

हालांकि माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के ब्राह्मण नेता कलराज मिश्र को फिलहाल पार्टी मंत्री पद से हटाने के मूड में नहीं है, क्योंकि राज्य में अगले साल विधानसभा चुनाव हैं.

First published: 1 July 2016, 10:00 IST
 
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