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केरल: मुस्लिम लड़की ने माथे पर लगाई बिंदी तो मदरसे ने दी ये सजा

कैच ब्यूरो | Updated on: 9 July 2018, 13:11 IST

उत्तरी केरल के एक मदरसे ने एक बच्ची को इस लिए निकाल दिया, क्योंकि बच्ची ने अपने माथे पर बिंदी लगा ली थी. बच्ची ने माथे पर बिंदी एक शॉर्ट फिल्म की शूटिंग के लिए लगाई थी. बच्ची को मदरसे से निकाले जाने के बाद उसके पिता ने एक फेसबुक पोस्ट लिखी, जो अब वायरल हो गई है.

बता दें कि ये पोस्ट उमर मलयिल नाम के एक शख्स ने गुरुवार को लिखी थी. इस शख्स ने लिखा था कि मेरी बेटी ने एक शॉर्ट फिल्म की शूटिंग के दौरान माथे पर चंदन पोत्तु (चंदन के पेस्ट की बिंदी) लगाई थी. इस वजह से उसे मदरसे से निकाल दिया गया.

उमर ने फेसबुक पोस्ट में लिखा, पढ़ाई लिखाई के साथ-साथ हिना सिंगिंग और एक्टिंग का भी शौक रखती है. पढ़ाई में वह स्कूल और मदरसे में हमेशा प्रथम आती है. मदरसा द्वारा लिए गए पब्लिक एग्जाम में उसने पांचवीं रैंक हासिल की. अब उसे साल के बीच मदरसे से निकाल दिया गया है, क्योंकि उसने एक फिल्म की शूटिंग में अपने माथे पर बिंदी लगाई. अब हम क्या करें. उमर ने मदरसा प्रशासन पर तंज कसते हुए कहा, वैसे हम भाग्यशाली हैं, कि उन्होंने इसके लिए उसे और कड़ी सजा नहीं सुनाई.

उमर की ये पोस्ट अब फेसबुक पर वायरल हो रही हैं. इस पोस्ट के समर्थन में बहुत सारे पोस्ट मिले हैं. वहीं कुछ यूजर्स ने इसकी आलोचना की है. कुछ लोगों ने इस पोस्ट को लिखने के लिए धन्यवाद दिया. वहीं कुछ ने इसे इस्लाम की आलोचना से जोड़ देखा है. वहीं उमर मलयिल ने इस मामले में कोई सार्वजनिक बयान देने से मना कर दिया. लेकिन अपनी नई पोस्ट में उन्होंने अपने आलोचकों को जवाब दिया है.

इस पोस्ट में उन्होंने कहा है कि जिन लोगों को ये लगता है कि मछली जाल में फंस गई है. उन्हें इस पर जश्न मनाने की जरूरत नहीं है. ये एक ग्लोबल इश्यू नहीं है. इसे धार्मिक मुद्दा बनाकर लाभ लेने की जरूरत नहीं है. ये एक स्थानीय मुद्दा है. मैं ऐसा व्यक्ति नहीं हूं जो अपनी समुदाय के खिलाफ हूं. मैं सौ फीसदी आस्तिक हूं. मैं अपने धर्म से प्यार करता हूं. इसके साथ ही मैं दूसरे धर्म का भी सम्मान करता हूं. मुझे मानवता से प्यार है.

उन्होंने इस इस पोस्ट में ये भी लिखा है कि जो लोग मुझे ट्रोल कर रहे हैं या फिर मुझे गालियां दे रहे हैं. उन्हें इस मामले को पूरी तरह जान लेना चाहिए. वहीं उमर ने सवाल उठाते हुए पूछा कि उनकी बेटी के साथ ही इस तरह का व्यवहार क्यों किया जा रहा है. जबकि उसके साथ की दूसरी लड़कियां जो स्कूल में पढ़ रही हैं, वह पढ़ाई के साथ साथ दूसरी सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेती हैं. क्या हमारी बेटी किसी गतिविधि में भाग नहीं ले सकती.

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First published: 9 July 2018, 13:11 IST
 
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