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माघी मेला: 2017 पंजाब विधानसभा चुनाव का रास्ता यहां से शुरू होता है

राजीव खन्ना | Updated on: 14 January 2016, 8:39 IST
QUICK PILL
  • पंजाब का माघी मेला एक राजनीतिक घटना बन चुका है. इस बार तीन दल इस आयोजन के मौके पर लोगों का ध्यान खींचने की होड़ में जुटे हुए हैं.
  • पंजाब के 2017 विधानसभा चुनाव का रास्ता मुक्तसर माघी मेले से निकलता दिख रहा है. यह एक बहुत बड़ी राजनीतिक घटना हो जाएगी.

हर साल नानकशाही कैलेंडर के मुताबिक पंजाब के श्री मुक्तसर साहिब में माघ के महीने में माघी मेला का आयोजन किया जाता है. लेकिन इस साल यह सामाजिक-सांस्कृतिक आयोजन काफी विशेष होगा क्योंकि इस बार का मेला एक तरह से 2017 विधानसभा चुनाव के आस-पास हो रहा है.

माघी मेला पंजाब के प्रमुख मेलों में से एक है और सिखों के लिए इसका काफी धार्मिक महत्व है. यह 1705 में हुई मुक्तसर की लड़ाई की निशानी है, जहां मुगलों से लड़ते हुए 40 सिख योद्धाओं ने गुरु गोबिंद सिंह के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए थे.

पिछले कुछ दशकों में यह मेला राजनीतिक महत्व का आयोजन साबित हुआ है. कह सकते हैं कि धार्मिक होते हुए भी इसका एक छुपा हुआ राजनीतिक महत्व है. मुख्यमंत्री समेत तकरीबन सभी महत्वपूर्ण राजनीतिक हस्तियां अपने समर्थकों को संबोधित करने के लिए मुक्तसर पहुंचती हैं. 

इस बार भी सत्तारूढ़ शिरोमणि अकाली दल (बादल) और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग के बीच तीसरी पार्टी के रूप में आम आदमी पार्टी भी यहां सबका ध्यान आकर्षित करने की कोशिशों में जुटी है.

कांग्रेस का एजेंडा

राज्य प्रमुख के रूप में कैप्टन अमरिंदर सिंह की वापसी से सशक्त हुई कांग्रेस पार्टी के नेता अब प्रकाश सिंह बादल और उनके बेटे सुखबीर बादल के मौजूदा शासन के खिलाफ मोर्चा खोलने के लिए इस मौके को भुनाना चाहते हैं. 

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता लाल सिंह ने कहा, "सरकार को नीचा दिखाने के लिए हमारे पास मुद्दों की कोई कमी नहीं है. यह एक धार्मिक आयोजन है लेकिन इसने पिछले कुछ दशकों से राजनीतिक रंग ग्रहण कर लिया है. इसलिए हमारे दृष्टिकोण को सामने लाने के लिए हम भी इसका इस्तेमाल करते हैं. इस बार भी एजेंडा बहुत आसान है यानी पंजाब को बचाने के लिए बादल और उनकी सरकार से छुटकारा पाया जाए."

उन्होंने कहा कि दो दशकों के बाद राज्य में आतंकवादी हमलों की वापसी और राज्य की अर्थव्यवस्था समेत अन्य मुद्दों पर कांग्रेस अपनी चिंता सामने लाएगी.

लाल सिंह ने कहा, "1.25 लाख करोड़ रुपये के कर्ज के बोझ से दबकर राज्य की अर्थव्यवस्था बिगड़ी हुई है. राज्य में कोई औद्योगिक विकास नहीं हुआ है जिसने बेरोजगारी बढ़ाने के साथ ही युवाओं को ड्रग्स लेने के लिए प्रेरित किया है. सरकार की नीतियां नाकाम रही हैं. कृषि क्षेत्र भी धराशायी हो चुका है और किसान कर्ज के नीचे दबे हुए हैं. सरकार स्वयं ही दिवालिया हो चुकी है. हम एक-एक कर इन सभी मुद्दों को उठाएंगे."

अकालियों का बचाव

इसमें कोई शक नहीं है कि माघी मेला के दौरान अकालियों को भी अपने नेतृत्व और एक दशक पुरानी सरकार के बचाव के लिए एक अग्नि परीक्षा का सामना करना होगा.

पार्टी बचाव की मुद्रा में है और जनता के सामने खुद को मजबूत तरीके से पेश करने की कोशिश में है. लेकिन, लगातार 10 वर्षों तक सत्ता में रहने वाली पार्टी यह नहीं कह सकती कि उसे  जनहित की नीतियों को लागू करने का वक्त नहीं मिला. 

कांग्रेस और आम आदमी पार्टी द्वारा लोगों को गुमराह किया जा रहा है

कई मोर्चों पर अकाली दल पीछे खड़ी दिखाई देती है. मंत्रियों व पार्टी के नेताओं को बीते कुछ महीनों में सार्वजनिक रूप से जनता के विरोध का सामना भी करना पड़ा है. मंत्रियों को कई आयोजनों और गांवों की यात्रा के दौरान काले झंडे दिखाए गए.

हालांकि पार्टी इन आलोचनाओं से निडर दिखती है. वरिष्ठ अकाली नेता विरसा सिंह वल्तोहा ने कैच को बताया कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी द्वारा लोगों को गुमराह किया जा रहा है.

दीना नगर और पठानकोट के आतंकवादी हमलों के लिए केंद्र सरकार पर जिम्मेदारी डालते हुए उन्होंने कहा, "आतंकवाद एक वैश्विक समस्या है. पंजाब सरकार ने इस तरह की घटनाओं से निपटने के लिए अपनी जिम्मेदारियों का ध्यान रखा है और भारत सरकार भी इस दिशा में कदम उठा रही है."

वल्तोहा ने कहा, "बादल के शासन में राज्य ने विकास किया है. हम लोगों को बताएंगे कि कैसे पिछले एक दशक में लोगों की जीवनशैली में सुधार हुआ है. यह केवल विपक्षी दलों द्वारा मचाया जा रहा शोर है कि सरकार ने लोगों के लिए कुछ भी नहीं किया. बादल सरकार ही शायद इकलौती सरकार है जो किसानों को मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने पर 5000 करोड़ रुपये खर्च कर रही है. यहां तक कि आज छोटे किसानों के पास 10 हॉर्स पॉवर के ट्यूबवेल हैं. यह जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है वह फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य जैसे मुद्दों को हल करे और किसानों के उत्पाद की खरीद-फरोख्त की उचित सुविधाएं उपलब्ध कराए."

राज्य पर लदे कर्ज के बारे में उन्होंने कहा कि लोगों को यह समझने की जरूरत है कि संपर्क मार्ग जैसी तमाम तरह की बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के यह कर्ज लिया गया था. 

केजरीवाल फैक्टर

इस माघी मेले के दौरान एक नए खिलाड़ी पर सभी की निगाहें रहेंगी. हम 'आप' की बात कर रहे है. पार्टी प्रमुख और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल मेले के दौरान एक रैली को संबोधित करेंगे. इस आयोजन को सफल बनाने के लिए उनके कार्यकर्ता कड़ी मेहनत कर रहे हैं.

पार्टी नेता दुर्गेश पाठक ने कहा, "हम युवाओं की बेरोजगारी, बड़े पैमाने पर नशीली दवाओं की तस्करी, पुलिस अत्याचार, कृषि संकट और बीमार उद्योगों जैसे तमाम मुद्दों को उठाएंगे." 

केजरीवाल पहले से ही पंजाबी भाषा में अपना एक संबोधन यूट्यूब पर डालकर पंजाबी मतदाताओं के राग से राग मिलाने की कोशिश कर चुके हैं. पार्टी सूत्रों का कहना है कि केजरीवाल गंभीरता से पंजाबी भाषा सीख रहे हैं और जल्द ही पंजाबी में लोगों को संबोधित करते दिखेंगे.

सूत्रों का यह भी कहना है कि पार्टी इस वक्त अपने मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा नहीं करेगी.

First published: 14 January 2016, 8:39 IST
 
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