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महाराष्ट्र: जय-वीरू, भाजपा-शिवसेना अब एक दूसरे को 'असरानी' और 'निजाम' कहते हैं

अश्विन अघोर | Updated on: 27 June 2016, 7:47 IST
(एजेंसी)
QUICK PILL
  • महाराष्ट्र में बीजेपी-शिवसेना की लड़ाई खुलकर सामने आ गई है. बीजेपी के प्रकाशित लेख में कहा गया है कि अगर ठाकरे गठबंधन तोड़ देते हैं तो उनकी स्थिति फिल्म शोले के जेलर (असरानी द्वारा निभाई गई भूमिका) के समान हो जाएगी
  • वहीं बीजेपी के इस प्रकाशन पर पलटवार करते हुए शिवसेना के सांसद संजय राउत का कहना है कि \'बीजेपी को यह नहीं भूलना चाहिए कि महाराष्ट्र में उनकी सरकार हमारे समर्थन पर टिकी है. यदि हम बाहर चले जाते हैं तो फणनवीस सरकार गिर जाएगी

शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी के बीच संघर्ष गहरा गया है. महाराष्ट्र में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सबसे पुराने घटक दलों के बीच की लड़ाई अब सड़क पर आ गई है.

शिवसेना ने राज्य और केंद्र सरकार की तुलना हैदराबाद के निजाम के साथ की तो भाजपा ने भी शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे की खिल्ली उड़ाकर उसी लहजे में जवाब देने का फैसला किया.

भाजपा का निजाम के रूप में उपहास शिवसेना के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कुछ हफ़्ते पहले औरंगाबाद में पार्टी के सम्मेलन में उड़ाया गया था.

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उद्धव ठाकरे ने इस हफ्ते की शुरुआत में मुंबई में शिवसेना के स्वर्ण जयंती समारोह के दौरान अपना आक्रमण जारी रखा और भारत-पाक संबंधों, कश्मीरी पंडितों से लेकर महाराष्ट्र में सूखे तक जैसे कई मुद्दों पर भाजपा की आलोचना की.

ठाकरे ने कहा, "हम अपने दम पर सत्ता में आने में सक्षम हैं और मैं जल्द ही इस लक्ष्य को हासिल कर लूंगा."

उन्होंने चुनाव के बाद भाजपा के साथ गठबंधन के बाद अपनी पार्टी के निरादर की ओर संकेत करते हुए आगाह किया है कि कोई भी गठबंधन शिवसेना के गौरव की कीमत पर कभी नहीं होगा.

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ऐसा प्रतीत होता है कि आलोचना ने भाजपा को परेशान कर दिया है. शिवसेना के लगातार हमले का जवाब देने के लिए महाराष्ट्र में पार्टी के मुख्य प्रवक्ता माधव भंडारी ने पार्टी के प्रकाशन मनोगत में एक लेख लिखा है जिसमें राउत को गठबंधन से बाहर होने की चुनौती दी गई है.

'मिस्टर राउत, आप तलाक कब ले रहे हैं?' शीर्षक से प्रकाशित यह लेख भाजपा की शिवसेना को सीधी चुनौती है.

उन्होंने रेखांकित किया कि शिवसेना जिस सरकार की तुलना निजाम के साथ कर रही है, वह खुद भी उसी का हिस्सा है. भंडारी ने ठाकरे के तथाकथित पराक्रम पर भी सवाल उठाए हैं.

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लेख में कहा गया है, "अगर ठाकरे गठबंधन तोड़ देते हैं तो उनकी स्थिति फिल्म शोले के जेलर (असरानी द्वारा निभाई गई भूमिका) के समान हो जाएगी. बिल्कुल असरानी की तरह उनके पीछे एक भी सिपाही नहीं बचेगा, जब उन्हें इसकी सबसे अधिक जरूरत होगी."

उम्मीद के अनुरूप, शिवसेना को यह ताना वहीं लगा, जहां उसे सबसे अधिक दर्द होता है. पार्टी के मुखपत्र सामना में एक लेख में राउत ने भंडारी और भाजपा पर खूब हमले किए.

राउत ने कहा है, 'भाजपा को यह नहीं भूलना चाहिए कि उनकी सरकार हमारे समर्थन पर टिकी है. यदि हम बाहर चले जाते हैं तो सरकार गिर जाएगी. बेशक, भाजपा खुशी से राकांपा के छगन भुजबल,सुनील तटकरे और अजीत पवार जैसे भ्रष्ट लोगों के समर्थन के साथ सत्ता में बनी रह सकती है. शिवसेना उद्धव ठाकरे के खिलाफ कोई अपमानजनक टिप्पणी बर्दाश्त नहीं करेगी."

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उन्होंने यह भी कहा कि जब भाजपा के केंद्रीय नेता गठबंधन को जारी रखने के पक्ष में हैं, वहीं राज्य स्तर पर कुछ छोटे लोगों पर इसे तोड़ने का भूत चढ़ा हुआ है. उन्होंने कहा, "शिव सैनिक भाजपा को उसकी औकात दिखाएंगे."

भंडारी के 'असरानी' वाले ताने के जवाब में शिवसेना विधायक नीलम गोरे ने कहा, "हमने सरकार के गलत निर्णयों और नीतियों की आलोचना की है. लेकिन व्यक्तिगत रूप से उनके नेताओं पर हमला करके इस तरह के निम्न स्तर तक हम कभी नहीं गिरे. उनको कुछ तो समझ होनी चाहिए."

सामना में लेख प्रकाशित होने के बाद शिवसेना कार्यकर्ताओं ने हिंसक प्रतिक्रिया व्यक्त की. राज्य में कई स्थानों पर हिंसक प्रदर्शन के अलावा नासिक में माधव भंडारी का पुतला जलाया गया.

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भाजपा के एक वरिष्ठ, जो अपना नाम नहीं देना चाहते, ने कहा, "हमने कुछ भी गलत नहीं किया है. शिवसेना के नेता पिछले 25 सालों से कई अवसरों पर हमारे नेताओं पर व्यक्तिगत हमले कर उनकी आलोचना कर चुके हैं. शिवसेना के दर्द की जड़ यह है कि भाजपा ने अधिक सीटों पर जीत हासिल की और वह प्रभावशाली स्थिति में है."

जाहिर है, भाजपा कार्यकर्ता शिवसेना नेताओं के व्यवहार से क्षुब्ध हैं और यह संदेश इस सप्ताह पुणे में राज्य कार्यकारिणी की बैठक के दौरान भाजपा नेतृत्व तक भी पहुंचा दिया गया.

इस बारे में संपर्क करने पर भंडारी ने कहा, "मैंने किसी की भी व्यक्तिगत रूप से आलोचना नहीं की है. मैंने सिर्फ शिवसेना के उन नेताओं के सामने तथ्य रखने की कोशिश की है जो बिना किसी उचित कारण बात-बात पर गठबंधन तोड़ने की धमकी देते रहते हैं. हम इसे और बर्दाश्त नहीं करेंगे."

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हालांकि, राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि कलह जारी रहेगा, लेकिन गठबंधन नहीं टूटेगा. वरिष्ठ पत्रकार कुमार केतकर कहते हैं, "इस तरह के झगड़े अपरिहार्य हैं, लेकिन गठबंधन के लिए घातक नहीं हैं. न तो भाजपा और न ही शिवसेना गठबंधन से बाहर होगी. यह खींचतान सिर्फ देश की वित्तीय राजधानी पर पूरा नियंत्रण स्थापित करने के लिए है. शिवसेना और भाजपा दोनों ही मुंबई पर अपना नियंत्रण करना चाहते हैं."

साल 2017 में बृहन्मुंबई नगर निगम के चुनाव होने हैं.

First published: 27 June 2016, 7:47 IST
 
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