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मराठा क्रांति के दबाव में सरकार झुकी, समितियां बनाईं

अश्विन अघोर | Updated on: 29 September 2016, 8:31 IST
QUICK PILL
  • महाराष्ट्र में कई दिनों से चल रही मराठा क्रांति मोर्चा रैली के आयोजकों से नवगठित समितियां मुलाक़ात कर उनकी शिक़ायतें सुनेंगी. 
  • वहीं सीएम देवेंद्र फडनवीस ने अपने बयान में पद पर बने रहने की अनिश्चितता ज़ाहिर कर महाराष्ट्र की राजनीति गर्म कर दी है.

कोपर्डी गैंग रेप, आत्महत्या और शैक्षिक एवं आर्थिक मुद्दे को लेकर शुरू हुई मराठा समुदाय की मौन रैलियों से महाराष्ट्र में राजनीतिक तनाव बढ़ता जा रहा है. रैलियों के आयोजकों की शिकायत थी कि सरकार इन मुद्दों पर बात करने तक को तैयार नहीं है. 

उन्होंने राज्य सरकार पर दबाव डाला कि वह जिला स्तर पर रैली के आयोजकों से मिलने के लिए विशेष समितियां बनाए. आखिर सरकार ने उनकी मांगों पर विचार करने के लिए नई समितियां बनाई हैं, जो पिछले कुछ समय से पैदा हो रहे गतिरोध को खत्म करने की कोशिश करेगी. जिला स्तर की इन प्रस्तावित समितियों में एक विधायक होगा और संबंधित जिलों की अन्य पार्टियों के दो प्रतिनिधि. 

राजनीतिक कुचक्र

रैलियों के कारण पैदा हुए इस तनाव को दूर करने के लिए सरकार ने तो कदम उठा लिए हैं, पर विपक्ष इन मुद्दों को सुलझाने के मूड में नहीं है. विपक्ष की पार्टियां स्थानीय निकायों के निकट भविष्य में होने वाले चुनावों तक इस मामले को सुलगाए रखना चाहती हैं. बृहन्मुंबई महानगरपालिका (एमसीजीएम), 28 जिला परिषद और नगर परिषद सहित दस नगर निगमों के अगले साल फरवरी-मार्च में चुनाव होने हैं.

अपना नाम नहीं बताने की शर्त पर एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा, ‘खबरें हैं कि विपक्ष इस मुद्दे को खींचने में लगा है ताकि उन्हें आगामी चुनावों में ट्रैक्शन मिल सके. यदि वे सच में ऐसा कर रहे हैं, तो यह इसका सबसे बड़ा उदाहरण होगा कि इस तरह राजनीतिक फैसले नहीं लेने चाहिए. 

रैलियों के आयोजकों ने सभी स्थापित मराठा नेताओं को बड़े नियोजित ढंग से आंदोलन से दूर रखा है. केवल शरद पवार, अजित पवार, अशोक चव्हाण और पृथ्वीराज चव्हाण जैसे नेता रैलियों से लाभ पाने की उम्मीद कर सकते हैं. लेकिन वे भी उनके करीब नहीं जा पाए हैं. मैं नहीं सोचता कि इस चाल से विपक्ष को कोई मदद मिलेगी.’

नेता ने बताया कि जल्द ये रैलियां बारामती, सांगली इस्लामपुर, नांदेड़ और लातूर जैसे शहरों की ओर बढेंगी, जो इन मराठा नेताओं के गढ़ हैं. और तब शरद पवार सहित शहर के उक्त नेताओं को सबसे अहम सवाल का सामना करना पड़ेगा. मराठा समुदाय शैक्षिक और आर्थिक दृष्टि से क्यों पिछड़ा हुआ है, जबकि ये नेता दशकों से सत्ता में हैं?

उन्होंने आगे कहा कि ये रैलियां निश्चित रूप से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडऩवीस के नेतृत्व वाली वर्तमान सरकार के विरोध में नहीं है.  ‘ये रैलियां कोपर्डी गैंग रेप और हत्या के मुद्दों पर मराठा समुदाय की नाराजगी व्यक्त करने का जरिया है, साथ ही वे मांगें, जिन्हें वर्षों से मराठा नेता नजरअंदाज कर रहे हैं.’

छिपी धमकियां

औरंगाबाद में पहली रैली आयोजित करने वाले कमेटी के प्रमुख सदस्य मानसिंह पवार ने कहा, ‘हमें इससे कोई मतलब नहीं है कि कौन मुख्यमंत्री हैं और कौन-सी पार्टी सत्ता में है. हमें केवल अपनी मांगों से मतलब है. यही सच है कि सभी मराठा नेताओं ने हमारी उपेक्षा की है, और हम निकट भविष्य में उनके लिए कोई उपयुक्त फैसला लेंगे. ’

आंदोलन की सेशल मीडिया टीम के स्वयंसेवक और संयोजक भैया पाटिल ने कहा, ‘किसी भी राजनेता को यह नहीं सोचना चाहिए कि वे हमारे आंदोलन से राजनीतिक फायदा उठा सकेंगे. हमारी मांगों को लेकर राजनीति से हम ऊब चुके हैं. यदि कोई भी राजनेता ऐसा करने का प्रयास करेगा, तो हम सुनिश्चित करेंगे कि उनका राजनीतिक कॅरियर खत्म हो जाए.’ 

सीएम का रहस्यमय बयान

इस बीच देवेंद्र फडनवीस के एक बयान ने महाराष्ट्र के गर्म राजनीतिक माहौल को और हवा दी है. उन्होंने अपने एक बयान में अपने पद पर बने रहने की अनिश्चितता व्यक्त की.राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी ने दावा किया है कि भाजपा में कुछ ऐसे नेता है, जो फडऩवीस को हटाने की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि वे ब्राह्मण हैं. 

राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता नवाब मलिक ने कहा, ‘सीएम फडऩवीस के बयान से सरकार में पैदा में हुई तथाकथित हलचल के लिए हम जिम्मेदार ठहराए जा रहे हैं. मैं खुलासा करना चाहता हूं कि ना तो हमारी पार्टी और न ही मराठा समुदाय ने मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग की है. इस विचारोत्तेजक बयान के पीछे भाजपा का आंतरिक संघर्ष है.’ 

हालांकि वरिष्ठ भाजपा नेता और पीडब्ल्यूडी मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने इस अटकलबाजी से इनकार किया, ‘पार्टी सहित किसी की भी ऐसी मांग नहीं है. सरकार के इस कार्यकाल तक देवेंद्र फडऩवीस सीएम बने रहेंगे.’

First published: 29 September 2016, 8:31 IST
 
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