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महाराष्ट्र सिंचाई घोटाला: भुजबल के बाद अजित पवार की बारी?

अश्विन अघोर | Updated on: 10 February 2017, 1:51 IST
QUICK PILL
  • एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ सौहार्दपूर्ण\r\n रिश्तों के मद्देनजर अजित पवार के जेल जाने की संभावनाएं काफी कम लगती हैं
  • सिंचाई घोटाले के वास्तविक आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचने के कारण निश्चित ही एनसीपी नेताओं की धड़कनें बढ़ गई हैं

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में निरंतर चल रही अस्थिरता थमती नहीं दिख रही. पार्टी नीत नए विवादों में घिरती जा रही है.

पार्टी के दिग्गज नेता और ओबीसी चेहरा छगन भुजबल को नई दिल्ली स्थित महराष्ट्र सदन के निर्माण में करोड़ो के कथित घोटाले के आरोप में न्यायिक हिरासत में भेजने से पार्टी के भीतर खलबली है. अब उसे अजित पवार और सुनील तटकरे की गिरफ्तारी की भी आशंका सता रही है.

ऐसे माहौल में राज्य के सिंचाई मंत्री गिरीश महाजन का यह बयान पार्टी के ऊपर बिजली बन कर गिरा है कि सिंचाई घोटाले में जारी जांच अब अपने अंतिम दौर में है और जल्द ही इस मामले में चार्जशीट भी दाखिल कर दी जाएगी. इस बयान के बाद अजित पवार और सुनील तटकरे की रातों की नींद ही उड़ गई होगी.

सिंचाई घोटाले में जांच अंतिम दौर में है और जल्द ही इस मामले में चार्जशीट दाखिल होगी

गिरीश महाजन ने हाल ही में मंत्रालय में एक बातचीत के दौरान कहा था कि राज्य की अधर में पड़ी सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करने के लिये 90 हजार करोड़ रुपये की आवश्यकता है. इन परियोजनाओं को वर्तमान में उपलब्ध धनराशि के दम पर पूरा कर पाना असंभव है. ऐसा करने के लिये राज्य को विभिन्न वित्तीय संस्थानों से 50 हजार करोड़ रुपये जुटाने होंगे.

उन्होंने यह भी बताया कि 70 हजार करोड़ रुपये के सिंचाई घोटाले की जांच भी करीब-करीब पूरी हो चुकी है और मामले को एक तार्किक अंत तक ले जाया जा रहा है. महाजन ने कहा, ‘‘इस मामले में बहुत ही जल्द अदालत में आरोप पत्र दायर कर दिया जाएगा और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा.’’

उन्होंने बताया कि कांग्रेस और एनसीपी के राज में बिना पर्याप्त धन के होते हुए भी परियोजनाओं को मंजूरी देते हुए निविदाएं आवंटित करने की होड़ लगी थी जिसके चलते राज्य की सिंचाई परियोजना पूरी तरह से दम तोड़ चुकी है.

महाजन कहते हैं, ‘‘इसका नतीजा यह हुआ कि परियोजना अधूरी रह गई जिसके चलते राज्य वर्तमान में अभूतपूर्व जल संकट का सामना कर रहा है. पानी की कमी को दूर करने के लिये इन सभी अधूरी परियोजनाओं को पूरा करना बेहद आवश्यक है. जिन परियोजनाओं का 70 से 80 फीसदी तक काम पूरा हो चुका है उन्हें पूरा करना सरकार की प्राथमिकता है.’’

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कोंकण डिवीजन में आने वाली बालगंगा और कोंधाने परियोजनाओं में कथित वित्तीय अमियमितताओं की जांच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के द्वारा की जा रही है. साथ ही उनका कहना था कि एसीबी दोषियों के खिलाफ कार्रवाई प्रारंभ कर चुकी है और वह प्रत्येक व्यक्ति जो भ्रष्टाचार का दोषी है उसे सलाखों के पीछे निश्चित ही पहुंचाया जाएगा.

देवेंद्र फणनवीस के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार के भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों के खिलाफ दिखाए गए कठोर रवैये ने वास्तव में एनसीपी को भीतर तक हिलाकर रख दिया है. हमेशा आक्रामक रवैया दिखाने वाले नेता अचानक से बेहद विनम्र हो गए हैं और उन्होंने मीडिया के सामने आना भी बंद कर दिया है.

देवेंद्र फणनवीस के भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों के खिलाफ उठाये गए कठोर रवैये से एनसीपी भीतर तक हिल उठी है

यह नजारा वर्तमान में चल रहे महाराष्ट्र विधानसभा के बजट सत्र के दौरान भी देखा जा सकता है. ईडी द्वारा मनीलॉन्ड्रिंग के आरोप में छगन भुजबल की गिरफ्तारी के बाद एनसीपी के विधायकों ने सदन की सीढ़ियों पर प्रदर्शन तो किया लेकिन जितेंद्र अहवाड और अजित पवार जैसे तेजतर्रार नेता उससे दूर ही रहे.


इसी तरह जब एनसीपी के विधायकों और विधान परिषद सदस्यों ने इस मामले को लेकर दोनों सदनों की कार्रवाई बाधित करने का प्रयास किया तो कभी इनके साथ सत्ता का सुख भोगने वाली कांग्रेस पार्टी ने भी इनका समर्थन नहीं किया. राजनीतिक जानकारों की नजर में यह इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि पार्टी भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बैकफुट पर आ गई है.

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सिंचाई घोटाले के वास्तविक आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचाने के महाजन के बयान ने निश्चित ही एनसीपी नेताओं की धड़कनों को बढ़ा दिया है. हालांकि एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ सौहार्दपूर्ण रिश्तों के मद्देनजर अजित पवार के जेल जाने की संभावनाएं काफी कम लगती हैं. लेकिन इस दौरान एक अन्य एनसीपी नेता सुनील तटकरे की रातों की नींद जरूर उड़ी रहेगी विशेषकर छगन भुजबल की गिरफ्तारी के बाद.

इसके अलावा सरकार ने विदर्भ की 148 सिंचाई परियोजनाओं की जांच भी प्रारंभ कर दी है. इन परियोजनाओं में 129 अमरावती प्रभाग से, 19 नागपुर प्रभाग से, मराठवाड़ा प्रभाग से 29 और महाराष्ट्र के बाकी हिस्सों की 3 परियोजनाएं शामिल हैं.

इसके अलावा आदिवासी क्षेत्र की 10 परियोजनाएं और पेयजल आपूर्ति की दो योजनाएं भी जांच के दायरे में हैं. महाजन का कहना है कि एसीबी लगभग एक पखवाड़े के भीतर सिंचाई घोटाले में आरोपपत्र दायर कर देगी.

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महाराष्ट्र का कई करोड़ रुपये का सिंचाई घोटाला उस समय सुर्खियों में आया जब कांग्रेस-एनसीपी गठजोड़ की सरकार के अंतिम दौर में पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चैहान ने यह कहकर सनसनी मचा दी थी कि 15 वर्षों के दौरान भारी-भरकम धनराशि की कई परियोजनाओं के बावजूद राज्य में सिंचाई क्षमता में न के बराबर ही सुधार हो पाया है.

उन्होंने राज्य की सिंचाई व्यवस्था पर एक श्वेत पत्र लाने की बात कही थी. तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा एक सार्वजनिक कार्यक्रम में दिये गए इस बयान के बाद एनसीपी सकते में आ गई थी क्योंकि यह संचाई मंत्रालय बीते काफी समय में उसके ही पास था.

पहले अजित पवार और उनके बाद सुनील तटकरे सिंचाई विभाग के मंत्री थे. यह मुद्दा सुर्खियों में आते ही विपक्ष ने इसे लपक लिया था. मजबूरन अजित पवार को मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना पड़ा.

उन्होंने घोषणा की कि सभी आरोपों से क्लीनचिट मिलने तक वे दोबारा मंत्री नहीं बनेंगे. हालांकि अपनी बात से पलटते हुए वे एक पखवाड़े के बाद ही वे वापस मंत्रिमंडल में लौट आए. अब अजित पवार और सुनील तटकरे दोनों का ही भाग्य अधर में लटका हुआ है.

First published: 20 March 2016, 12:03 IST
 
अश्विन अघोर @catchnews

मुंबई स्थित स्वतंत्र पत्रकार

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