Home » इंडिया » Maharashtra irrigation scam: NCP leader Sunil Tatkare in hot water
 

महाराष्ट्र सिंचाईं घोटाला: एनसीपी नेता सुनील तटकरे संकट में

अश्विन अघोर | Updated on: 11 September 2016, 7:37 IST

महाराष्ट्र के सिंचाई घोटाले का भूत एक बार फिर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के सामने आकर खड़ा हो गया है. एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने कई करोड़ रुपए के इस घोटाले में दूसरा मामला दर्ज कराया है. यह मामला रायगढ़ जिले में करजात के निकट कोंडाणे बांध के टेंडर में हुए घोटाले से जुड़ा हुआ है.

इस आरोपपत्र से एनसीपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व सिंचाई मंत्री सुनील तटकरे प्रत्यक्ष रूप से कानून के सीधे निशाने पर आ गए हैं. मामला थाणे जिले के कोपरी थाने में दर्ज कराया गया है. इसमें सिंचाई विभाग के छह तत्कालीन अधिकारियों और एक ठेकेदार का नाम शामिल है.

घोटाला कैसे सामने आया

इस सिंचाई घोटाले से राज्य को तब झटका लगा था जब कांग्रेस के तत्कालीन मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में दावा किया था कि हजारों करोड़ रुपए खर्च करने के बाद भी राज्य की सिंचाई सुविधाओं में मुश्किल से थोड़ा सा ही इजाफा हुआ है. यह बयान एनसीपी के लिए बड़ा झटका था क्योंकि राज्य में पिछले पन्द्रह सालों से सिंचाई विभाग की कमान उसके ही हाथ में थी.

भारतीय जनता पार्टी के नेता किरीट सोमैया और तत्कालीन विधायक देवेन्द्र फड़नवीस ने महाराष्ट्र एसीबी में संयुक्त रूप से कई शिकायतें दर्ज कराईं. उस समय वह विपक्ष में थे. सोमैया ने तो मामले की जांच कराने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका तक दाखिल की थी. आम आदमी पार्टी के पूर्व नेताओं मयंक गांधी और अंजलि दमानिया ने तो वर्ष 2012 में हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका भी दाखिल की थी.

2014 में हाईकोर्ट ने अपनी निगरानी में मामले की जांच का आदेश दिया. इस आदेश के बाद ही घोटाले की परतें सामने आने लगीं. 2014 के महाराष्ट्र चुनाव अभियान के दौरान भाजपा ने पूर्ववर्ती सरकार के इस सिंचाई घोटाले को जबर्दस्त मुद्दा बनाया था और लोगों को भरोसा दिया था कि सत्ता में आने के बाद दोषियों को न्याय के कटघरे में लाया जाएगा.

सत्ता में आने के तुरन्त बाद ही भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार ने सिंचाई घोटाले की जांच का आदेश दिया और जल्द ही एसीबी ने दो आरोपपत्र दाखिल कर दिए.

आपस का तालमेल

एसीबी ने आरोपों की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया. कोंडाणे बांध के निर्माण की प्रशासनिक अनुमति 19 मई 2011 को दी गई थी. हालांकि, कई तरह के तर्कों के कारण परियोजना को ठंडे बस्ते में रखने का निश्चय कर लिया गया था. परियोजना को ठंडे बस्ते में रखे जाने के बावजूद कोंकण पाट बंधारे निगम, थाणे ने इसके लिए टेंडर आमंत्रित कर लिए. मेसर्स एफए इन्टरप्राइजेज ने टेंडर भरा और ठेका इस कम्पनी को दे दिया गया.

एसीबी रायगढ़ के उप पुलिस अधीक्षक विवेक जोशी कहते हैं कि जांच के दौरान पता चला कि दरअसल जितनी अन्य कम्पनियों ने टेंडर भरे थे, वह वास्तव में निसार खत्री की ही कम्पनियां थीं. निसार खत्री एफए इन्टरप्राइजेज के मालिक हैं. टेंडर भरने वाली अन्य फर्म एफए कंस्ट्रकशन्स थीं. जोशी आगे कहते हैं कि दोनों ही कम्पनियों के निदेशक एक ही थे. पर कम्पनियां अलग-अलग दर्शायी गईं थीं. कोंकण सिंचाई विभाग निगम (केआईडीसी) ने निसार खत्री से मिलीभगत कर नियमों को नाकाम बनाते हुए ठेका एफए इन्टरप्राइजेज को दे दिया.

जोशी यह भी कहते हैं कि सरकार की अनुमति के बिना ही परियोजना की लागत बढ़ा दी गई. इसके अलावा एफए इन्टरप्राइजेज को ही अतिरिक्त काम आवंटित कर दिया गया. जांच के अनुपालन में कोंकण पाटबंधारे विभाग के तत्कालीन एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर डीपी शिर्के, तत्कालीन चीफ इंजीनियर बीबी पाटील, तत्कालीन सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर आरसी शिंदे, तत्कालीन अधीक्षण अभियन्ता प्रहलाद सोनवाणे, तत्कालीन एक्जीक्यूटिव इंजीनियर एपी कालूखे, तत्कालीन डिप्टी इंजीनियर राजेश रिठे तथा कांट्रैक्टर मेसर्स एफए इन्टरप्राइजेज के पार्टनर निसार फतेह मोहमद खत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है.

सभी के खिलाफ आपराधिक षडयंत्र रचने, टेंडर में ठेकेदार को अवैध लाभ पहुंचाने के लिए आपराधिक दुराचरण करने का मामला दर्ज कराया गया है. उप पुलिस अधीक्षक जोशी कहते हैं कि अब यह स्थापित करना है कि परियोजना के लिए टेंडर प्रक्रिया में धोखा और हेरफेर किया गया था और राज्य व केन्द्र सरकार की पर्यावरणीय अनुमति तथा अन्य तरह की अनुमति लिए बिना ही ठेका दे दिया गया. कॉन्ट्रेक्टर निसार खत्री ने अपने खार कार्यालय से खुद ही सभी तीनों कॉन्ट्रक्टर्स- एफए कन्स्ट्रक्शन्स, एफए इन्टरप्राइजेज और एबी नागा रेड्डी के लिए कोंकण बांध का टेंडर भरा था. तीसरा कॉन्ट्रैक्टर वास्तव में हैदराबाद का है. इससे साबित होता है कि तीनों में आपसी तालमेल था.

तटकरे की भूमिका

जांच के दौरान शुरुआती खुलासों में एनसीपी को जांच के दायरे से बाहर कर दिया गया था. उसे रक्षात्मक होने दिया गया. लेकिन मामले में एफआईआर दर्ज होने के साथ ही वरिष्ठ एनसीपी नेता तटकरे की कई स्तरों पर तकलीफें बढ़ गईं हैं. टेंडर की पूरी प्रक्रिया उस समय खत्म हुई थी, जब तटकरे राज्य के सिंचाई मंत्री थे.

जोशी आगे कहते हैं कि महाराष्ट्र के राज्यपाल के इस आदेश पर कि, जब तक चल रही परियोजनाएं पूरी नहीं हो जातीं तब तक 250 हेक्टेयर या इससे अधिक की सभी नई परियोजनाओं को चालू न किया जाए.

यह निर्देश 2011 में जारी किए गए थे. कोंकण बांध परियोजना प्रारम्भिक रूप से मध्यम श्रेणी की सिंचाई परियोजना थी, जिसे कम करके 240 हेक्टेयर किया गया था ताकि अनुमति मिल सके. उसकी ऊंचाई और क्षेत्र एक महीने में ही आश्चर्यजनक रूप से बढ़ गया. परियोजना लागत एक साल में 56 करोड़ से बढ़कर 614 करोड़ रुपए तक पहुंच गई.

एसीबी के एक अधिकारी ने अपना नाम न छापने की शर्त पर कहा कि सिंचाई मंत्री सुनील तटकरे की सहमति के बिना यह सम्भव ही नहीं था. आंतरिक प्रक्रिया में उनकी भूमिका की जांच की जाएगी.

First published: 11 September 2016, 7:37 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी