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महाराष्ट्र: कानूनी विशेषज्ञों का दावा, शिवसेना-एनसीपी और कांग्रेस की याचिका हो सकती है निरस्त

कैच ब्यूरो | Updated on: 24 November 2019, 11:39 IST

महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री और अजित पवार को उप मुख्यमंत्री के शपथ लेने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. इसे लेकर शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में सामूहिक याचिका दायर की है. सुप्रीम कोर्ट ने अर्जेंसी के आधार पर याचिका को शनिवार रात में ही रजिस्टर कर लिया और आज छुट्टी के दिन विशेष बेंच द्वारा इस पर सुनवाई हो रही है.

शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस जहां एक तरफ सुप्रीम कोर्ट द्वारा अपने पक्ष में फैसले की उम्मीद कर रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ संविधान से जुड़े मामलों के जानकार व सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विराग गुप्ता ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में दावा किया कि याचिका का संवैधानिक आधार नहीं है. इस कारण यह याचिका खारिज हो सकती है.

 

विराग गुप्ता ने बताया कि याचिका संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर की गई है. इसमें दो प्रार्थना की गई हैं. पहली राज्यपाल द्वारा फडणवीस को 23 नवंबर को मुख्यमंत्री बनाया जाना संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत असंवैधानिक बताया गया है. याचिका में कहा गया है किसुप्रीम कोर्ट द्वारा इसे रद्द किया जाना चाहिए.

वहीं दूसरी प्रार्थना में कहा गया है कि शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के महाविकास आघाडी गठबंधन को सरकार बनाने के लिए राज्यपाल बुलावा दें, सुप्रीम कोर्ट से यह मांग की गई है. वहीं, दूसरी प्रार्थना में किसी भी संवैधानिक प्रावधान के उल्लंघन का जिक्र नहीं किया गया है.

गुप्ता ने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत, किसी व्यक्ति के मूल अधिकारों का यदि हनन होता है तो वह सुप्रीम कोर्ट में न्याय के लिए जा सकता है. गुप्ता ने बताया कि देखा जाए तो तीन पार्टियों द्वारा गठबंधन सरकार बनाने के लिए दायर की गई याचिका निरस्त होने योग्य है.

 

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First published: 24 November 2019, 11:23 IST
 
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