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मराठाओं के खिलाफ मंत्री राजकुमार बडोले, 'हर कोई आरक्षण की मांग करने लगता है'

अश्विन अघोर | Updated on: 17 October 2016, 8:22 IST
QUICK PILL
  • महाराष्ट्र में आरक्षण जैसी मांग को लेकर मराठा समाज आन्दोलन चरम पर है. बड़ी संख्या में रैलियां निकाली जा रहीं हैं ताकि सरकार मराठा समाज की मांगों के आगे घुटने टेक दे.
  • इन रैलियों में लाखों लोग शिरकत कर रहे हैं मगर इन सबके बीच समाज के लोगों में असुरक्षा की भावना भी बढ़ रही हैं. एक मंत्री के बयान से हालात बिगड़ सकते हैं. 

मराठा समुदाय एससी एंड एसटी (प्रिवेंशन ऑफ एट्रोसिटीज) एक्ट, 1989 में संशोधन की मांग कर रहा है जिसके चलते, विशेषकर, दलित समुदाय को विरोध करने और रैली निकालने के लिए मजबूर होना पड़ा है. बड़े दलित नेता जैसे कि रामदास अठावले, प्रकाश अम्बेडकर, प्रो. जोगेन्द्र कावडे आदि ने सुरक्षित रुख अपनाया है मगर राज्य के सामाजिक न्याय मंत्री राजकुमार बडोले ने अधिनियम में संशोधन की मांग का कड़ा विरोध किया है और मराठाओं पर कार्रवाई का मन बना लिया है. 

औरंगाबाद में एक दलित सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए बडोले ने आरक्षण की मांग के लिए रैलियां निकाले जाने के तरीके की निन्दा की है. उन्होंने कहा है कि आज हर कोई उठ खड़ा होता है और आरक्षण की मांग करने लगता है. रैलियां निकालना आजकल फैशन बन गया है. इसमें आश्चर्य नहीं कि इन रैलियों में बड़ी भागीदारी होती है. भारी मात्रा में धन खर्च होता है. उन्होंने यह भी कहा कि बिना नोटिस दिए ही आन्दोलन की शुरुआत कर दी जाती है.

अधिनियम में संशोधन की मांग पर सामाजिक न्याय मंत्री ने कहा कि मैं कड़े शब्दों में कोपार्डी घटना (इस घटना में दलितों द्वारा एक मराठा लड़की के साथ कथित रूप से बलात्कार किए जाने के बाद हत्या कर दी गई थी, इस घटना का इस्तेमाल मराठा अपनी रैलियों में कर रहे हैं) की कड़ी निन्दा करता हूं. अभियुक्तों को कानून के तहत कड़ी से कड़ी सजा दी जानी चाहिए. 

लेकिन पूरे दलित समुदाय पर अपराधी होने का तमगा नहीं चिपका देना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि हम सिर्फ एक घटना के कारण एससी एंड एसटी (प्रिवेंशन ऑफ एट्रोसिटीज) एक्ट में संशोधन बर्दाश्त नहीं करेंगे.

मराठा नेताओं का पलटवार

पूरे राज्य के मराठा नेताओं ने बडोले के इस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है और राज्य मंत्रिमंडल से उनके बर्खास्तगी की मांग की है. पूर्व एनसीपी सांसद उदयन राजे भोसले और भाजपा के राज्यसभा के सदस्य संभाजी राजे भोसले, जो छत्रपति शिवाजी महाराज के वंशज हैं, भी उन लोगों में शामिल हैं, जिन्होंने बड़ोले के बयान की निन्दा की है. 

संभाजी राजे ने कहा है कि यह पूरी तरह अस्वीकार्य है. मराठा समाज किसी के खिलाफ नहीं है. योद्धा होने के बावजूद उन्होंने इन रैलियों में, जिसमें लाखों लोगों ने भाग लिया है, असाधारण धैर्य और अनुशासन दिखाया है. संभाजी कहते हैं कि इस तरह का बयान सरकार पर भी धब्बा है. बडोले को तुरन्त ही मंत्री पद से हटा दिया जाना चाहिए. 

बडोले ने बाद में सफ़ाई दी कि उन्होंने किसी भी समाज के खिलाफ कुछ नहीं कहा. उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है. मगर चिंता की बात यह है कि बडोले का बयान ऐसे समय आया है जब मराठा समाज के खिलाफ राज्य में दलित और ओबीसी समुदायों के बीच असंतोष बढ़ रहा है. हालांकि, उन्होंने फ़िलहाल प्रति-रैलियां नहीं निकालने का फ़ैसला किया है.

समाधान की दरकार

नासिक में कुछ हफ्ते पहले एक ओबीसी रैली निकाली गई थी जिसमें दस लाख से ज्यादा लोगों ने भाग लिया था. यह रैली इस बात की संकेत थी कि ओबीसी में अशांति बढ़ रही है. उन्हें डर है कि कहीं मराठाओं को भी आरक्षण के दायरे में ला दिया गया तो उनके आरक्षण प्रतिशत में कमी आ जाएगी. मराठा क्रांति मोर्चा ने शनिवार (15 अक्टूबर) को कोल्हापुर में रैली निकाली तो दलित संगठनों ने मराठावाडा के बीड में रैली निकाली.

ओबीसी एक्टिविस्ट और नासिक रैली के आयोजक प्रो. श्रवण देवड़ा कहते हैं कि यह अपरिहार्य है. न तो ओबीसी और न ही दलित के साथ यह हो सकता है. अगर हमारे हितों पर कुठाराघात किया गया तो हम हर तरह से इसका विरोध करेंगे. मैं कहना चाहता हूं कि जाति के नाम पर मराठाओं का आन्दोलन की भी सफल नहीं होगा. जाति के नाम पर लोगों को मोबलाइज करना तो आसान है, पर 400 से अधिक जातियों को एक छाते के तले लाना बहुत ही कठिन काम है.

ओबीसी आन्दोलन भी ठीक इसी तरह का है. मराठाओं के खिलाफ ओबीसी समुदायों में कड़ा आक्रोश है. यही कारण है कि महाराष्ट्र विधान सभा में मराठा विधायकों की संख्या 100 से भी कम चली गई है जबकि ओबीसी विधायकों की संख्या बढ़ी है.

First published: 17 October 2016, 8:22 IST
 
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