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महाराष्ट्र: सुबह 10:30 बजे आएगा 'सुप्रीम' फैसला, इससे पहले विधायकों को बचाने में जुटी सभी पार्टियां

कैच ब्यूरो | Updated on: 25 November 2019, 8:59 IST

Maharashtra Politics: महाराष्ट्र में चल रहे सियासी ड्रामे पर आज सुबह साढ़े दस बजे सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा. इससे पहले रविवार को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को नोटिस जारी किया था. वहीं सुप्रीम फैसले से पहले कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और शिवसेना अपने विधायकों को बचाने की कोशिशों में होटल-दर-होटल टहल रहे हैं.

ये तीनों पार्टियां अपने-अपने विधायकों को होटलों में रखकर रातभर निगरानी रख रही हैं, जिससे कि भाजपा और एनसीपी का बागी गुट उनके विधायकों पर सेंध न लगा पाएं. शिवसेना ने अपने विधयकों को मुंबई के होटल ललित में, कांग्रेस ने अपने विधायकों को जेडबल्यू मैरिएट में और एनसीपी ने अपने विधायकों को पहले रिनेसां होटल और फिर बाद में होटल हयात में ठहराया है.

रात भर ये तीनों पार्टियां अपने विधायकों को सारी सुख-सुविधाएं पहुंचा रही हैं. शिवसेना नेता सुभाष देसाई शिवसैनिक विधायकों से संपर्क बनाए हुए हैं. शिवसेना के विधायक जिस होटल में ठहराए गए हैं उस होटल की घेराबंदी की गई है. शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे का निर्देश है कि वहां से किसी भी विधायक को बाहर जाने की अनुमति नहीं है.

शिवसेना के विधायकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी मिलिंद नार्वेकर संभाल रहे हैं. वहीं उद्धव ठाकरे के बेटे और उनके उत्तराधिकारी आदित्य ठाकरे भी विधायकों से मिलकर उनका मनोबल बढ़ाने में जुटे हैं. इसके अलावा एनसीपी ने अपने विधायकों को संभालने की जिम्मेदारी जितेंद्र अहवद को दी है. एनसीपी खासतौर से गणेश नाइक पर नजर रख रहे हैं. गणेश नाइक ने चुनाव से पहले भाजपा से संपर्क साधने की कोशिश की थी.

स्वयं पार्टी प्रमुख शरद पवार अपने विधायकों से जा-जाकर मिल रहे हैं. एनसीपी के मुंबई इकाई के प्रमुख नवाब मलिक और विधायक दल के नेता जयंत पाटिल भी होटल का लगातार चक्कर लगा रहे हैं.

इसके अलावा कांग्रेस भी अपने विधायकों की निगरानी कर रही है. इसके लिए कांग्रेस दिल्ली से आए अपने नेताओं पर निर्भर है. कांग्रेस ने पहले तो अपने विधायकों को मुंबई से बाहर किसी होटल में शिफ्ट करने की योजना बनाई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने की उम्मीद तथा शरद पवार की सलाह पर उसने अपने विधायकों को मुंबई के ही होटल में शिफ्ट करने का निर्णय लिया.

कांग्रेस के सारे विधायक पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण और पृथ्वीराज चव्हाण की निगरानी में हैं. इन दो नेताओं की अनुमति के बिना कांग्रेस के किसी भी विधायक से कोई नहीं मिल सकता. कांग्रेसी विधायकों को संभालकर रखने का पूरा प्रबंधन पार्टी के संकट मोचन माने जाने वाले अहमद पटेल ने किया है. अहमद पटेल कानूनी मामले देख रही दिल्ली टीम को भी यहीं से ही निर्देश दे रहे हैं.

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First published: 25 November 2019, 8:36 IST
 
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